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CG Elections 2018: ''कुनकुरी'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

बादलखोल के घने जंगल और बिरहोर जनजाति की बसाहट के लिए अलग पहचान रखने वाले कुनकुरी विधानसभा में हाथियों की समस्या पिछले पांच वर्ष के दौरान विकराल हो चुकी है।

CG Elections 2018:

बादलखोल के घने जंगल और बिरहोर जनजाति की बसाहट के लिए अलग पहचान रखने वाले कुनकुरी विधानसभा में हाथियों की समस्या पिछले पांच वर्ष के दौरान विकराल हो चुकी है।

इसके साथ ही बिजली,पानी और सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर विपक्ष के साथ आम जनता भी विरोध प्रदर्शन कर रही है। विशेष कर बादलखोल अभ्यारण्य और इसके आसपास स्थित वनबाधित गांवों में सड़क और बिजली के विकास में आ रही अड़चन से लोगों में गुस्सा भड़क रहा है।

हाथियों की दहशत में विधानसभा

ओडिशा की ओर से घुसपैठ करने वाले अतिकायों के पैरों तले रौद कर दर्जनों ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं। घर, खेत इन उत्पाती हाथियों के निशाने पर है। घर के अंदर भी अब इस विधान सभा के लोग सुरक्षित नहीं रह गए।

इन अतिकायों को नियंत्रित करने के उपाय अब तक सफलता से कोसों दूर है। कंवर और ईसाई बाहुल्य इस विधान सभा क्षेत्र में आसन्न विधानसभा चुनाव में हाथी की समस्या एक बड़ा मुद्दा साबित होगी।

बड़े मुद्दों को भंजाने में जुटे दल

साल के अंतिम में होने वाले विधान सभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी रहने की उम्मीद जताई जा रही है। भाजपा जहां विद्युतीकरण, सड़क विकास, पुल पुलिया का निर्माण, उज्जवला योजना, सुजला योजना को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरने की तैयारी में जुटी हुई है।

वहीं विपक्षी विकास कार्यों के लिए बिना जमीन अधिग्रहण व मुआवजा दिए ग्रामीणों के जमीन किए जा रहे कब्जे, भ्रष्टाचार के साथ पत्थलगड़ी को मुद्दा बना भाजपा को शिकस्त देने की तैयारी में है।

कार्यों से जनता खुश है कोई नाराजगी नहीं

विधानसभा क्षेत्र में हमने बहुत से विकास कार्य किए हैं। दुलदुला में महाविद्यालय, कुनकुरी से राउरकेला मार्ग पर सेतु निर्माण, सौ सीटर कौशल विकास केन्द्र की मंजूरी सहित पूरे विधान सभा क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा व स्वास्थ्य के विस्तार के लिए किया गया कार्य भारतीय जनता पार्टी की उपलब्धि है। जनता पूरी तरह से संतुष्ट है। इन्हीं विकास कार्यों के बल पर हम जनता के बीच जाएंगे। पूरा विश्वास है कि जनता का आशीर्वाद हमें फिर मिलेगा।

रोहित साय (विधायक)

बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बदहाल

बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति है। आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की नैया डुबाने के लिए इतना ही काफी है। राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर गांव तक सड़क की बदहाल स्थिति से लोग परेशान हैं।

विकास कार्य कमीशनखोरी का शिकार हो कर गुणवत्ताविहिन निर्माण की भेंट चढ़ रहे हैं। करोड़ों रूपये खर्च होने के बाद भी विकास कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। जनता अच्छी तरह जान चुकी है। इस चुनाव में वह हिसाब कर देगी।

अब्राहम तिर्की (पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी)

2008 समीकरण: क्षेत्र में भाजपा का मजबूत जनाधार कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

भरत साय भाजपा 57113 अंतर

यूडी मिंज कांग्रेस 47521 9592

8.1% वोट से भाजपा जीती

2013 समीकरण: भाजपा के नए युवा चेहरा रोहित पर जनता ने जताया भरोसा, जीत का प्रतिशत भी बढ़ा

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

राेहित कुमार साय भाजपा 76593 अंतर

अब्राहम तिर्की कांग्रेस 47727 28866

20.4% वोट से भाजपा जीती

हार जीत की चाबी उरांव व कंवर मतदाताओं के हाथ

जिले की सबसे नई विधानसभा क्षेत्र कुनकुरी को यूं तो एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च को लेकर पहचाना जाता है। लेकिन इस विधान सभा में हार जीत के फैसले की चाबी ईसाई मतदाताओं के हाथ में न हो कर उरांव और कंवर मतदाताओं के पास है।

विधान सभा क्षेत्र में चर्च के बिशप के प्रभाव की चर्चा हर चुनाव में होती है। लेकिन 2003 में इस विधान सभा सीट के गठन के बाद लगातार दो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद यह मिथक टूटती हुई नजर आ रही है।

आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं और विकास कार्य को प्रचारित कर माहौल अपने पक्ष में करने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल बुनियादी सुविधाओं की बदहाली के साथ जाति कॉर्ड के आधार पर भाजपा को घेरने की तैयारी में जुटी हुई है।

भाजपा कांग्रेस और छजकां लगा रही दांव

भाजपा के वर्तमान विधायक रोहित साय के साथ कुनकुरी विधानसभा सीट से टिकट के दावेदारों में जिला पंचायत जशपुर की अध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, छग लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष भरत साय प्रमुख हैं।

इसके अलावा कांग्रेस से 2008 में प्रत्याशी रहे यूडी मिंज के साथ कंवर समाज के शिव प्रसाद साय, सेवा निवृत्त फौजी बाल गोविंद साय टिकट के दौड़ में शामिल हैं। छजकां की बात की जाए तो कभी स्व दिलीप सिंह जूदेव के सबसे नजदीक रहे वीर साय के साथ अब्राहम के बीच मुख्य मुकाबला है।

तपकरा और बगीचा से अलग होकर अस्तित्व में आया

कुनकुरी विधान सभा जिले के पूर्वोत्तर में ओडिसा की सीमा से लगी हुई है। 2003 में कुनकुरी विधान सभा का गठन जिले के तपकरा और बगीचा विधान सभा का विघटन कर किया गया था।

इस विधान सभा क्षेत्र का एक छोर ओडिसा की सीमा से,दूसरा छोर रायगढ़ जिले की सीमा से लगा हुआ है। विधान सभा क्षेत्र में बादलखोल अभ्यारण्य के साथ तपकरा वन क्षेत्र का घोर हाथी व सर्प प्रभावित क्षेत्र भी आता है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से इस विधान सभा क्षेत्र में दो जनपद पंचायत, एक नगर पंचायत और 136 ग्राम पंचायत हैं। जिले का कुनकुरी नगर पंचायत ही एकमात्र ऐसा नगरीय निकाय है, जिस पर भाजपा का कब्जा है। इस विधानसभा में पिछले दो चुनावों में बड़े मुद्दों की जगह स्थानीय मुद्दे हावी रहे हैं। इस बार भी स्थानीय मुद्दे ही प्रमुख रहेंगे।

जातिगत समीकरण

जातिगत गणित के लिहाज से विधानसभा क्षेत्र में ईसाई मतदाताओं की संख्या 37 हजार और कंवर मतदाताओं की संख्या 47 हजार है। तीसरे स्थान में उरांव जाति है। इनकी संख्या 40 हजार के आसपास है।

ईसाई वोट के बंट जाने की वजह से जीत में उनकी भूमिका प्रभावशाली नहीं रह जाती है। विधान सभा क्षेत्र के पहले दो चुनावों में ईसाई मतदाताओं पर विश्वास कर कांग्रेस करारी शिकस्त झेल चुकी है। इस बार जोगी कांग्रेस के मैदान में होने से पार्टी अब तक उहापोह की स्थिति में है।

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