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एग्जिट पोल के बाद बदला सट्टा बाजार का भाव, भाजपा 60 तो कांग्रेस 40 पैसे

क्रिकेट हो या चुनाव, सटोरियों की कमाई का एक बड़ा सीजन रहता है, लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनाव में सटोरिए तय नहीं कर पा रहे कि प्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी।

एग्जिट पोल के बाद बदला सट्टा बाजार का भाव, भाजपा 60 तो कांग्रेस 40 पैसे

क्रिकेट हो या चुनाव, सटोरियों की कमाई का एक बड़ा सीजन रहता है, लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनाव में सटोरिए तय नहीं कर पा रहे कि प्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी। एग्जिट पोल के एक दिन पहले तक सट्टा बाजार भाजपा और कांग्रेस में बराबरी का मुकाबला मान रहा था। बावजूद इसके भाजपा के पक्ष में 60 पैसे का भाव था और कांग्रेस के पक्ष में 70 पैसे का भाव चल रहा था।

सट्टा बाजार से जुड़े सुत्रों की मानें, तो इस बार सट्टा बाजार में पिछली बार के विधानसभा चुनाव की अपेक्षा कम कारोबार रहा। छत्तीसगढ़ को लेकर पूरे देश के सट्टा बाजार में उथल-पुथल की स्थिति रही। इसी वजह से लोग यहां पैसा लगाने से डर रहे हैं।
सटोरियों को उम्मीद थी कि एग्जिट पोल आने के बाद सट्टा बाजार में बूम आएगा, लेकिन वह भी इस बार निराश कर गया। अलग-अलग एग्जिट पोल में बहुत असमानता होने की वजह से सटोरिए पैसा लगाने से डर रहे हैं।
कुछ सटोरियों ने साहस कर कांग्रेस के पक्ष में 40 पैसे और भाजपा के पक्ष में 60 पैसे का भाव जरूर खोला है, लेकिन उसमें भी पैसा लगाने से डर रहे हैं।

बड़े नेताओं पर कोई भाव नहीं
इस बार बड़े नेताओं पर सट्टा बाजार ने कोई भाव नहीं खोला। खरसिया विधानसभा सीट से पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी और उमेश पटेल के बीच बराबरी का मुकाबला मानकर चल रहे हैं। इस वजह से वहां सटोरिए दांव लगाने से बच रहे हैं। सूत्रों की मानें, तो एग्जिट पोल का अध्ययन करने के बाद सटोरिए आगे कोई नया भाव खोल सकते हैं।

मतगणना पर नजर
सूत्रों की मानें, तो 11 नवंबर को मतगणना शुरू होने के दो घंटे बाद सट्टा बाजार में कुछ हलचल हो सकती है। 11 बजे से लेकर एक बजे के बीच भाव में उतार चढ़ाव हो सकता है। एक बजे के बाद राज्य में किसकी सरकार बन रही है, इसकी तस्वीर करीब-करीब साफ हो जाएगी।
कांग्रेस को बहुमत मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य चयन को लेकर दांव लगेगा। किसी को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में समर्थन लेने-देने पर भाव लगेगा।
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