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CG Elections 2018: ''सीतापुर'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से मशहूर मैनपाट की कई ग्राम पंचायतें आजादी के पहले से पहुंच विहीन बनी हुई हैं। छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक टाऊ व आलू उत्पादन करने वाले इस क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई व बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है।

CG Elections 2018:
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से मशहूर मैनपाट की कई ग्राम पंचायतें आजादी के पहले से पहुंच विहीन बनी हुई हैं। छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक टाऊ व आलू उत्पादन करने वाले इस क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई व बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है। बतौली, सीतापुर व मैनपाट ब्लॉक को समाहित करने वाले सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या सड़क व स्वास्थ्य सुविधाओं की है। संभाग के सबसे पुराने अम्बिकापुर-सीतापुर राजमार्ग क्रमांक 43 के चौड़ीकरण की मंजूरी मिली है लेकिन निर्माण के नाम पर ठेकेदार ने पूरी सड़क को खोदकर छोड़ दिया है। सड़क के गड्ढों व धूल से लोगों का बुरा हाल है। ग्रामीण सड़के भी जर्जर हो गई हैं। मैनपाट में करनई, करमहा व सुपलगा आदि ग्राम पंचायतों को अभी तक सड़क से नहीं जोड़ा जा सका है।

स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों की हालत खराब

मैनपाट में कुल ग्यारह शासकीय अस्पताल हैं लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव में हर साल मौसमी बीमारियों से मौतें होती हैं। जागरूकता के अभाव में मैनपाट में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकांश बच्चे 8 वीं व 10 वीं के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ देते हैं। मैनपाट में बाक्साइट की पांच खदानें हैं लेकिन मजदूरी के अतिरिक्त इसका कोई लाभ नहीं मिल पाया है।

टूरिज्म में स्कोप, पर कोई फोकस नहीं

मैनपाट में पर्यटन की पर्याप्त संभावनाएं हैं। शासन द्वारा ट्रायबल टूरिज्म की स्वीकृति भी दी गई है लेकिन पर्यटन को रोजगार से जोड़ने की कोई पहल नहीं हुई हैं।

तीनों संस्थान पूर्ण रूप से अस्तित्व में नहीं आ पाए

आलू और शीतोष्ण फल अनुसंधान केन्द्र में सेव, अंगूर, सतालू आदि फलों की प्रायोगिक खेती को सफलता मिली है। शासन से टाऊ प्रसंस्करण उद्योग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र की स्वीकृति प्रदान की गई है लेकिन तीनों ही संस्थान अभी तक पूर्ण रूप से अस्तीत्व में नहीं आ पाए हैं।

हर स्तर पर भाजपा कर रही पक्षपात

जनता की मूलभूत समस्याओं के निराकरण के लिए पहल करना हर सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार को जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं। भाजपा सरकार में जमकर पक्षपात हो रहा है।
अमरजीत भगत(विधायक)

लोगोें के हितों के प्रति उदासीन रहे विधायक

मैनपाट में सैनिक स्कूल व नवोदय विद्यालय जैसी संस्थानों की स्वीकृति मिली थी लेकिन विधायक की लापरवाही से दोनों स्कूल अम्बिकापुर में चले गए। क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार की हालत किसी से नहीं छिपी है।
राजाराम भगत (पूर्व भाजपा प्रत्याशी)

ये हैं प्रमुख पार्टियों के प्रबल उम्मीदवार

कांग्रेस: विधायक अमरजीत भगत के अतिरिक्त फूलसाय एवं सरपंच संघ के अध्यक्ष अनिल व मनसुख राम को अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं।भाजपा : भाजपा की ओर से जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रभात खलखो, पूर्व विधायक प्रो. गोपाल राम और राजाराम भगत के नाम की चर्चा जोरों पर है।जोगी इफेक्ट: सीतापुर से जोगी कांग्रेस भी अपना उम्मीदवार उतारेगी। आप ने अशोक कुमार तिर्की को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

हर क्षेत्र में हुअा विकास

विधायक ने हर गांव को सड़क से जोड़ने के साथ दूरस्थ क्षेत्रों में विद्युत विस्तार कराया। दरिमा-मैनपाट, काराबेल-मैनपाट आदि सड़कों का चौड़ीकरण उन्हीं की देन है। लोग जानते हैं कि मैनपाट की क्या स्थिति थी और आज क्या है। सीतापुर में सौ बिस्तर हॉस्पीटल उनकी पहल से संभव हुआ।

रमेश गुप्ता (अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस सीतापुर)

अपने हितों पर ध्यान

विधायक शासन से मिले अधिकारों का उपयोग अपने हित के लिए कर रहे हैं। मंगरैल गढ़ धाम में संपर्क मार्ग निर्माण के नाम पर हर साल लाखों रूपए का खेल हो रहा है। जन कल्याण के उपयोग होने वाली विधायक निधि की राशि से सीतापुर स्थित आवास में हैण्डपंप, बाउण्ड्री व शेड का निर्माण कराया है।

प्रभात खलखो (जिला पंचायत उपाध्यक्ष)

ये कहती है जनता-जनार्दन

शुरू से कांग्रेस शािषत सीतापुर विधानसभा मंे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी रही है। प्राकृतिक साैदर्य और खेती किसानी वाले इस क्षेत्र में आलू प्रसंस्करण उद्योग एवं बाक्साइट आधारित उद्योग खोलने की मांग सालों से चल रही है लेकिन इस दिशा में कोई भी पहल नहीं हो पाई है। पर्यटन के क्षेत्र में भी कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। क्षेत्र का बड़ा इलाका पेयजल समस्या से जूझ रहा है वहीं पलायन बड़ी समस्या बनी हुई है।

सिर्फ चक्काजाम हाेता है

क्षेत्र में विकास के नाम पर चक्काजाम आंदोलन को छोड़कर कोई भी काम नहीं हुआ है। पेयजल व सड़क क्षेत्र की बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। पंचायत की कच्ची सड़कों से काम चलाया जा रहा है जो बरसात में पूरी तरह से बह जाती है।

गंभीर प्रयास जरूरी

विकास के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा गंभीर प्रयार करने की आवश्यकता है। क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है लेकिन इनका उपयोग करने की कोई योजना नहीं है। सड़क, पेयजल, सिंचाई व स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति नहीं मिल पाई है।

2008 समीकरण: बाहरी उम्मीदवार होने की वजह से भाजपा को जनता का समर्थन नहीं मिला

प्रत्याशी
पार्टी मत जीत का
अमरजीत भगत कांग्रेस 36301 अंतर
गणेशराम भगत भाजपा 34579 1722
1.7% वोट से कांग्रेस जीती

रोचक फैक्ट्स:

2008 में 31.1% वोट मिले थे कांग्रेस को
2008 की तुलना में 2013 में कांग्रेस का वोट % के साथ जीत का अंतर भी 1%से 12% पहुंच गया।
2013 में 49.6% वोट मिले कांग्रेस को

2013 समीकरण: पार्टी में भीतरघात की वजह से भाजपा को कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का
अमरजीत भगत कांग्रेस 70217 अंतर
राजाराम भगत भाजपा 52362 17855
12.6% वोट से कांग्रेस जीती

कांग्रेस के अमरजीत भगत का 14 सालों से सीतापुर पर कब्जा

कांग्रेस के अमरजीत भगत सीतापुर सीट पर पिछले 14 सालों से काबिज हैं। 1998 में टिकट नहीं मिलने से नाराज प्रो. गोपाल राम ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। 2003 के चुनाव में अमरजीत भगत ने भाजपा के राजाराम भगत को पराजित कर जीत हासिल की थी। 2008 में भाजपा ने पूर्वमंत्री गणेश राम भगत को अपना उम्मीदवार बनाया था जिन्हें अमरजीत भगत ने 1337 मतों से हराया। साल 2013 में भाजपा के राजाराम भगत 17 हजार 855 मतों से पराजित हुए। वर्तमान में भाजपा इस सीट पर अपना कब्जा जमाने के लिए जमकर मशक्कत कर रही है।

सड़क, स्वास्थ्य और सिंचाई अहम मुद्दा

क्षेत्रीय विकास व मूलभूत समस्याओं की कमी से जूझ रहे लोगों में भारी नाराजगी है। सड़क, स्वास्थ्य पेयजल व सिंचाई का मुद्दा भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए प्रमुख होगा। क्षेत्र में आय का मुख्य श्रोत कृषि व मजदूरी है लेकिन क्षेत्रवासियों को सिंचाई योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के सैकड़ों युवा रोजगार की तलाश में महानगरों में गुम हो गए हैं।

जातीय समीकरण

जातिगत समीकरण पर नजर डालें तो यहां सर्वाधिक आबादी उरांव, कंवर, नागवंशी, मांझी, गोड़ व पहाड़ी कोरवा समुदाय की है। इसके अतिरिक्त पिछड़े वर्ग के यादव, साहू, मानिकपुरी, बरगाह व कोलता समाज के लोग भी महत्वपूर्ण भूमिका
निभाते हैं।
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