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छत्तीसगढ़ : 'टिकावन' का कारोबार चौपट, कामगार और व्यापारियों के माथे पर बेकारी की चिंता

शादी के सीजन में ही होता है सबसे ज्यादा कारोबार, इस बार एक पैसे की नहीं हुई बोहनी। पढ़िए पूरी खबर-

छत्तीसगढ़ : टिकावन का कारोबार चौपट, कामगार और व्यापारियों के माथे पर बेकारी की चिंता
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रायपुर। कोरोना के कहर के कारण शादियों पर भी ब्रेक लगने के कारण इस बार शादी के सीजन में होने वाला हर तरह का कारोबार चौपट हुआ है। शादियों में बर्तनों के साथ फर्नीचर की भी जमकर खरीदारी होती है। लॉकडाउन के कारण डेढ़ माह में इस कारोबार को 600 करोड़ की चपत लगी है। इसी के साथ इन धंधों से जुड़े कर्मचारियों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

कोरोना की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है। 25 मार्च से अब तक कई तरह के कारोबार बंद हैं। लॉकडाउन के पहले चरण के बाद दूसरे चरण में ही अक्षय तृतीया थी। इस दिन छत्तीसगढ़ में ही 10 हजार से ज्यादा शादियां होने वाली थीं, लेकिन नहीं हो सकीं। शादियों के न होने के कारण इसके लिए होने वाली खरीदारी भी प्रभावित हुई।

बर्तनों का पांच सौ करोड़ का व्यापार

बर्तन कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है, सालभर में जितना व्यापार होता है, उतना व्यापार शादियों के सीजन में दो माह में हो जाता है। शादियों में गांव से लेकर शहर तक के लोग भारी संख्या में बर्तन लेते हैं। गांवों में तो टिकावन में बर्तन ही देने का रिवाज है। एक तरफ लड़की वाले बर्तन देते हैं, तो दूसरी तरफ रिश्तेदार और दोस्त भी यही ज्यादा देते हैं। प्रदेश में छोटे बड़े मिलाकर करीब पांच हजार व्यापारी हैं। इनका शादियों के सीजन में करीब पांच कौ करोड़ का व्यापार आसानी से हो जाता है। व्यापारी बताते हैं, आमतौर पर शादियों के लिए पीतल और कांसे के बर्तन लिए जाते हैं। इनकी कीमत स्टील के बर्तनों से चार गुना ज्यादा रहती है। इन बर्तनों की खरीदारी के कारण ही ज्यादा व्यापार होता है।

फर्नीचर का 50 करोड़ का धंधा

शादियों में फर्नीचर का भी व्यापार बहुत होता है। राजधानी में ही सौ से ज्यादा इसके कारोबारी हैं। इसी के साथ प्रदेशभर में छोटे-बड़े करीब हजार व्यापारी हैं। रायपुर में जहां 10 करोड़ का धंधा हो जाता है, वहीं प्रदेश के अन्य शहरों में करीब 40 करोड़ का व्यापार होता है। फर्नीचर जहां स्थानीय व्यापारी बनाते हैं, वहीं दिल्ली, मुंबई, जयपुर, पंजाब और अन्य शहरों से भी माल आता है। रायपुर में स्टील और भिलाई-दुर्ग में वूडन के फर्नीचर बनते हैं।

किचन के सामान का भी बड़ा कारोबार

शादी के सीजन में किचन के सामान का भी बड़ा कारोबार होता है। इसके रायपुर में थोक के साथ खुदरा व्यापारी भी हैं। इसका प्रदेश में 35 से 40 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। व्यापारियों का कहना है, अब तो उनका पूरा माल जाम हो गया है। इसको खपाने के लिए अगले साल तक इंतजार करना होगा। आमतौर पर इसका कारोबार आम दिनों में ज्यादा नहीं होता है।

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