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सरकार बदली तो सात हजार 800 करोड़ का करना होगा जुगाड़, तब खरीद सकेंगे धान

छत्तीसगढ़ विधानसभा का चुनाव परिणाम 11 दिसंबर को आएगा। यदि सरकार बदलती है, तो धान खरीदने का पूरा सिस्टम बदल जाएगा। धान खरीदी के लिए सात हजार 800 करोड़ रुपए अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी, तभी लक्ष्य के अनुरूप धान की खरीदी हो पाएगी।

सरकार बदली तो सात हजार 800 करोड़ का  करना होगा जुगाड़, तब खरीद सकेंगे धान

छत्तीसगढ़ विधानसभा का चुनाव परिणाम 11 दिसंबर को आएगा। यदि सरकार बदलती है, तो धान खरीदने का पूरा सिस्टम बदल जाएगा। धान खरीदी के लिए सात हजार 800 करोड़ रुपए अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी, तभी लक्ष्य के अनुरूप धान की खरीदी हो पाएगी। इस संबंध में मार्कफेड के अधिकारी भी कुछ नहीं बता पा रहे कि आखिर इनती बड़ी राशि की किस प्रकार से व्यवस्था होगी।

प्रदेश में इस वर्ष शासन ने 80 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में सरकार प्रति क्विंटल 1750 रुपए की दर से धान की खरीदी की जा रही है। इसमें 300 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है।
इस आधार पर 80 लाख मीट्रिक टन वर्तमान दर पर आंकलन करें, तो 16 हजार 400 करोड़ रुपए होता है, जो किसानों को भुगतान किया जाएगा। वहीं, यदि कांग्रेस की सरकार आती है, तो लाख मीट्रिक टन धान घरों में रोककर रखे हैं। 10 दिसंबर तक केवल 20 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी ही हो पाई है।
मार्कफेड के अधिकारी भी नहीं बता सकते कि सरकार बदलने पर वह किसानों के लिए कहां से राशि की व्यवस्था करेगी। हालांकि अभी सरकार की गारंटी पर ही बैंकों से राशि जारी की जाती है। 2500 प्रति क्विटंल की दर से धान की खरीदी होगी। बीते दो वर्ष और चालू वित्तीय वर्ष का 300-300 रुपए का बोनस दिया जाएगा।
कुल मिलाकर प्रति क्विंटल की दर से यदि औसतन 3400 रुपए का आंकड़ा लगाएं, तो 80 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी में 24 हजार 200 रुपए लगेगा। इस प्रकार वर्तमान खरीदी दर और सरकार बदलने पर होने वाली खरीदी दर में सात हजार 800 करोड़ रुपए का अंतर है।
आपको बता दें कि इस बार 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो गई है। अब तक 60 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो गई है। अब तक किसानों को मार्कफेड के माध्यम से सरकार की गारंटी पर विभिन्न बैंक राशि का भुगतान करती आ रही है। अचानक राशि अधिक देने पर बैंकों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। यह राशि कहां से आएगी, यह तो मार्कफेड के अधिकारी भी नहीं बता पा रहे।
बिगड़ सकती है व्यवस्था
10 दिसंबर तक धान की आवक बहुत ही कम हुई है। चुनाव परिणाम आते ही धान की आवक बढ़ जाएगी, क्योंकि 31 जनवरी तक ही खरीदी के लिए समय निर्धारित है। ऐसे में सभी किसान समय रहते धान बेचना चाहेंगे। इससे अचानक धान खरीदी केंद्र और संग्रहण केंद्रों में धान की आवक बढ़ जाएगी। ऐसे में सोसाइटी और संग्रहण केंद्रों में धान जाम होने के आसार हैं। इससे पूरी व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी। सभी को केवल चुनाव परिणाम का इंतजार है।
सभी केंद्रों में कैपकवर
खराब मौसम को देखते हुए सभी धान खरीदी केंद्र और धान संग्रहण केंद्रों को अलर्ट कर दिया गया है। सभी जगहों पर भंडारण के अनुरूप कैपकवर दिया गया है। यदि बारिश होती है, तो सभी समिति के पदाधिकारी और कर्मचारी समय से पहले खरीदे गए धान को ढंक देंगे। कुछ जगहों पर सोमवार को कैपकवर लगा दिया गया।
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