Web Analytics Made Easy - StatCounter
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

CG Elections 2018: ''सरायपाली'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

जिले की चार विधानसभा सीटों में एकमात्र विधानसभा सीट सरायपाली अजा वर्ग के लिए आरक्षित है। बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं और रेल सुविधा की कमी के साथ अलग जिला बनाने की मांग को लेकर क्षेत्र की जनता इस बार विधानसभा के प्रत्याशियों से जवाब तलब करेगी।

CG Elections 2018:

जिले की चार विधानसभा सीटों में एकमात्र विधानसभा सीट सरायपाली अजा वर्ग के लिए आरक्षित है। बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं और रेल सुविधा की कमी के साथ अलग जिला बनाने की मांग को लेकर क्षेत्र की जनता इस बार विधानसभा के प्रत्याशियों से जवाब तलब करेगी।

ओडिशा सीमा के साथ इस विधानसभा का क्षेत्र रायगढ़ जिले से भी जुड़ा हुआ है, लेकिन रेल सुविधाएं आज तक इस क्षेत्रवासियों को नहीं मिल पाई है। विधासनभा के अंतिम छोर से जिला मुख्यालय की दूरी तकरीन 135 किमी है, ग्रामीणों को अपने मिसल रिकार्ड के आवेदन तक के लिए दो दिन का समय लेकर पहुंचना होता है।

इन्हीं मूलभूत परेशानियों को देखते हुए पिछले 10 सालों से इसे पृथक जिला बनाए जाने की मांग भी समय-समय पर होती रही है। राज्य बनने के बाद से तीन चुनावों में दो बार बीजेपी काबिज हुई, वहीं एक बार कांग्रेस को मौका मिला है।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली

क्षेत्र की जनता के लिए यहां 100 बिस्तर सर्व सुविधायुक्त अस्पताल तो बनाया गया, लेकिन न तो यहां चिकित्सक हैं और न ही अत्याधुनिक उपकरण। हाल ही में इसे 25 बिस्तर में तब्दील कर दिया गया।

हालांकि पहले ही इस अस्पताल की छवि रिफर सेंटर के तौर पर रही, लेकिन वर्तमान में मरीज के रिफर किए जाने और मुख्यालय के 100 बिस्तर अस्पताल पहुंचने 110 किमी की दूरी तय करने के पहले ही मरीज मौत के मुंह में समा चुके हैं।

उच्च शिक्षा के लिए क्षेत्र में नहीं है पर्याप्त कॉलेज

सरायपाली क्षेत्र में दो महाविद्यालय हैं- सरायपाली और बलौदा में, लेकिन इस क्षेत्र में हर साल बारहवी उत्तीर्ण होने वाली छात्राओं के लिए यह दोनों कॉलेज की सीटें अपर्याप्त होने के कारण सैकड़ों बालिकाओं को बारहवी के बाद पढ़ाई छोड़ने की नौबत है।

मेघावी छात्राओं को तो सरायपाली या बलौदा मे प्रवेश मिल जाता है, लेकिन सूची से बाहर होने वाली छात्राओं के लिए प्राइवेट के अलावा और कोई विकल्प शेष नहीं रह जाता।

जलाशयों की कमी और सिंचाई का अभाव

क्षेत्र में दर्जनों लघु सिंचाई परियोजनाएं हैं, साथ ही कुछ अधूरे भी पड़े हुए हैं। इसलिए इस क्षेत्र में भी किसानों की खेती केवल बोर के भरोसे है। क्षेत्र में धान की फसल लेने वाले किसानों को दोहरी फसल के लिए बोर पर ही निर्भर होना होता है। वहीं कम पानी वाली फसलों के लिए भी क्षेत्र में जागरुकता का अभाव है।

सरायपाली विधानसभा

छत्तीसगढ़ के फुलझर क्षेत्र के नाम तथा लोगों के लिए कलकत्ता मार्ग के लिए बड़े सराय के तौर पर प्रचलित यह गांव वर्तमान में सरायपाली के नाम से जाना जाता है।

साथ ही सरई पेड़ों की अधिकता के कारण भी इसे सरईपाली के नाम से जाना जाता है। राजनीतिक तौर पर इस क्षेत्र में महल का लगातार प्रभाव रहा है। आरक्षण के बाद से महल परिवार को यह सीट छोड़नी पड़ी, लेकिन इससे पहले क्षेत्र में महल ने यहां की राजनीति में निर्णायक भूमिका अदा की है।

महेंद्र बहादुर और पुखराज सिंह ऐसे उदाहरण बनकर सामने आए, जिन्हें कांग्रेस ने टिकट नही दी तो वे निर्दलीय जीतकर क्षेत्र में अपन दबदबा बनाए रखने में कामयाब रहे। बता दें, पुखराज सिंह ने तो कांग्रेसी मंत्री मोहन लाल चौधरी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी।

यह हैं दावेदार

भाजपा : वर्तमान विधायक रामलाल चौहान के साथ जिला पंचायत के सदस्य श्याम तांडी, पूर्व जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष सरला कोसरिया, पुष्पलता चौहान, डॉ. एके कोसरिया।

कांग्रेसः कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष शिव डहरिया, राधेश्याम विभार के साथ स्थानीय स्तर पर पार्वती चौहान, महेंद्र बाघ, रामपाल नंद, पुनीत चौहान, डोलामणि मिरी, तरुण सरवर, सरोज नरुल महेश्वरी का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।

इधर, पूर्व जज प्रभाकर ग्वाल को आम आदमी पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। वहीं जकांछ, शिवसेना और अन्य पार्टियों की राजनीतिक गतिविधियां तो जारी है, लेकिन अब तक इनके द्वारा प्रत्याशी तय नहीं किए गए हैं।

विकास से आम नागरिक अभिभूत

विधानसभा में पिछले 5 सालों में हर क्षेत्र में विकास हुए हैं। आम नागरिक विकास का आंकलन कर रहे हैं और संतुष्ट भी हैं। पिछले कार्यकाल के विधायक की सक्रियता नहीं होने के कारण लोगों की नाराजगी रही और इसलिए उन्होंने फिर से भाजपा को चुना।

बाहरी लोगों के जनप्रतिनिधि बनने और निष्क्रियता के कारण क्षेत्रवासियों ने बीजेपी को चुना। किसानों के लिए 7 एनीकट बनाए गए, जिससे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी हुआ है। रामलाल चौहान, विधायक

केवल कागजों में नजर आ रहा विकास

भाजपा के शासनकाल में तानाशाही और अफसर शाही हावी रही है। लचर व्यवस्था के बीच विकास के दावे केवल कागजों पर नजर आते हैं। अफसर कर्मचारी और पूरा तंत्र जन समस्याओं के एक-दूसरे की जवाबदेही बताकर पल्ला झाड़ने में लगा हुआ है।

विकास पूरी तरह शून्य रहा है, बीजेपी के विधायक और उनकी टीम एक भी कार्य गिना पाने की स्थिति में नहीं हैं। विधायक अपनी जिम्मेदारियों को उपलब्धि बता रहे हैं। अमृत पटेल, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष

रेल सुविधा की मांग दशकों पुरानी

सरायपाली क्षेत्र को रेल सुविधाओं से जोड़ने के की मांग दशकों पुरानी हो चुकी है। महासमुंद से पिथौरा होते हुए सरायपाली से बरगढ़ तक रेल लाइन के लिए कई बार सर्वे हुए, लेकिन क्षेत्रवासियों को रेल सुविधाओं को नाम पर हर बार केवल आश्वासन तक सीमित रखा गया।

इस क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विकास का मुद्दा भी इस बार इसलिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि भाजपा के प्रथम कार्यकाल में इसे केंद्र में कांग्रेस की सरकार होने की बात कही गई थी, लेकिन वर्तमान में केंद्र और प्रदेश दोनों में बीजेपी होने के कारण लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं।

जातिगत समीकरणों पर भी एक नजर

क्षेत्र में मौजूद मतदाताओं और उनके जातिगत आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्पष्ट है कि सरायापली विधानसभा में गांड़ा समुदाय की बाहुल्यता रही है। यहीं वजह है कि इस सीट को अजा वर्ग के लिए आरक्षित भी किया गया है।

हालांकि क्षेत्र में अघरिया और कोलता बाहुल्यता भी है, लेकिन आरक्षित वर्ग की सीट होने के साथ महल के प्रभाव के चलते यहां की राजनीति महल पर ही केंद्रित रहती है। आरक्षण के बाद महल ने बसना की ओर रुख किया, लेकिन यहां अब भी महल का प्रभाव दिखता है।

मतदाताओं का समीकरण

कुल मतदाता- 1,88,392

पुरुष- 94,961

महिला- 93,428

पोलिंग बूथ की संख्या- 268

2008 समीकरणः राज्य बनने के बाद पहली विधानसभा में यहां भाजपा को लोगों ने चुना, लेकिन दूसरे चुनाव में प्रत्याशी चयन में खामियों के चलते भाजपा को हार मिली।

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

डॉ हरिदास भारद्वाज कांग्रेस 64456 अंतर

नीरा चौहान भाजपा 48202 13.09%

2013 समीकरणः आरक्षित सीट होने के बाद क्षेत्रवासियों ने कांग्रेस के प्रत्याशी को बाहरी बताते हुए नकार दिया और तकरीबन 30 हजार वोट से कांग्रेस प्रत्याशी की हार हुई।

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

रामलाल चौहान भाजपा 82064 अंतर

डॉ हरिदास भारद्वाज कांग्रेस 53232 28,832

19.09 % वोट से भाजपा को मिली जीत

वर्तमान कार्यकाल की 5 प्रमुख उपलब्धियां

  • वर्षों पुरानी केंद्रीय विद्यालय की मांग पूरी हुई।
  • शिक्षा के क्षेत्र में 5 हाई स्कूल तथा अन्य कई शालाओं का उन्नयन हुआ।
  • कॉलेज भवन के लिए 3 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई।
  • क्षेत्र में 3 हायर सेकंडरी स्कूल बनाए जाएंगे, जिनकी प्रत्येक की लागत लगभग 1-1 करोड़ होगी।
  • 7 सड़कों के लिए 5-5 करोड़ की स्वीकृति मिली है।

जिला बनने से नक्सली गतिविधियों पर भी लगेगी लगाम

सरायपाली विधानसभा का अधिकतर इलाका जंगल से ढका हुआ है और गरियाबंद-छुरा से होते हुए रायगढ़ तक यह इलाका नक्सलियों के लिए सेफ कॉरिडोर भी है। लगातार नक्सलियों की सक्रियता इस क्षेत्र में नजर आती है।

क्षेत्रवासियों का दावा है कि जिला मुख्यालय बनने से और पुलिसिंग व्यवस्था और तगड़ी होने के बाद क्षेत्र में नक्सलियों की आमद-रफ्त में लगाम लगेगी। साथ ही जिला बनने से लोगों को मुख्यालय के लिए 150 किमी का सफर करने की भी परेशानी से मुक्ति मिलेगी।

Next Story
Share it
Top