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CG Elections 2018: ''पत्थलगांव'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

टमाटर उत्पादक किसानों की बदहाली और कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग की जर्जर स्थिति को लेकर यह विधान सभा क्षेत्र इन दिनों जमकर सुर्खियां बटोर रहा है।

CG Elections 2018:

टमाटर उत्पादक किसानों की बदहाली और कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग की जर्जर स्थिति को लेकर यह विधान सभा क्षेत्र इन दिनों जमकर सुर्खियां बटोर रहा है।

वहीं मुख्यमंत्री डॉ रमन द्वारा पत्थलगांव को जिला का दर्जा दिए जाने का चुनावी वायदा पूरा न हो पाने से भी भाजपा के नेता रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस को जहां वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रामपुकार सिंह की व्यक्तिगत छवि पर विश्वास है, वहीं भाजपा को क्षेत्र में किए गए विकास कार्य पर भरोसा है।

टमाटर का उत्पादन कम कर दूसरी फसल ली, उसकी भी सही कीमत नहीं मिल रही

आने वाले विधान सभा चुनाव में टमाटर उत्पादक किसानों की बदहाली का मुद्दा चुनावी माहौल में एक बार फिर गरमा सकता है। 2016 में फसल की कम कीमत मिलने से किसान भड़क गए।

इसके बाद टमाटर को एनएच में फेंककर विरोध जताने के बाद जिला प्रशासन ने टमाटर के उत्पादन को कम करने के लिए किसानों को दूसरी फसल लेने के लिए प्रेरित किए जाने के बाद दलहन और मक्के की फसल में वृद्वि हुई है।

लेकिन, इन फसलों की कीमत न मिल पाने से किसान अब भी निराश हैं। इसके साथ ही 7 सौ करोड़ की लागत से निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग के अधर में लटक जाने से भी लोगों में नाराजगी है।

इन दोनों मुद्दों से ऊपर गत विधानसभा चुनाव के दौरान पत्थलगांव विधानसभा में जीत मिलने पर पत्थलगांव को जिला बनाए जाने का मुख्य मंत्री का वायदा सबसे बड़ा मुद्दा होगा।

क्षेत्र के विकास से जनता खुश है

प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद 10 बड़े बांध का निर्माण, 5 उच्च पुल का निर्माण, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्जवला योजना, सौर सुजला योजना का हितग्राहियों को मिला लाभ भारतीय जनता पार्टी विधान सभा चुनाव में जीत दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।

हम इन्हीं विकास कार्यों को मुद्दा बनाकर जनता के सामने जाएंगे। जनता हमारे कार्यों से खुश है। पूरा विश्वास है कि जनता हमें आगे भी विधानसभा क्षेत्र का विकास करने के लिए हमें फिर मौका देगी।

शिवशंकर पैंकरा (विधायक, पत्थलगांव)

सरकार ने भोली भाली जनता को ठगा

सरकार ने भोली भाली जनता को ठगा है। विद्युतीकरण के नाम पर ग्रामीण इलाकों में खंभे तो गाड़ लिए हैं। लेकिन उनमें अबतक बिजली की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है।

जरूरतमंद राशन कार्ड के लिए भटक रहे हैं। मूलभूत सुविधा सड़क, बिजली, पानी मुहैया करने में मौजूदा सरकार विफल हो चुकी है। एनएच 43 की स्थित बदतर हालत में है। इन रास्तों पर चलना जान जोखिम में डालने के बराबर है। आगामी चुनाव में जनता इन्हंे माकूल जवाब देगी।

रामपुकार सिंह (पूर्व विधायक)

2008 समीकरण: विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की लहर भाजपा का कमजोर प्रदर्शन

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

रामपुकार सिंह कांग्रेस 64543 अंतर

विष्णुदेव साय भाजपा 54627 9916

7.2% वोट से कांग्रेस जीती

2013 समीकरण: उम्रदराज रामपुकार सिंह की जगह शिवशंकर पैंकरा को जनता ने चुना

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

शिवशंकर पैंकरा भाजपा 71485 अंतर

रामपुकार सिंह कांग्रेस 67576 3909

2.4% वोट से भाजपा जीती

विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य ठप रहने से कांग्रेस को नुकसान

क्षेत्र में नाली निर्माण में भारी भ्रष्टाचार सामने आया है। करोड़ों रुपए की लागत से बनी नालियां ड्रेनेज सिस्टम के अभाव में अनुपयोगी हो गई है। नल-जल योजना फेल होने से क्षेत्र मे पीने के पानी की समस्या बढ़ गई है।

दुकानों की नीलामी में नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उर्वशी देवी सिंह (पूर्व विधायक रामपुकार सिंह की बहू) पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे इसके बाद भी कांग्रेस मौन है। वहीं रामपुकार सिंह चुनाव हारने के बाद से खामोश हैं।

35 साल से रामपुकार सिंह के अलावा दूसरे को मौका नहीं

कुछ समय से प्रतिनिधित्व को लेकर क्षेत्र में बगावती सुर तेज हुए हैं। दरअसल पिछले 35 साल से विधानसभा क्षेत्र से रामपुकार सिंह के अलावा िकसी दूसरे उम्मीदवार को मौका नहीं मिला।

लोकसभा चुनाव में भी रामपुकार सिंह की बेटी आरती सिंह को टिकट मिली और वे हार गईं। परिवारवाद के चलते लंबे समय से पार्टी से जुड़े युवाओं और महिलाओं को मौका नहीं मिलने से उनमें भी आक्रोश है।

दूसरी ओर क्षेत्र की सबसे अधिक संख्या वाले उरांव समाज से लगातार प्रतिनिधित्व की बात उठती रही लेकिन कभी अवसर नहीं दिया गया। केवल मतदाता बनाकर रखने से जनता खासी नाराज है।

यही वजह है कि जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष रत्ना पैंकरा ने भी इस बार पत्थलगांव से चुनाव लड़ने का दावा किया है अौर उन्होंने इस संबंध में राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात भी की है। इस सीट से रत्ना पैंकरा के साथ-साथ 12 अन्य लोगों ने दावेदारी की है जिनमें से 5 महिलाएं भी शामिल हैं।

वहीं शहर में कांग्रेस की नगर पंचायत होने के बाद भी बस स्टैंड चौराहा पर पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की प्रतिमा का सुरक्षा घेरा नहीं बन पाया। इसे भी कांग्रेस के प्रतिनिधित्व की कमजोरी के रूप में देखा जा रहा है।

बदहाल एनएच से परेशान जनता

भाजपा विधायक शिवशंकर साय पैंकरा का शहरी क्षेत्र में भारी विरोध देखा जा रहा है। कटनी गुमला सड़क की बदहाली से भी लोगों में गुस्सा है। शहरी क्षेत्र भाजपाइयों में गुटबाजी है।

लेकिन, ग्रामीण अचंल में भाजपा की स्थिति बेहतर है। जशपुर, अंबिकापुर और रायगढ़ जिले के बीच स्थित पत्थलगांव में सड़क की स्थिति सबसे बुरी है।

रायगढ़ से पत्थलगांव के बीच की स्टेट हाइवे से निजी कंपनी का नियंत्रण समाप्त करने के बाद से हालत बेहद खराब है। यहीं स्थिति पत्थलगांव से अंबिकापुर और पत्थलगांव से जशपुर की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग की भी है।

कांग्रेस के अभेद्य गढ़ पत्थलगांव में भाजपा की सेंध

भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत गढ़ जशपुर जिला में कांग्रेस का अभेद्य किला रहा पत्थलगांव विधानसभा में 2013 के चुनाव से पहले तक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रामपुकार सिंह का एकछत्र राज था।

कंवर और उरांव जाति के बहुल्य वाले इस विधान सभा क्षेत्र में गोड़ जाति के कांग्रेस के इस दिग्गज को भाजपा के कद्दावर नेता स्व दिलीप सिंह जूदेव भी जीवित रहते मात नहीं दे पाए।

इस विधान सभा क्षेत्र के दो नगर पंचायत पत्थलगांव और कोतबा में कांग्रेस का कब्जा है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से इस विधानसभा में कांसाबेल और पत्थलगांव दो तहसील और दो जनपद पंचायत मौजूद हैं। इन दोनों ही जनपद पर भाजपा समर्थित अध्यक्ष काबिज है।

जाति समीकरण

चुनाव के जाति समीकरण के लिहाज से कंवर मतदाताओं की संख्या अधिक है। इसके साथ ही उरांव और गोड़ समाज के मतदाता भी चुनावी परिणाम को प्रभावित करने का संख्या बल रखते हैं।

अब तक के चुनावी इतिहास में कांग्रेस ने हर बार गोड़ प्रत्याशी और भाजपा ने कंवर प्रत्याशी पर दांव लगाया है। लेकिन इस बार परिस्थिति बदली हुई नजर आ रही है। हालांकि इस सीट में हार जीत में मुद्दे की जगह प्रत्याशी का व्यक्तिगत प्रभाव अधिक रहा है।

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