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छत्तीसगढ़: नक्सलियों के मंसूबे नाकाम, ना री-पोलिंग और ना ही EVM लूट, शांतिपूर्ण रहा मतदान

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के लिए पहले चरण की 18 सीटाें पर सोमवार को हुए मतदान के बाद अब ये साफ हो गया है कि कड़ी सुरक्षा के बीच इस दौर का चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

छत्तीसगढ़: नक्सलियों के मंसूबे नाकाम, ना री-पोलिंग और ना ही EVM लूट, शांतिपूर्ण रहा मतदान

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के लिए पहले चरण की 18 सीटाें पर सोमवार को हुए मतदान के बाद अब ये साफ हो गया है कि कड़ी सुरक्षा के बीच इस दौर का चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। इससे पहले नक्सलियों ने करीब 5 घटनाओं को अंजाम देकर मतदाताओं में दहशत पैदा करने की कोशिश की, लेकिन सफल व शांतिपूर्ण मतदान होने से उनके इरादे पूरी तरह विफल रहे।

चुनाव में खास बात रही है कि बस्तर के कुछ ऐसे इलाके, जहां आमतौर पर बहुत कम वोटिंग होती है, वहां भी लोगों ने नक्सलियों के चुनाव बहिष्कार की अपील को दरकिनार करते हुए बेखौफ होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सुरक्षा प्रबंध से जुड़े उच्चाधिकारी भी मानते हैं कि 18 सीटों पर कहीं भी री-पोलिंग की नौबत नहीं आई, न कहीं भी ईवीएम लूटी गई। यह एक बड़ी सफलता है।

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान केवल छत्तीसगढ़ में ही दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं। वजह ये है कि नक्सल प्रभावित राज्य होने के कारण प्रभावित इलाकों में शांतिपूर्ण चुनाव करवाना किसी चुनौती से कम नहीं था। यही कारण है राज्य के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर संभाग की 12 तथा राजनांदगांव जिले की 6 सीटों पर पहले चरण में चुनाव कराए गए। इन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्रीय बल व राज्य पुलिस के करीब सवा लाख जवानों को तैनात किया गया था। चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही थी।

सबसे बड़ी चुनौती तो ये थी कि मतदान दलों को सुरक्षित रखते हुए मतदान केंद्रों तक भेजा जाए, साथ ही मतदान के बाद इन दलों के सुरक्षित वापस लाया जाए। मतदाताओं व सामान्य नागरिकों की सुरक्षा के लिए अलग प्रबंध किए गए थे। सोमवार शाम 7 बजे तक मिली जानकारी के अनुसार बस्तर इलाके में अधिकांश मतदान दल संबंधित क्षेत्रों के थाने तक सुरक्षित आ गए हैं। अब इन्हें हेलीकाप्टर या अन्य माध्यमों से जिला मुख्यालयों तक लाने की तैयारी है।

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ये थी सुरक्षा की रणनीति

पुलिस के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार 18 सीटों पर चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक कार्ययोजना बनाकर काम किया गया। रणनीति ये थी कि जैसे ही नक्सलियों के पंहुचने या एक जगह जमा होने की सूचना मिले, वहां पुलिस फोर्स के मुकाबले के लिए भेजा जाए।

इसी रणनीति में यह बात भी शामिल थी कि सबसे पहले मतदान दलों को सुरक्षित तरीके से मतदान केंद्र तक भेजा जाए व उनकी सुरक्षित वापसी कराई जाए। इस बार तगड़े सुरक्षा प्रबंध करने के लिए ये तरीका अपनाया गया कि चार-पांच मतदान केंद्रों को एक साथ सुरक्षा घेरे में लेकर सुरक्षा दी जाए। माना जा रहा है कि पुलिस की यह रणनीति कारगर रही।

छुटपुट घटनाएं हुई, लेकिन खतरा नहीं

चुनाव बहिष्कार की अपील करने वाले नक्सलियों ने मतदान को प्रभावित करने के इरादे सेे कुछ स्थानों पर गड़बड़ी फैलाने की कोशिश की, लेकिन उनकी चाल विफल हो गई। बस्तर संभाग के कटेकल्याण क्षेत्र में सुबह ही नक्सलियों ने एक आईईडी बम ब्लास्ट किया, लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं हुआ।

इधर पुसपाल इलाके में नक्सलियों को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ का सामना करना पड़ा। बीजापुर जिले के पामेड़ इलाके में भी नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में कोबरा बटालियन के पांच जवान घायल हुए हैं, पर वे सुरक्षित हैं। यहां दो नक्सलियों के मारे जाने की खबर भी है, लेकिन किसी नक्सली का शव नहीं मिला है।

18 साल का रिकार्ड टूटा: अवस्थी

राज्य में नक्सल विरोधी ऑपरेशन के पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी का कहना है कि सभी सुरक्षा बलों के जवान जो पहले से यहां मौजूद थे तथा वे जो बाहर से आए, उन सब ने मिलकर काम किया है। इसके साथ ही हमारे खुफिया तंत्र एसआईबी तथा आईबी ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ मिलकर उनके मार्गदर्शन तथा नेतृत्व में काम किया है। सबकी मेहनत व प्रयासों से चुनाव का पहला दौर पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है।

राज्य के 18 सालों के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी भी मतदान केंद्र में दोबारा मतदान की नौबत नहीं आई और न ही किसी भी स्थान पर ईवीएम मशीन लूटने की कोई वारदात हुई है।

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