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CG Elections 2018: ''चंद्रपुर'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

प्रदेश ही नहीं देश के नक्शे में सर्वाधिक सिंचित जिले के रूप में पहचान बनाने वाले जांजगीर-चांपा जिले का चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र ही एक ऐसा असिंचित क्षेत्र है, जहां के 50 से अधिक गांव के किसान सिंचाई की समस्या से जूझ रहे हैं।

CG Elections 2018:

प्रदेश ही नहीं देश के नक्शे में सर्वाधिक सिंचित जिले के रूप में पहचान बनाने वाले जांजगीर-चांपा जिले का चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र ही एक ऐसा असिंचित क्षेत्र है, जहां के 50 से अधिक गांव के किसान सिंचाई की समस्या से जूझ रहे हैं।

यह विडंबना है कि नदियों और बैराज से घिरे क्षेत्र होने के बावजूद यहां की फसल पानी के अभाव में सूख जाती है। पंद्रह साल पूर्व बनीं नहरों का विस्तार आज पर्यंत नहीं हुआ है।

मालखरौदा व डभरा दो विकासखंड में बंटे चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में लगातार दो कार्यकाल से सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के युद्धवीर सिंह जूदेव विधायक हैं।

सत्तारुढ़ दल के विधायक होने के बावजूद क्षेत्र की जनता सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं से तो जूझ ही रही है इसके अलावा किसानों की अपनी समस्या अलग है।

क्षेत्र के आधा सैकड़े से अधिक गांव के किसान सिंचाई की समस्या से जूझ रहे हैं। पूर्ववती जोगी शासनकाल में टर्न-की पद्धति नहर लाइनिंग से यहां के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन इसका समुचित विस्तार चंद्रपुर-डभरा क्षेत्र में नहीं हो पाया। इसी तरह क्षेत्र में मुख्य मार्ग की स्थिति जहां-तहां सुधारी है तो गांवों के पहुंच मार्ग बदहाल है।

90 विधानसभा में से सर्वाधिक काम यहां

प्रदेश के 90 विधानसभा में से सर्वाधिक काम चंद्रपुर विधानसभा में हुआ है। यहां सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, अस्पताल जैसे अनेक कार्य हुए हैं। रही बात किसानों को मुआवजा तो मुआवजा का दर भाजपा सरकार ने बढ़ाया है।

चंद्रपुर क्षेत्र में किसानों को उनका दिलाने पुराना एग्रीमेंट निरस्त हुआ। लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। जनता का विश्वास व दिल न टूटे यही उद्देश्य है।

युद्ध्वीर सिंह जूदेव (विधायक)

बैराज और उद्योगों से जनता त्रस्त

चंद्रपुर क्षेत्र की जनता की समस्या सुनना तो दूर की बात उद्योग और बैराज बनाकर यहां उनका सुख-चैन सरकार ने छीन लिया है।

उद्योगों में स्थानीय लोगों को काम नहीं मिल रहा है तो बैराज के डूबान क्षेत्र में आने वाले 18 गांव के प्रभावित किसानों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है।

दोनों ही राष्ट्रीय पार्टी को किसानों की चिंता नहीं है और समस्याओं से जूझती चंद्रपुर की जनता अब विकल्प तलाश रही है।

रामकुमार यादव (पूर्व, प्रत्याशी)

सामंतशाही व्यवस्था से परेशान है जनता

राज परिवार का विधायक बनाकर क्षेत्र की जनता पछता रही है। यहां सामंतशाही चल रहा है। पांच साल में एक बार वे वोट मांगते हैं, जबकि पंद्रह साल पहले जो नहर बनी थी उसे आगे बढ़ाना तो दूर मरम्मत तक नहीं होती आ रही है।

शिक्षक और भवन के लिए बच्चे आंदोलन कर रहे हैं। सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। इन समस्याओं को लेकर भी लोग विधायक से नहीं मिल पाते।

गीतांजलि पटेल (छजकां, उम्मीदवार)

90 विधानसभा में सबसे पिछड़ा चंद्रपुर

चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र एक तरह से विधायक विहीन हो चला है। यहां के विधायक जशपुर में रहते हैं। रही बात विकास की तो ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें आज भी बदहाल है।

स्कूलों में शिक्षक नहीं, अस्पताल में डॉक्टर नहीं है। बैराज प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिला है। इस तरह से प्रदेश के 90 विधानसभा में चंद्रपुर ही सबसे पिछड़ा क्षेत्र है।

यशवंत चंद्रा, पूर्व जप अध्यक्ष डभरा

नौकरी न मुआवजा

जिले के अंतिम छोर पर चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता उद्योग और बैराज के बीच पीस रही है। यहां एक-दो नहीं बल्कि तीन पावर प्लांट शुरु हो चुके हैं।

जिनमें क्षेत्रीय बेरोजगारों को काम मिलना तो दूर की बात भू-विस्थापित परिवार के सदस्यों को भी स्थायी नौकरी नहीं मिली है। इसी तरह महानदी पर बने दो बैराज के डूबान वाले 18 गांव के किसान मुआवजा पाने सालों से भटक रहे हैं।

2008 समीकरण: क्षेत्र का विकास और जनता में राजपरिवार के विश्वास का भाजपा को लाभ

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

युद्ध्वीर सिंह जूदेव भाजपा 48843 अंतर

नोबेल कुमार वर्मा कांग्रेस 31553 17290

13.8% वोट से भाजपा जीती

2013 समीकरण: कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन, बसपा दूसरे नंबर पर रही, राजपरिवार का दबदबा फिर जीता

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

युद्ध्वीर सिंह जूदेव भाजपा 51295 अंतर

रामकुमार यादव बसपा 45078 6217

4.0% वोट से भाजपा जीती

  • चंद्रपुर में बेरोजगारी और सिंचाई की समस्या प्रमुख
  • स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई बड़ा काम नहीं
  • कुल मतदाता 211023
  • पुरूष 106576
  • महिला 104447

टिकट का गणित

भाजपा से वेबरेज कारर्पोरेशन के अध्यक्ष युद्धवीर सिंह जूदेव के अलावा कृष्णकांत चंद्रा, गोविंद अग्रवाल प्रमुख रूप से टिकट के दावेदार हैं। कांग्रेस से पूर्व विधायक नोबेल वर्मा, यशवंत चंद्रा, दुर्गेश जायसवाल के नाम दावेदारी को लेकर चर्चा है। छत्तीसगढ़ जोगी कांग्रेस ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य गीतांजलि पटेल को उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

2013 में चला ‘पांच रामकुमार’ का खेल

2013 में बसपा से चुनाव लड़ रहे रामकुमार यादव के खिलाफ पांच अन्य रामकुमार निर्दलीय चुनावी मैदान में खड़े हुए थे। उन्हें लगभग 6 हजार के करीब वोट मिले। रामकुमार को युद्ध्वीर सिंह ने लगभग इतने ही वोटों से मात दी थी।

चंद्रपुर विधानसभा में राजपरिवार का रुतबा आज भी

चंद्रपुर में राजपरिवार का काफी प्रभाव है। इसके बावजूद पिछले 20 सालों से चंद्रपुर में कभी किसी एक पार्टी की सत्ता नहीं रही। भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख पार्टियों को जनता ने अवसर दिया।

स्व दिलीप सिंह जूदेव के व्यक्तित्व का आज भी असर चंद्रपुर में बरकरार है। 1990 और 1998 के चुनाव में भाजपा ने राजपरिवार को प्रतिनिधित्व सौंपा और दोनों बार जीत मिली। 1998 में राजपरिवार की रत्नमाला ने जीत हासिल की और राज्य गठन के बाद रत्नमाला ने कांग्रेस का दामन थामा। इसके बाद 2003 में रत्नमाला को किसी भी पार्टी से टिकट नहीं मिला। जबकि 2003 में दोनों प्रमुख पार्टियों ने नए चेहरों को मौका दिया था।

2003 में भाजपा ने कृष्णकांत चंद्रा को टिकट दिया। इस चुनाव से पहले कांग्रेस के नोबल वर्मा पार्टी छोड़कर एनसीपी से जुड़ गए। नोबल वर्मा कांग्रेस से विधायक रह चुके थे। इस चुनाव में नोबेल ने भाजपा के कृष्णकांत को शिकस्त दी। और प्रदेश के पहले एनसीपी विधायक बने। इसके बाद 2008 में भाजपा ने फिर राजपरिवार को प्रतिनिधित्व सौंपा।

इस चुनाव में दिलीप सिंह जूदेव के बेटे युद्ध्वीर सिंह मैदान में उतरे। उनकी सीधी टक्कर सिटिंग विधायक नोबेल वर्मा से थी। युद्ध्वीर सिंह ये चुनाव जीते वहीं नोबेल वर्मा ने एनसीपी से नाता तोड़कर फिर कांग्रेस का दामन थाम लिया।

2013 में भी भाजपा ने राजपरिवार के युद्ध्वीर सिंह को पार्टी की कमान सौंपी। कांग्रेस नोबेल वर्मा को टिकट दिया लेकिन वे जीत हािसल नहीं कर सके। युद्ध्वीर सिंह जूदेव ने उन्हें लगभग 7 हजार वोटों से शिकस्त दी।

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