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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: जानिए क्यों गुंडरदेही है चर्चा में

कांकेर लोकसभा: 8 विधानसभा सीटें हैं यहां, जिनमें दूसरी कड़ी में गतांक से आगे हम बात करेंगे बची हुई चार सीटों की।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: जानिए क्यों गुंडरदेही है चर्चा में
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कांकेर लोकसभा: 8 विधानसभा सीटें हैं यहां, जिनमें दूसरी कड़ी में गतांक से आगे हम बात करेंगे बची हुई चार सीटों की।

संजारी बालोदः दुर्ग जिले की सीट

2013: सामान्य सीट भैयाराम साहू, कांग्रेस,वोट 88874, प्रीतम साहू, बीजेपी, वोट 58441

2011: कुमारी मदन साहू, बीजेपी, वोट 64185, मोहन पटेल, कांग्रेस, वोट 54520

2008: मदन साहू, बीजेपी, वोट 56620 मोहन पटेल, वोट मिले 49984

छत्तीसगढ़ का संजारी बालोद जिला राज्य के दुर्ग क्षेत्र में पड़ता है, लेकिन लोकसभा क्षेत्र कांकेर है। विधानसभा चुनावों के लिहाज से ये क्षेत्र इसलिए खास है क्योंकि संजारी बालोद जिले की तीन विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार मिली थी। 

संजारी बालोद विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी को मात दी थी। 2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के भैयाराम सिन्हा ने बीजेपी के प्रीतम साहू को मात दी थी। उन्होंने प्रीतम साहू को करीब 30 हजार वोटों के अंतर से हराया था। इस बार भी जबरदस्त घमासान है। विकास के काम दिखते नहीं हैं।

गुंडरदेहीः बालोद जिले की सीट

2013: कांग्रेस के राजेंद्र कुमार राय वोट 72770 , बीजेपी वीरेंद्र साहू को 51490 मिले थे।

2008: बीजेपी के वीरेंद्र साहू वोट, 64010, कांग्रेस के घनाराम साहू को 61425 वोट थे।

2003: बीजेपी की रमशिला साहू को 40813 व कांग्रेस के घनाराम को 31523 वोट मिले थे।

गुंडरदेही सीट को आज इसलिए याद किया जा रहा है क्योंकि यहां के कांग्रेस से जीते विधायक ने कांग्रेस का साथ छोड़कर जोगी का दामन थाम लिया। बालोद जिले की गुंडरदेही सीट पर तकनीकी रूप से कांग्रेस का कब्जा है।

भाजपा और कांग्रेस के बीच हमेशा ही कड़ी टक्कर रही है। इस बार मुकाबला कैसा होगा, आरके राय पर जनता क्या फैसला देगी, यह वक्त ही बताएगा। यहां नए चेहरों को जनता ज्यादा चुनती है। यह ट्रेंड पिछले पांच चुनावों में देखने को मिला है।

1993 में बीजेपी के ताराचंद, 1998 में कांग्रेस के घनाराम साहू, 2003 में रमशीला साहू, 2008 में वीरेंद्र साहू और 2013 में आरके राय विधायक बने थे।

सिहावाः धमतरी जिले की सीट

2013: एसटी , श्रवण मरकाम, बीजेपी, वोट 53894, अंबिका मरकाम, कांग्रेस, वोट 46407

2008: अंबिका , कांग्रेस, 56048, पिंकी शिवराज शाह, बीजेपी, 41152

2003: पिंकी ध्रुव, वोट 47624 माधव सिंह ध्रुव, कांग्रेस, वोट 31559

अभी भाजपा के विधायक हैं। पिछले तीन चुनावों में इस सीट पर दो बार बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व सीट पर श्रवण मरकाम ने कांग्रेस की अंबिका मरकाम को हराया था। यहां महिला उम्मीदवारों का अच्छा बोलबाला रहा है।

जनता ने महिलाओं को सपोर्ट भी किया है। 2008 के चुनाव में तो महिला उम्मीदवार ने जीत भी दर्ज की थी, और अन्य चुनावों में भी महिला उम्मीदवार लगातार दूसरे नंबर पर रह अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं। विशेष मुद्दे किसानों का क्षेत्र होने के नाते सिंचाई के संसाधन, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा कुछ न हो पाना है।

डोंडीलोहाराः बालोद जिले की सीट

पिछली जनगणना क मुताबिक यहां की कुल जनसंख्या 3 लाख 623। कुल मतदाता यहां 2 लाख 3 हजार 453। पुरुष मतदाता 1 लाख 771 व महिला मतदाता की संख्या 1 लाख 2 हजार 682। वर्तमान में विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है और विधायक अनिला भेड़िया हैं कांग्रेस विधायक

2013 में कांग्रेस से अनिला भेड़िया विधायक चुनी गईं। यहां बीजेपी-कांग्रेस के अलावा छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा भी मैदान में है। जोगी कांग्रेस भी है। इसलिए कांग्रेस से सीट को हासिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। बहुत सारे दावेदार हैं दोनों ही प्रमुख पार्टियों में।

यह क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। पानी को लेकर काफी गुस्सा है। तांदुला,खरखरा और गोदली डेम हैं लेकिन इसके बाद भी किसानों के खेत मंे पानी नहीं पहुंच रहा है। सड़कें बदहाल हैं। कांग्रेस की विधायक ने कई बार विपक्षी दल के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। भाजपा ने पर्याप्त राशि जारी करने की बात कही है।

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