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CG Elections 2018: ''जांजगीर-चांपा '' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र में विकास के चाहे जितने भी दावे किए जाते हो, लेकिन यहां की सच्चाई यह है कि जिला बनने के 20 साल बाद भी जिला मुख्यालय जांजगीर जल संकट से नहीं उबर पाया है।

CG Elections 2018:

जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र में विकास के चाहे जितने भी दावे किए जाते हो, लेकिन यहां की सच्चाई यह है कि जिला बनने के 20 साल बाद भी जिला मुख्यालय जांजगीर जल संकट से नहीं उबर पाया है।

नल-जल योजना के शुरु होने से पहले फेल होने के बाद जल संकट की समस्या यहां के लिए स्थाई बन चुकी है। इसके अलावा जिले के सबसे बड़े 100 बिस्तर वाले सरकारी अस्पताल का हाल देखा जाए तो वह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की भांति चल रहा है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद जिला अस्पताल में सिटी स्केन मशीन, बर्न यूनिट, ट्रामा सेंटर की स्थापना नहीं हो सकी है। इसके अलावा जांजगीर-चांपा और चांपा-बिर्रा के बीच रेलवे फाटक पर ओव्हरब्रिज का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ है, जबकि इन सबके अलावा इंजीनयिरंग कॉलेज की घोषणा भी फाइलों में दबकर रह गई है।

विपक्ष का होने से सरकार पक्षपात करती है

विपक्ष का विधायक होने के कारण सरकार पक्षपात करती है। पूर्व में स्वीकृत कार्यों को भी पूरा नहीं कराया जा रहा है। कई बार पत्राचार किए है।विधानसभा में भी आवाज उठाई जाती है। विधायक मद से सभी गांवों में कुछ न कुछ कार्य कराए गए हैं। इसके अलावा सरकार को भी क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अवगत कराया जाता है। पानी, बिजली जैसे मुद्दों पर आंदोलन किए हैं।

मोतीलाल देवांगन (विधायक)

विधानसभा क्षेत्र का विकास ठहर गया है

2008 से 13 के बीच क्षेत्र में एक संतुलित और समग्र विकास हुआ था, वह इस कार्यकाल में ठहर सा गया है। क्षेत्रीय विधायक की निष्क्रियता के चलते क्षेत्र के विकास कार्यों को पहले जो गति मिली थी वह रूक गई है। यही वजह है इंजीनियरिंग कॉलेज, फोरलेन सड़क जैसे स्वीकृत कार्य भी शुरु नहीं हो सके। विधायक की सक्रियता गांवों में चबूतरा बनवाने तक ही सिमटकर रह गई है।

नारायण चंदेल (पूर्व विस उपाध्यक्ष)

कोई बड़ी उपलब्धि नहीं

जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र में विकास के नाम पर कोई बड़ी उपलब्धि सत्ताधारी दल के पास नहीं है। जिला मुख्यालय जांजगीर की ही बात करें तो पेयजल की व्यवस्था आज तक नहीं हो पाई। टैंकर से पानी सप्लाई करने पार्षद रतजगा करते हैं। बिजली कटौती गांव-देहात की तरह हो रही है। जिला अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। ओव्हरबि्रज आज तक पूरे नहीं हुए।

दिनेश शर्मा, अध्यक्ष, (जिला कांग्रेस कमेटी)

विधायक की निष्क्रियता के बाद भी विकास

विधायक की निष्कि्रयता के बाद भी जनता की मांग पर सरकार यहां विकास कार्य करा रही है। दो-दो ओव्हरब्रिज बन रहे हैं। केन्द्रीय विद्यालय, कृषि महाविद्यालय, पॉलिटेक्निक कॉलेज, कृषि विज्ञान केन्द्र जैसी कई सौगातें क्षेत्र को मिली है। रायगढ़ से रायपुर तक फोरलेन सड़क बायपास विशेष उपलब्धि है।

अमर सुल्तानिया, जिला महामंत्री (भारतीय जनता पार्टी )

तीसरे नंबर की बसपा की अपनी व्यथा

जांजगीर-चांपा विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी की अपनी अलग ही व्यथा-कथा है। पार्टी ने 2013 के विधानसभा चुनाव में अमर सिंह राठौर को बसपा उम्मीदवारों में सर्वाधिक 27 हजार वोट मिले थे।

लेकिन, चुनाव के बाद अमर सिंह राठौर ने भाजपा का दामन थमा लिया। इसके पहले 2008 के चुनाव में बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाते हुए रविन्द्र द्विवेदी को प्रत्याशी बनाया था। चुनाव के कुछ महीनों बाद उन्होंने भी पार्टी को अलविदा कह जोगी कांग्रेस में अपनी दावेदारी कर रहे हैं।

2003 समीकरण: कांग्रेस का जनसंपर्क तेज, भाजपा का कमजोर प्रदर्शन

प्रत्याशी पार्टी मत प्रतिशत

मोतीलाल देवांगन कांग्रेस 52075 42.6

नारायण चंदेल कांग्रेस 44365 36.3

उदल किरण बसपा 15009 12.1

2008 समीकरण: समस्याओं से परेशान जनता ने नया चेहरा चुनाव

प्रत्याशी पार्टी मत प्रतिशत

नारायण चंदेल भाजपा 41954 38.5

मोतीलाल देवांगन कांग्रेस 40784 37.4

रविंद्र द्विवेदी बसपा 18113 16.6

2013 समीकरण: विकास नहीं होने से जनता ने फिर बदलाव किया

प्रत्याशी पार्टी मत प्रतिशत

मोतीलाल देवांगन कांग्रेस 54291 40.6

नारायण चंदेल भाजपा 43914 33.0

अमर सिंह राठौर बसपा 27487 20.5

प्रमुख दावेदार

भाजपा से पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष नारायण चंदेल के साथ भाजपा के जिला महामंत्री अमर सुल्तानिया, वरिष्ठ भाजपा नेता ब्यास कश्यप, कािर्तकश्वर स्वर्णकार, शेखर चंदेल, भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक डॉ. संतोष मोदी, विशुन कश्यप, नरेन्द्र कौशिक टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।

कांग्रेस से वर्तमान विधायक मोतीलाल देवांगन के अलावा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दिनेश शर्मा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिध इंजी. रवि पांडेय और जिला पंचायत सदस्य ज्योति किशन कश्यप टिकट की दावेदारी कर रही हैं।

तेरी भी जय-जय, मेरी भी जय-जय, न तुम जीते, न हम हारे

1998 के चुनाव में भाजपा के नारायण चंदेल और कांग्रेस के मोतीलाल देवांगन पहली बार चुनावी समर में उतरे। तब नारायण चंदेल ने 35 हजार 83 वोट पाकर अपनी जीत दर्ज की।

वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी मोतीलाल देवांगन 28 हजार 404 वोट पाकर दूसरे पायदान पर रहे, जबकि बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी सहसराम कर्ष को 19 हजार 511 मतों के साथ तीसरा स्थान मिला था।

2003 के विधानसभा चुनाव में जीत का सेहरा माेतीलाल देवांगन के सिर पर बंधा और नारायण चंदेल पराजित हुए। इस चुनाव में बसपा को परंपरागत तीसरा स्थान मिला।

इसके बाद 2008 के विधानसभा चुनाव में फिर से चंदेल को जीत मिली और मोतीलाल देवांगन पराजित हुए। 2013 के चुनाव में भी जनता ने अपनी परंपरा कायम रखते हुए मोतीलाल को फिर मौका दिया और चंदेल हार गए।

इस तरह से 1998 से लेकर वर्ष 2013 तक के हुए चार चुनाव में जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने भाजपा के चंदेल और कांग्रेस के मोतीलाल देवांगन को दो-दो बार प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया है। आने वाले 2018 के चुनाव में दोनों पार्टियां किसे उम्मीदवार बनाती है।

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