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CG Elections 2018 : ''कोटा'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

पिपरतराई से लेकर जलेश्वर महादेव अमरकंटक तक फैला आदिवासी बाहुल्य वाला कोटा विधानसभा क्षेत्र आजादी के बाद से अबतक कांग्रेस का गढ़ रहा है।

CG Elections 2018 :

पिपरतराई से लेकर जलेश्वर महादेव अमरकंटक तक फैला आदिवासी बाहुल्य वाला कोटा विधानसभा क्षेत्र आजादी के बाद से अबतक कांग्रेस का गढ़ रहा है।

भाजपा या दूसरी पार्टियां एक भी बार यहां से चुनाव नहीं जीत पाई हैं, लेकिन 2018 का चुनाव रोचक और असमंजस भरा होगा। सभी को अब रेणु जोगी का इंतजार है। इंतजार यह कि रेणु कांग्रेस छोड़ेंगी या नहीं।

क्योंकि कांग्रेस ने हालिया दौर में कई बार ऐसे हालात पैदा कर संकेत दिए हैं कि उन्हें कांग्रेस से अलग हो जाना चाहिए। वहां से शैलेष को पार्टी ने सक्रिय किया है।

किसानों को जमीन का मुआवजा नहीं मिला

रेल कारिडोर योजना तहत गेवरा-पेण्ड्रारोड रेल लाइन के विस्तार में जिन किसानों की जमीन गई है, उनको मुआवजा नहीं मिल पाया है। इसी तरह किसान की आत्महत्या के बाद पेण्ड्रा क्षेत्र में फसल बीमा मुआवजा बंटा पर कोटा के किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।
क्षेत्र में इन समस्याओं के अलावा विधायक रेणु जोगी पर क्षेत्र का दौरा नहीं करने का भी आरोप लगते रहते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है और 135 सालों पुराना गौरेला का सेनोटोरियम अस्पताल को बंद कर मातृशिशु अस्पताल में मर्ज कर दिया गया है।

मांग, वादे और योजनाएं जो अबतक पूरी नहीं हुई

  • पेण्ड्रा को अलग जिला और अलग पुलिस जिला बनाए जाने की मांग
  • बेलगहना थाना और केंदा पुलिस चौकी मांग भी अधर में है
  • अरपा नदी पर रेत के अलावा मिट्टी, मुरूम, गिट्टी का अवैध उत्खनन जोरों पर
  • हर साल बीमारियों से आदिवासियों की मौत हो रही
  • स्मार्ट कार्ड से इलाज का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहा
  • लक्ष्मणधारा, मलनिया, चांदनी झरना जैसे पर्यटन केन्द्रों में पहुंच मार्ग खराब

जनता मेरे काम से पूरी तरह संतुष्ट है

क्षेत्र की जनता मेरे कामकाज से संतुष्ट है और क्षेत्र में ऐसी कोई बड़ी समस्या नहीं है। अरपा भैंसाझार परियोजना का काम अंतिम पड़ाव की ओर है। रतनपुर-पण्डरिया-कवर्धा सड़क बन गई है।
आरएमकेके टू-लेन सड़क अब फोरलेन बनेगी। इसी तरह खोंगसरा स्टेशन से गौरेला, पेण्ड्रा तक फारेस्ट रोड वैकल्पिक मार्ग के रूप में बन गया है। यहा शासकीय योजनाएं भी ठीक तरह चल से रही है।
श्रीमती रेणु जोगी (विधायक)

चुनाव के बाद नजर नहीं आतीं विधायक

कोटा विधायक डॉ. रेणु जोगी निष्िक्रय हैं और चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में नजर नहीं आती। वे सिर्फ चुनाव के समय क्षेत्र में सक्रिय रहती हैं, उसके बाद रायपुर, दिल्ली, भोपाल में ही ज्यादतर समय व्यतीत करती हैं।
क्षेत्र में जो काम हुआ है वह सरकार की योजनाओं के चलते हुआ है। सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसी समस्याओं को दूर करने में वे असफल रही हैं। जनता की नाराजगी इस बार चुनाव में दिखेगी।
काशीराम साहू (भाजपा उम्मीदवार)

कोटा को सक्रिय विधायक की जरूरत

कोटा विधानसभा को सक्रिय विधायक की जरूरत है, जो यहां की जनता का दुख-दर्द को समझ सके। भाजपा की बी-टीम को लाभ पहुंचाने जनता से छलावा होते आया है। क्षेत्र में सरकार के मंत्री, नेता दौरा तक करने नहीं आते हैं।
जनता की तकलीफ कोई सुनने वाला नहीं है। ग्रामीण सड़काें, स्वास्थ्य सेवाओं व शिक्षा का बुरा हाल है। क्षेत्र में कुपोषण, पेंशन भुगतान में देरी और बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है। विकास शून्य है।
शैलेष पाण्डेय (प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस)

2008 समीकरण: कोटा में कांग्रेस की पारंपरिक सीट होने की वजह से मिली जीत

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का
रेणु जोगी कांग्रेस 55317 अंतर
मूलचंद खंडेलवाल भाजपा 45406 9811
8% वोट से कांग्रेस जीती

2013 समीकरण: भाजपा का मजबूत प्रदर्शन, जिसके चलते कांग्रेस की जीत का प्रतिशत घटा

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

रेणु जोगी कांग्रेस 58390 अंतर
काशीराम साहू भाजपा 53301 5089
3.6% वोट से कांग्रेस जीती

खींचतान

  • कोटा में 1985 से 2006 तक विधायक रहे राजेंद्र प्रसाद शुक्ल
  • पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की नई पार्टी के गठन के बाद कोटा में कांग्रेस दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है
  • छत्तीसगढ़ जोगी कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया

हाल के विवादों से लग रहा रेणु को कांग्रेस से नहीं मिलेगी टिकट

कोटा विधानसभा क्षेत्र में 2018 के चुनाव के लिए राजनीतिक परिदृश्य बदला-बदला नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपनी नई पार्टी बना चुके हैं, जबकि उनकी पत्नी वर्तमान कोटा विधायक डॉ. रेणु जोगी अभी कांग्रेस में ही हैं।
हालिया विवादों से यह लग रहा है कि रेणु जोगी को कांग्रेस से टिकट शायद नहीं मिलेगी। यदि कांग्रेस कोटा की टिकट देगी नहीं और वे कोटा से ही लड़ सकती हैं, तो इस स्थिति में यह माना जा सकता है कि वे जोगी कांग्रेस से कोटा जीतना चाहेंगी।
कांग्रेस से शैलेष पांडेय के अलावा पूर्व मंडी एवं जिला पंचायत सदस्य रहे अरूण सिंह चौहान, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष संदीप शुक्ला का नाम चल रहा है। वहीं भाजपा में पूर्व प्रत्याशी रहे काशीराम साहू सहित भाजपा मंडल अध्यक्ष नीरज जैन, भाजपा जिला मंत्री शिवमोहन बघेल की दावेदारी बताई जा रही है।

आजादी के बाद से अब तक काेटा में कांग्रेस नहीं हारी

कोटा विधानसभा स्व. मथुरा प्रसाद दुबे, स्व. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल के नाम से पहचाना जाता है। स्व. मथुरा प्रसाद दुबे यहां से लगातार 8 बार चुनाव जीतकर विधायक बने और उन्हें विधान पुरुष की उपाधि दी गई थी।
उनके निधन के बाद उनकी बेटी नीरजा द्विवेदी ने टिकट के लिए प्रयास किया, किन्तु स्व. शुक्ल के भांजे राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल को कांग्रेस पार्टी ने कोटा की कमान सौंपी। राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल 1985 में पहली बार काेटा विधानसभा से चुनाव जीते, उससे पहले राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल लोरमी-पण्डरिया सीट से 1967-77 तक जीतकर विधायक रहे।
वे 1990-93 तक दूसरी बार चुनाव जीतकर विधायक बने। 1993 में सरकार गिरने के बाद पुन: चुनाव हुआ और राजेन्द्र शुक्ल लगातार 1993, 1998, 2003 में चुनाव जीते और 2006 तक कोटा से विधायक रहे।
राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल तत्कालीन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी विधानसभा अध्यक्ष एवं केबिनेट मंत्री भी रहे। उनका काफी दबदबा भी राजनीति में रहा।
राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल के 2006 में निधन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया, तब से अब तक वे तीन बार चुनाव जीत चुकी हैं। भाजपा ने कोटा से भानुप्रताप गुप्ता, डीपी अग्रवाल, मूलचंद खण्डेलवाल, भूपेन्द्र सिंह, काशीराम साहू को चुनाव मैदान में उतारा, इन सभी की हार हुई।

जातिगत समीकरण

पूरा विधानसभा घने जंगल और ऊंची पहाड़ियों से घिरा है। पेण्ड्रा का आधा शहरी एवं गौरेला का आधा ग्रामीण क्षेत्र इस विधानसभा में आता है। वैसे तो
यह आदिवासी बहुल इलाका है, उसके अलावा सामान्य एवं अन्य जातियों के लोग यहां निवास करते हैं।
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