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राजनांदगांव के बाद दुर्ग सहकारी बैंक में थोक में गड़बड़ी, संचालक मंडल होगा भंग !

राजनांदगांव के बाद दुर्ग सहकारी बैंक में थोक में गड़बड़ी, संचालक मंडल होगा भंग !

राजनांदगांव। आर्थिक अनिमितताओं के पुराने मामलों पर भूपेश सरकार ने नकेल कसना शुरू कर दिया है। राजनांदगांव सहकारी बैंक को भंग रकने के नोटिस के बाद अब दुर्ग जिला केंद्रीय सहाकारी बैंक को भी इसी तरह नोटिस व आरोपपत्र जारी कर दिए गए हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार राज्य में पूर्ववत भाजपा सरकार के कार्यकाल में सहकारी बैंकों में कई प्रकार की गड़बड़ियों के मामले सामने आए थे, इन मामलों में कभी कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन अब सरकार बदलने के सात महीने बाद एक एक कर सहकारी बैंकों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला शुरू होता दिख रहा है।

पंजीयक सहकारी संस्थाएं के रजिस्ट्रार धनंजय देवांगन ने दुर्ग जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को अलग अलग नोटिस जारी किए हैं। एक नोटिस में कहा गया है कि बैंक को जारी किए गए आरोप पत्र में उल्लेखित तथ्य एवं अभिलेखों के आधार पर प्रथमदृष्टया यह समाधान हो गया है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग के संचालक मंडल, बोर्ड छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम के तहत कर्तव्यो का निर्वहन करने में उपेक्षावान है और ऐसे कार्य करता रहा है जो बैंक तथा बैंक के सदस्यों के हितों के प्रतिकूल है।

इसके साथ ही बैंक की उपविधियों तथा अनेक उपबंधों का उल्लघंन भी किया जा रहा है, इसलिए जिला सहकारी बैंक दुर्ग के संचालक मंडल बोर्ड को सहाकारी सोसइटी अधिनियम की धारा 53 की उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन बोर्ड को क्यों न हटा दिया जाए ? बैंक को आरोप पत्र विवरण तथादस्तावेज दिए गए हैं। बैंक बोर्ड के सदस्यों को उनका पक्ष प्रस्तुत करन के लिए 30 जुलाई का समय दिया गया है ताकि वे रजिस्ट्रार के समक्ष उपस्थिति होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करें। इसी प्रकार बैंक के बोर्ड को निलंबित करने के लिए भी नोटिस दी गई है। इस संबंध में जवाब प्रस्तुत करने के लिए 1 अगस्त की तारीख तय की गई है।

कलेक्टर को जिम्मेदारी

रजिस्ट्रार ने दुर्ग जिल केंद्रीय सहकारी बैंक के संचालक के लिए दुर्ग कलेक्टर को प्राधिकारी नियुक्त किया है। रजिस्ट्रार ने आदेश में कहा है कि 11 जुलाई के बैंक विनिर्दिष्ट अधिकारी के पर्यवेक्षण के अधीन तथा उसके अनुमोदन से काम करे। बोर्ड द्वारा कोई भी आदेश या पारित संकल्प या किया गया कार्य तब तक प्रभावी नहीं होगा, जब त कि वह विनिर्दिष्ट अधिकारी द्वारा अनुमोदित न कर दिया जाए।

दबे हुए हैंं मामले

कहा जा रहा है कि कई बैंकों में भाजपा शासनकाल के समय से पदाधिकारी जमे हुए हैं। इनके खिलाफ कई शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई थी। अब सरकार बदलने के बाद एक-एक बैंक पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजनांदगांव के बाद अभी दुर्ग बैंक पर सख्ती की जा रही है।

जारी हुआ आरोप पत्र

बैंक बोर्ड को भंग करने, संचालक मंडल को निलंबित करने का नोटिस देने के साथ ही, बैंक के खिलाफ विभिन्न मामलों से जुड़ा आरोप पत्र भी जारी किया गया है। इनमें समय पूर्व एफडी के कैश कराने से तकरीबन पांच करोड़ के नुकसान के साथ, गोदाम निर्माण में अनियिमताओं समेत दर्जनभर मामलों का जिक्र किया गया है।

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