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CG Elections 2018: ''रायगढ़'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

औद्योगिक नगरी के रूप में अपनी पहचान बना चुका रायगढ़ राजनैतिक प्रभावों के लिहाज से सबसे संवेदनशील सीट है। जिले में औद्योगिक क्रांति की आहट 90 के दशक में शुरु हुई और 2000-2006 के बीच महज 6 सालों में डेढ़ दर्जन बड़े और 150 छोटे उद्योगों ने जिले की तस्वीर बदल दी।

CG Elections 2018:

औद्योगिक नगरी के रूप में अपनी पहचान बना चुका रायगढ़ राजनैतिक प्रभावों के लिहाज से सबसे संवेदनशील सीट है। जिले में औद्योगिक क्रांति की आहट 90 के दशक में शुरु हुई और 2000-2006 के बीच महज 6 सालों में डेढ़ दर्जन बड़े और 150 छोटे उद्योगों ने जिले की तस्वीर बदल दी।

डेढ़ दशक पहले औद्योगिक क्रांति ने प्राकृतिक संपदा का दोहन शुरु किया तो इसका असर जनजीवन पर पड़ने लगा और शुरु हुई जल, जंगल और जमीन की लड़ाई अब तक बदस्तूर जारी है।

टिकट के दावेदारों में ये प्रमुख

भाजपा : विधायक रोशनलाल अग्रवाल, पूर्व विधायक विजय अग्रवाल व सुनील रामदास का नाम दावेदारों की सूची में है।

कांग्रेस : पूर्व मंत्री कृष्ण कुमार गुप्ता, जिला पंचायत सदस्य प्रकाश नायक और डॉ. राजू अग्रवाल का नाम दावेदारों में है।

क्षेत्र के ज्वलंत मुद्दे

  • 300 करोड़ की केलो सिंचाई परियोजना 10 साल बाद भी अधूरी, खर्च बढ़कर 920 करोड़
  • 1500 करोड़ खर्च करने के बाद भी मेडिकल कॉलेज में अब तक इलाज की सुविधा नहीं।
  • डेढ़ हजार से अधिक किसानों की भूमि अधिग्रहण के बावजूद मुआवजा नहीं।
  • पिछले 5 साल में 2 हजार करोड़ के विकास कार्यों की घोषणा के बावजूद दो कार्य भी पूर्ण नहीं।
  • शुद्ध पेयजल के नाम पर 50 करोड़ की जलावर्धन योजना का बंटाधार। प्रदूषण से जीना मुहाल।
  • विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि की जमकर बंदरबांट और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार।
  • शिक्षा का व्यापारीकरण, महंगाई, भ्रष्ट प्रशासन, प्राकृतिक संपदा दोहन और क्षेत्र में बढ़ता अपराध।

विकास एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है

जिस दिन से विधायक निर्वाचित हुआ हूं कभी चैन से नहीं बैठा। केंद्र अथवा राज्य की हितैषी योजनाओं, अभियानों के जरिए मतदाता के अधिक से अधिक करीब रहने का प्रयास किया है।
बड़ी परियोजनाओं के अलावा जनता की छोटी-छोटी जरुरतों को भी पूरा करने का प्रयास किया है। विकास एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है और प्रयास यही है कि अधिक से अधिक लोगों को विकास के माध्यम से लाभ पहुंचाया जाए।
रोशनलाल अग्रवाल (विधायक)

गांवों को शहर से जोड़ने का प्रयास

विधायक निर्वाचित होने के बाद अभावग्रस्त ग्रामीण क्षेत्रों को सुविधा से जोड़ने की कोशिश की। नदियों पर पुल, सड़कें, नवीन कृषि मंडी का निर्माण, स्कूल, कालेज की मंजूरी, किसानों के लिए सिंचाई, ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य, बिजली, पानी आदि सुचारु करने की कवायद ने लोगों के करीब किया किंतु प्रदेश में विरोध दल की सरकार होने से कामकाज पर कुछ नकारात्मक असर भी पड़ा, जिससे जनादेश बदल गया।

डॉ. शक्राजीत नायक (पूर्व विधायक) (कांग्रेस)

ये कहते हैं रायगढ़ के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि

हर वर्ग के लिए किया काम
विधायक व मंत्री रहते हुए जिले में इंजीनियरिंग कालेज, मेडिकल कालेज की मंजूरी, सड़कों का जाल, स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने का प्रयास रहा। आम जनता की हर तरह की जरुरतों को पूरा करने की कोशिश की। जिन परियोजनाओं को शुरु किया था, वे अभी तक परिणाम तक नहीं पहुंचा इसका मलाल है।
कृष्ण कुमार गुप्ता, (पूर्व विधायक, कांग्रेस)

विधायक नहीं जनसेवक

लोकतंत्र में जनादेश का पालन सर्वोपरि है। विधानसभा के पंचायत से लेकर निगम तक सभी को अधिकाधिक विकास कार्यों का लाभ देने की कोशिश की। सबसे लंबा सूरजगढ़ पुल व शहर में केलो नदी पर पुल निर्माण चक्रपथ जो कि नितान्त आवश्यक विकास कार्य वर्षों से लंबित थी उन्हें परिणाम तक पहुंचाने की खुशी है।

विजय अग्रवाल, (पूर्व विधायक, भाजपा)

जनता को मायूस किया

भाजपा के निर्वाचित विधायक के पूरे कार्यकाल में विधानसभा तो दूर एक वार्ड का भी भलीभांति विकास नहीं हुआ। उल्टे जनयोजनाओं की आड में इतना व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है कि रायगढ़ जिले को प्रदेश के सबसे भ्रष्ट जिले की श्रेणी में माना जाने लगा है। जनप्रतिनिधि अपने वादो व दावों में पूरी तरह फेल हुए हैं और जनता को केवल निराशा और पछतावा ही हाथ लगी है।
जयंत ठेठवार, अध्यक्ष, (शहर कांग्रेस)

पूरे जिले में हो रहा विकास

डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में रायगढ़ जिले में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं। किसानों को बोनस, छात्राओं को साइकिल, फ्री मेडिकल कैंप, टेबलेट, रोजगार मेला, कौशल विकास, उज्जवला, ऐसी ढेरों योजनाएं हैं जो स्थानीय विधायक के माध्यम से जन-जन तक पहुंची है और सरकार ने हर तबके की सुविधा का ध्यान रखते हुए सभी को संतुष्ट करने का प्रयास किया।
डॉ. जवाहर नायक, (अध्यक्ष, जिला भाजपा)

2003 समीकरण: मूलभूत समस्याओं से जनता नाराज, भाजपा को लाभ

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

विजय अग्रवाल भाजपा 52310 अंतर

कृष्णकुमार गुप्ता कांग्रेस 43871 8439

2008 समीकरण: संगठन का कमजोर प्रदर्शन, कांग्रेस जीती

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का
शक्राजीत नायक कांग्रेस 72054 अंतर
विजय अग्रवाल भाजपा 59110 12944

2013 समीकरण: विकास कार्यों से जनता को निराशा हुई, फिर भाजपा सत्ता में आई

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का
रोशनलाल अग्रवाल भाजपा 91045 अंतर
शक्राजीत नायक कांग्रेस 70453 20592
11.7% से वोट से जीती भाजपा

रायगढ़ की जनता हर बार चुनती है नया चेहरा

कांग्रेस के इस अभेदगढ़ में भाजपा की पहली जीत 2003 में हुई और विजय अग्रवाल विधायक निर्वाचित हुए। अब इसे जनता का मूड कहे या फिर बदले की सियासत की छत्तीसगढ़ गठन के बाद लगातार विधायक का चेहरा बदलता रहा।

अपने दौर में सर्वाधिक विकास की लकीर खींचने वाले ढाई दशक से विधायक व तत्कालीन मंत्री कृष्ण कुमार गुप्ता को 2003 के चुनाव में जनता ने गद्दी से उतार दिया तो 2009 के चुनाव में रायगढ़ विधानसभा के एतिहासिक विकास करने वाले विधायक विजय अग्रवाल को जनादेश नहीं मिल पाया।

इसी तस्वीर को बदलते हुए 2013 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस को पीछे कर भाजपा के रोशनलाल को जनता ने अपना प्रतिनिधि चुना।

क्षेत्र में समाज विशेष का रहा है दबदबा

1 नवंबर 1956 को जिले के अस्तित्व में आने के बाद से रायगढ़ विधानसभा पर निरंतर समाज विशेष का दबदबा रहा है। 50 सालों से ज्यादा के सियासी सफर से वर्ष 2009 में शक्राजीत नायक इकलौते ऐसे विधायक हुए जो पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुए रायगढ़ विधानसभा में सियासी समीकरण को बदला।
यद्यपि रायगढ़ विधानसभा में सबसे अधिक उत्कल समाज का 22 फीसदी वोट शेयर है, इसके बावजूद केवल अग्रवाल समाज का दबदबा विधानसभा सीट पर रहा है।
जबकि एसटी, एससी की 26 प्रतिशत, मुस्लिम की 6 प्रतिशत, सिक्खों की 3 प्रतिशत, ब्राम्हणों की 9 प्रतिशत आबादी विधानसभा के परिणाम तय करती है फिर भी किसी भी तबके से विधायक के लिए किसी अन्य तबके के द्वारा कभी आगे आकर टिकट की मांग करते नहीं देखा गया।
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