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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: बड़ा खुलासा, 12-13 हजार मतदाता गायब

एक ओर जहां छत्तीसगढ़ मे लोकतंत्र के महाकुंभ को लेकर चारों ओर तैयारी चल रही है, तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के तीन जिलों के हजारों आदिवासी आज भी इस महाकुंभ के पर्व से वंचित हैं। यह किसी और का नहीं बल्कि अपनों के ही आपसी संघर्ष का परिणाम है कि सलवा जुडूम अभियान के बाद से जिन्होंने अपनी जन्मभूमि को छोड़ी तो आज तक आंध्र मे रहकर पलायन की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। बताया जाता है कि सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर जिले के हजारों मतदाता एक बार फिर से अपने जनप्रतिनिधि को चुनने से महरूम हो जाएंगे।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: बड़ा खुलासा, 12-13 हजार मतदाता गायब

एक ओर जहां छत्तीसगढ़ मे लोकतंत्र के महाकुंभ को लेकर चारों ओर तैयारी चल रही है, तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के तीन जिलों के हजारों आदिवासी आज भी इस महाकुंभ के पर्व से वंचित हैं। यह किसी और का नहीं बल्कि अपनों के ही आपसी संघर्ष का परिणाम है कि सलवा जुडूम अभियान के बाद से जिन्होंने अपनी जन्मभूमि को छोड़ी तो आज तक आंध्र मे रहकर पलायन की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। बताया जाता है कि सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर जिले के हजारों मतदाता एक बार फिर से अपने जनप्रतिनिधि को चुनने से महरूम हो जाएंगे।

चुनाव की तैयारियों के बीच एक विडंबना ऐसी भी है कि छत्तीसगढ़ के हजारों आदिवासी 2018 के लोकतंत्र के महाकुंभ से वंचित रहेंगे। सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा जिले मे 2005-2006 में शुरू हुए सलवा जुडूम अभियान आज भले ही अस्तित्व मे न हो लेकिन उसकी पीड़ा आज भी हजारों आदिवासियो के दिल मे सुलग रही है। सलवाजुडूम में अपनों के संघर्ष से दूर हुए हजारों आदिवासियों ने ये कभी नहीं सोचा था कि वे अब हमेशा के लिए अपनी ही जन्मभूमि से दूर हो जाऐंगे। एक ओर जहां संपूर्ण प्रदेष मे लोकतंत्र के महाकुंभ को लेकर जष्न का माहौल है तो इन तीन आदिवासी जिले के हजारों आदिवासी मतदाता अपने मताधिकार से वंचित रहेगा। बताया जाता है कि सलवा जुडूम अभियान के दौरान यहां के आदिवासी मतदाता आंध्र के खम्मम,वारंगल जिले मे चले गऐ थे।

सबसे ज्यादा भद्राचलम मे

बताया जाता है कि सलवा जुडूम अभियान के दौरान अविभाजित दंतेवाड़ा जिले के सुकमा से पलायन कर खम्मम जिले के भद्राचलम डिवीजन के मुरमुरू, तेलमपालम, रायानापेंटा, सोडावरम, वीरापुरम, कुन्नावारम ग्रामों में 10 हजार से अधिक आदिवासी निवासरत हैं। वैसे संपूर्ण खम्मम जिले की बात करें तो यहां कुल 22 हजार व वारंगल जिले मे 10 हजार से अधिक आदिवासी रह रहे हैं।

न घर के न घाट के

छत्तीसगढ़ से पलायन कर आंध्र को गए हजारों आदिवासी मतदाता की स्थिति अब घर के न घाट के जैसी है। बताया जाता है कि जुडूम से लेकर अब तक हुऐ 2009 व 2011 के लोकसभा व 2008, 2013 व 2018 के विधानसभा चुनाव मे मतदान से वंचित रहेंगे। बताया जाता है कि फिलहाल आंध्र के कुछ आदिवासी परिवारों को छोड़ दिया जाए, तो आज भी उन्हें मताधिकार से वंचित रखा गया है।

दहशत है आंखों मे

2018 विधानसभा के चुनाव के बारे मे पुछने पर आदिवासी ग्रामीण जानकारी से साफ इंकार कर देते है। हालांकि इस दौरान रूक रूक कर अपनी मातृभूमि मे हुए खुनी खेल को याद कर सिहर उठते है। जिसके चलते उनकी आंखो मे आज भी दहशत स्पष्ट देखी जा सकती है।

कोन्टा विधानसभा एक नजर में

कुल मतदाता 1,64,743

पुरूष मतदाता 77812

महिला मतदाता 86931

कुल प्रत्याशी 6

मतदान केन्द्र 212

मतदान कर्मचारी 1000

12-13 हजार मतदाता गायब

जो भी लोग चले गए हैं, उनके नाम फिलहाल मतदाता सूची से हटा दिया गया है। जिनकी संख्या लगभग 12 से 13 हजार है। फिलहाल सुकमा जिले की स्थिति सामान्य होती जा रही है और जैसे ही वे मतदाता वापस लौटेंगे, उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया जाएगा। (जयप्रकाश मौर्य, कलेक्टर, सुकमा)

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