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CG Elections 2018: ''रामानुजगंज'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का अभाव होने से कृषि क्षेत्र का विकास नहीं हो रहा है।

CG Elections 2018:

प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का अभाव होने से कृषि क्षेत्र का विकास नहीं हो रहा है। यूपी के अमवार डेम से प्रभावित गांवों के व्यवस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है जो चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनेगा। इसके अतिरिक्त वन का भूमि मजदूरी भुगतान पेयजल समस्या, पट्टा, विद्युत समस्या व राशन कार्ड धारियों का नाम काटना भी बहस का मुद्दा बनेगा।

टूटी पुल पुलिया, बदहाल चिकित्सा, बिजली की समस्या गंभीर

बरसात में दो साल पहले कई सड़कें व पुल-पुलिया बह गए जिनका निर्माण नहीं हो पाया है। महत्वकांक्षी खूटपाली सिंचाई परियोजना आधी-अधूरी पड़ी हुई है जबकि अन्य कई परियोजनाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। कुछ परियोजनाएं ठीक है तो नहरों के ध्वस्त होने के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 54 एवं एमबीबीएस के 84 पद स्वीकृत हैं लेकिन मात्र एक विशेषज्ञ व 17 एमबीबीएस चिकित्सकों से काम चलाया जा रहा है। लिहाजा शासकीय अस्पताल रिफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। लोगों को इलाज के लिए अम्बिकापुर, झारखण्ड, यूपी का सफर करना पड़ता है। क्षेत्र में अभी भी दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां विद्युत लाईन का विस्तार नहीं हो सका है। जहा विद्युत है वहां भी लो-वोल्टेज व अघोषित विद्युत कटौती की समस्या है। क्षेत्र में अधिकांश लोग कृषि, मजदूरी व वनोपज पर निर्भर हैं। छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक मक्का उत्पादन होता है लेकिन शासकीय खरीदी की व्यवस्था नहीं है।

लोगों की बात

धीमी गति से चल रहा काम क्षेत्र में सामान्य स्तर के विकास कार्य हुए हैं लेकिन कार्यों की गति धीमी हैं। रिंगरोड 3 साल में ही जर्जर हो गया। वहीं कन्हर एनीकट अनुपयोगी हो गया हैं। नगर को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सिंचाई योजनाएं फ्लाप हो गई हैं। रोजगार की दिशा में कोई काम नहीं हुआ हैं।

प्रमोद केसरी (रामानुजगंज)

कार्यों में गुणवत्ता जरूरी

विकास कार्यों में गुणवत्ता का जरूरी हैं। कन्हर एनिकट में दरारे आ गई हैं वहीं कुछ हिस्सा बह गया है जिससे यह खतरनाक बन गया है। नदी किनारे सीसी रोड व नगर की कई नालियां अधूरी हैँ। पेयजल समस्या का हल नहीं निकाला जा सका है।

विनोद राहगीर (रामानुजगंज)

सरकार को समस्याओं से कोई मतलब नहीं

भाजपा सरकार को जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं। समस्याओं को न तो सरकार सुन रही है न ही अधिकारी। विपक्ष का विधायक होने की वजह से हमारे हर विकास कार्य की योजना सरकार दरकिनार कर देती है। सरकार में विकास के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार चल रहा है। स्वास्थ्य सिंचाई व पेयजल समस्या को लेकर सरकार से 7 बार पहल कर चुका हूं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकार क्षेत्रवासियों के साथ मनमानी करने पर उतारू है। अपने स्तर पर जितना जनता के विकास कार्य हो सकते हैं मैं करता रहा हूं ।

बृहस्पत सिंह (विधायक)

विधायक के पास नहीं है विकास का विजन

विधान सभा क्षेत्र के विकास के लिए हमने कार्य योजना बनाकर कार्य किया। चिकित्सा सुविधा में विस्तार करने कोशिश जारी है। वर्तमान विधायक के पास विकास का विजन नहीं हैं। वे पंचायत तक की सोच रखते हैं। विकास में विधायक का नजरिया है हमें क्या मिलेगा। क्षेत्र की जनता स्वयं को ठगा महसूस कर रही हैं। जनता के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। अमवार डेम की ऊंचाई बढ़ने को लेकर किसी को भयभीत होने की जरूरत नहीं हैं। बांध की ऊंचाई बढ़ने को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही है। बांध की ऊंचाई नहीं बढे़गी।

रामविचार नेताम (पूर्व मंत्री गुलाब सिंह कमरो, कांग्रेस के उम्मीदवार)

अन्य फैक्ट्स:

-क्षेत्र में लंबे समय से मनरेगा की मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है।

-चार कॉलेज सहित कई स्कूल खोले गए हैं लेकिन शिक्षकों की कमी से शिक्षा की स्थिति में सुधार नहीं हो पाया है।

-जंगल, नदियां कोयले का भंडार फिर भी प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नहीं हुआ

विधानसभा क्षेत्र में नहीं हुआ एक भी विकास कार्य

विधायक ने क्षेत्र विकास के लिए कोई पहल नहीं की है। विधायक बनने के बाद वे शासकीय भूमि में गन्ने की खेती करने, फैक्ट्री व मकान बनाने में व्यस्त हैं। विधायक निधि के सभी निर्माण कार्यों का भुगतान उन्होंने अपने पुत्र और साले के नाम से करवाया है। क्षेत्र में जितने भी विकास कार्य हुए हैं सभी पूर्ण में स्वीकृत कार्यों को बजट में शामिल किया था। ये कार्य प्रशासकीय स्वीकृति के अभाव में अटके पड़े हैं। विधायक इन महत्वपूर्ण विकास कार्यों भी स्वीकृत नहीं करा पाए। गर्मी में पेयजल की समस्या से कई गांव जूझ रहे हैं। रोजगार के अवसर विकसित करने की आवश्यकता है लेकिन विधायक द्वारा इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई।

अनूप तिवारी (जिला महामंत्री भाजपा)

अधिकारी सिर्फ कागजों में कर रहे हैं विकास कार्य

भाजपा सरकार ने अधिकारियों को लूट की खुली छूट दे दी है। जिससे अधिकारी सिर्फ कागजों विकास कार्य कर रहे हैं। सरकार का अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है इसलिए अधिकारी न तो मुख्यालय आते न ही किसी की बात सुनते हैं। जल संसाधन विभाग का तो भगवान ही मालिक है। विभाग ने सैकड़ों स्ट्रक्चर बनाए हैं जिसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। डेम सूखे हैं। विद्यायक ने क्षेत्र की हर समस्या को विधानसभा तक उठाया लेकिन सरकार ने सौतेला व्यवहार करते हुए क्षेत्रवासियों की समस्याओं के निराकरण हेतु कोई पहल नहीं की। स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत की समस्या किसी से छिपी नहीं है। सरकार इसी बदहाली को विकास बता रही है।

अजय गुप्ता (ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष)

2008 समीकरण: पहले से क्षेत्र में जनाधार मजबूत, विकास कार्य भी हुए

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

रामविचार नेताम भाजपा 53546 अंतर

बृहस्पत सिंह कांग्रेस 48967 4579 1832742818

3.9% से वोट से जीती भाजपा

2013 समीकरण: सड़क, बिजली और चिकित्सा से परेशान जनता ने किया बदलाव

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

बृहस्पत सिंह कांग्रेस 73174 अंतर

रामविचार नेताम भाजपा 61582 11592 1832742818

7.7% से वोट से जीती कांग्रेस

भाजपा व कांग्रेस के विधायक लंबे समय तक रहे मंत्री

परिसीमन के पूर्व पाल विधानसभा के नाम से विख्यात इस सीट का राज्य सभा सांसद रामविचार नेताम ने लगातार 25 सालों तक प्रतिनिधित्व किया है। साल 2008 के परिसीमन में रामानुजगंज सीट अस्तित्व में आया। पाल विधानसभा सीट पर वर्ष 1990 से वर्ष 2008 तक भाजपा के राम विचार नेताम का कब्जा रहा लेकिन 2013 में कांग्रेस के वृहस्पत सिंह से उन्हें मुहकी खानी पड़ी। इस सीट से कांग्रेस के देवसाय मराबी भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। भाजपा और कांग्रेस के दोनों विधायक लंबे समय तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन में मंत्री रहे हैं इसके बावजूद क्षेत्र विकास के लिए कोई महत्वपूर्ण पहल नहीं हुई है।

टिकट के दावेदार

भाजपा: जिपं अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नेताम व मोहन सिंह मरावी

कांग्रेस: विधायक वृहस्पत सिंह

जोगी फैक्टर : छजकां ने मोहन सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है।

विकास ही होगा मुद्दा

मूलभूत समस्याओं का निराकरण नहीं होने से क्षेत्रवासियों में काफी आक्रोश है। यूपी के अमवार डेम से डूब प्रभावितों के व्यवस्थापन की पहल नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है।

जातिगत समीकरण

क्षेत्र में अनुसूचित-जनजाति समाज के खैरवार क्षेत्र में उरांव, कंवर, पहाड़ी कोरवा व पिछड़ा वर्ग का साहू, गुप्ता, यादव, जायसवाल, मुस्लिम व विस्थापित बंगाली समाज की चुनाव में प्रभावी भूमिका रहती है।

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