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CG Elections 2018: ''खरसिया'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

अविभाजित मध्यप्रदेश से पृथक छत्तीसगढ़ के 58 सालों के राजनैतिक इतिहास में खरसिया विधानसभा सीट कांग्रेस का ऐसा अभेदगढ़ रहा है जिसे तमाम प्रयासों के बावजूद भाजपा न उस दौर में अपने पक्ष में कर पाई न आज की नमो लहर में कोई संभावना दिख रही है।

CG Elections 2018:

अविभाजित मध्यप्रदेश से पृथक छत्तीसगढ़ के 58 सालों के राजनैतिक इतिहास में खरसिया विधानसभा सीट कांग्रेस का ऐसा अभेदगढ़ रहा है जिसे तमाम प्रयासों के बावजूद भाजपा न उस दौर में अपने पक्ष में कर पाई न आज की नमो लहर में कोई संभावना दिख रही है।

खरसिया के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता स्व. नंदकुमार पटेल ने प्रदेश भाजपा के सामने इस सीट पर इतनी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी कि कांग्रेस को चुनौती देने भाजपा सक्षम चेहरे की तलाश में है। 

जी रहे सरकारी योजनाओं के सहारे रोजगार युवाओं से कोसों दूर

खरसिया में भाजपा व कांग्रेस के बीच ताजा सियासी रार भूमि अधिग्रहण, बेरोजगारी व पेयजल की समस्या को लेकर है। क्षेत्र के किसानों ने औद्योगिक विकास, रेल कॉरिडोर के लिए अपनी जमीन तो दी है लेकिन मुआवजे के लिए वे आज तक भटक रहे हैं। इनके सामने रोजगार की समस्या भी खड़ी हो गई है। खरसिया विधानसभा क्षेत्र में लोग पूरी तरह से सरकारी योजनाओं के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं।
यहां के किसान औद्योगिक विकास सहित अन्य केन्द्रीय व राज्य सरकार की योजनाओं में अपनी जमीन तो दे चुके हैं। इन किसानों का दर्द यह है कि विकास के लिए वे भी बराबर के भागीदार हैं लेकिन सरकारी अधिकारी उन्हें उनका हक देने से कतरा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन जाने से खेती का काम प्रभावित हुआ है। उनके सामने रोजी रोजगार का संकट है।
बिखरे हुए काम के कारण वे उन खेतों में भी खेती नहीं कर पा रहे हैं जिसे रेल कॉरिडोर से कोई लेनादेना नहीं है। ऐसी स्थिति में गुजारे के लिए उन्हें न तो कुछ उपलब्ध कराया जा रहा है और ना ही उनकी जमीन का उचित मुआवजा उन्हें दिया जा रहा है। उन्हें और उनके शिक्षित युवा बच्चों को रोजगार से भी नहीं जोड़ा जा रहा है। क्षेत्र के युवा लगातार सड़क की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं।
इसके अलावा खरसिया शहरी क्षेत्र में हर साल गर्मी शुरु होने से पहले ही पेयजल का संकट गहरा जाता है। दूषित जल पीने से कई लोगों की जान भी जा चुकी है। यह संकट साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है लेकिन समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी योजनाएं सरकार की लोगों को पाल रही है।
पीएम आवास निर्माण, शौचालय निर्माण के अलावा अब घर-घर मोबाइल तो पहुंच रहा है लेकिन ऐसे घरों के युवाओं तक रोजगार नहीं पहुंच पा रहा है। सरकार चावल, पोषण आहार, बच्चों को खाना, मुफ्त में किताब कॉपी, गणवेश, शिक्षा सब उपलब्ध करा रही है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं है। हर साल क्षेत्र में डायरिया व पीलिया का प्रकोप होता है और कई लोगों की जान चली जाती है।
साल दर साल इसका रूप बढ़ता ही जा रहा है लेकिन पेयजल की सुविधा शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीणों क्षेत्रों में नहीं है। सड़कों की स्थिति इतनी बुरी है कि लोगों को घर से निकलकर कहीं जाने में सबसे ज्यादा खतरा जान का रहता है।
हर साल सड़क दुर्घटना में सर्वाधिक मौते खरसिया विधानसभा क्षेत्र में होती है। बानीपाथर, बरभौना, पुसल्दा, आमापाली, कटंगपाली व घरघोड़ा के ग्रामीणों के द्वारा कई बार रोजगार को लेकर आंदोलन भी किया गया है। जमीन के मुआवजे में भी भेदभाव को लेकर समय-समय पर क्षेत्र के किसान आंदोलन करते रहते हैं।

जनता की जरूरतों के मुताबिक काम किए

बीते 4 सालों से जनता की जरुरतों के मुताबिक काम किया है। रेल कारिडोर में किसानों के साथ सरकार के छल पर लगाम लगाने के लिए सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ी है। बुनियादी विकास कार्य गतिशील हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य सुविधाओं की जानकारी लेने के लिए निरंतर ग्रामीण क्षेत्रों व पूरी विधानसभा में सतत जनसंपर्क मतदाताओं की कहीं कोई शिकायत नहीं है,ं।
उमेश पटेल (विधायक, खरसिया)

भाजपा सरकार की योजनाओं से राहत

भाजपा सरकार की योजनाओं से सबसे अधिक खरसिया क्षेत्र लाभान्वित हुआ है। धान बोनस, उज्जवला, पीएम आवास, स्मार्ट कार्ड आदि योजनाओं का लाभ जरुरतमंद तबके को मिला है। मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वच्छ व जनहितैषी छवि से जनता बहुत प्रभावित है। इसका लाभ निश्िचत मिलेगा।
डॉ जवाहर नायक (अध्यक्ष, जिला भाजपा)

विकास नहीं जातिगत समीकरण से सियासी तस्वीर

पिछड़ा व दलित बाहुल्य खरसिया विधानसभा सीट पर चुनावी बिसात विकास के आधार पर नहीं वरन जातिगत समीकरणों के आधार पर बिछाई जाती है। पिछले कई अर्से से पूरा चुनाव किसान, दलित, बनाम, पूंजीपति रहा है।
खरसिया के मतदाताओं ने भाजपा के विकास पुरुषों के प्रति एक शोषक की छवि वर्षों पहले बन गई थी जो अब तक यथावत है। यही वजह है कि भाजपा सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री अमर अग्रवाल भी खरसिया छोड़ बिलासपुर से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। खरसिया ने कांग्रेस को भाजपा से सदैव वाक ओव्हर ही मिलता रहा है।

जनता जर्नादन की बात

खराब सड़कों पर ध्यान नहीं

खरसिया विधानसभा में सड़कों की व्यवस्था अब खराब हो चली है। इस तरफ स्थानीय विधायक का ध्यान नहीं जा रहा। सड़कें ही विकास का आधार है। इस ओर ध्यान देने की जरुरत है।
परमेश्वर पटेल, खरसिया

किसानों के लिए बहुत किया

किसानों की जमीन कौड़ियों के मोल लेने का सरकार का षड़यंत्र पूरा हो गया होता यदि उमेश पटेल किसानों के साथ नहीं होते। उन्होंने किसानों के लिए बहुत कुछ किया।
बालकराम पटेल, किसान नेता

विकास को गति दे रहे उमेश

खरसिया में विकास का जो सिलसिला नंदकुमार पटेल ने शुरु किया था, उसे उमेश पटेल गति दे रहे हैं। आम जनता से जुड़े मामलों की सुनवाई उसी प्रकार से हो रही है। जनता का समर्थन उमेश के साथ है।
केशव पटेल, खरसिया

जनता के बीच रहते हैं उमेश

स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार के क्षेत्र में आपेक्षिक प्रगति नहीं हो पा रही है। हालांकि जनता की फरियाद सुनने और जनता के बीच रहने का लाभ उमेश को मिलता है।
रामधन राठिया,कृषक खरसिया

2008 समीकरण: कांग्रेस की क्षेत्र में जोरदार पकड़

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का
नंदकुमार पटेल कांग्रेस 81497 अंतर
लक्ष्मीदेवी पटेल भाजपा 48069 33428

2013 समीकरण: सहानुभूति व कांग्रेस का प्रदर्शन

प्रत्याशी पार्टी
मत जीत का
उमेश पटेल कांग्रेस 95470 अंतर
जवाहर नायक भाजपा 56582 38888

विधानसभा एक नजर में

कुल मतदान केंद्र - 280
कुल मतदाता - 2,099,45
सर्वाधिक मतदाता 20-30 साल के बीच

कई एतिहासिक चुनावों की गवाह बनी खरसिया की सीट

खरसिया विधानसभा वैसे तो शुरु से कांग्रेस के हाथ में रही है लेकिन यह सीट सबसे पहले वर्ष 1988 में पूरी मजबूती से राजनीति के पर्दे पर तब उभरी जब अविभाजित मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने यहां से पर्चा दाखिल किया।
उस वक्त लक्ष्मी पटेल खरसिया के विधायक हुआ करते थे जिन्होंने अर्जुन सिंह के लिए अपना इस्तीफा देकर सीट खाली की थी। 88 का यह मुकाबला इसलिए भी यादगार है क्योंकि अर्जुन सिंह को चुनौती देने जशपुर कुमार दिलीप जूदेव को भाजपा ने राष्ट्रीय विमर्श के बाद चुनाव मैदान में उतारा था।
उस वक्त भाजपा के रणनीतिकार सुंदरलाल पटवा, लखीराम अग्रवाल व कुशाभाउ ठाकरे ने दिलीप जूदेव को ही एकमात्र चेहरा करार दिया और अर्जुन सिंह की खरसिया चुनाव में कड़ी टक्कर भी मिली लेकिन अंतत: अर्जुन सिंह चुनाव में विजयी हुए। तत्कालीन विधायक लक्ष्मी पटेल को कुर्बानी देने के एवज में मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग का सदस्य बनाया गया।

उमेश के नाम रही अब तक की सबसे बड़ी जीत

वर्ष 2013 में झीरम नक्सली हमले में शहीद हुए खरसिया विधायक नंदकुमार पटेल और उनके ज्येष्ठ पुत्र दिनेश पटेल के निधन के बाद पिता की राजनैतिक विरासत उनके छोटे पुत्र उमेश पटेल ने संभाली।
हमें सुहानोभूति का प्रभाव कहें या नंदकुमार के द्वारा अपने क्षेत्र में किए गए उत्तारोत्तर विकास का असर कि उमेश पटेल ने पूरे प्रदेश में सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ. जवाहर नायक को करीब 45 हजार वोटो से पराजित किया। इस जीत ने उमेश को पूरे जिले में कांग्रेस के सबसे अहम निर्णायक के तौर पर स्थापित किया।
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