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CG Elections 2018: ''सोनहत-भरतपुर'' के मुख्य मुद्दे

छत्तीसगढ़ का पहला विधानसभा क्षेत्र सोनहत-भरतपुर। कोरिया जिले का आदिवासी बाहुल्य वनांचल इलाका। विधानसभा क्षेत्र साल 2008 में अस्तित्व में आया।

CG Elections 2018:

बैकुण्ठपुर। छत्तीसगढ़ का पहला विधानसभा क्षेत्र सोनहत-भरतपुर। कोरिया जिले का आदिवासी बाहुल्य वनांचल इलाका। विधानसभा क्षेत्र साल 2008 में अस्तित्व में आया। यह सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान यहां की जनता ने अपना जनादेश भाजपा के पक्ष में दिया। जिला पंचायत कोरिया का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद चंपादेवी पावले सीधे विधायक निर्वाचित हुई और पहली बार में ही संसदीय सचिव बनीं। इस बार भी वे टिकट की प्रबल दावेदार हैं।

ये हैं विधानसभा के मुख्य मुद्दे

भरतपुर सोनहत में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था से क्षेत्र के लोग खासा नाराज हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारी आंकड़ों और विभागीय कागजों में चिकित्सा व्यवस्था सेहतमंद नजर आती है। अंचल के क्षेत्रों में हालात और भी बदतर हैं। सड़कें खराब होने की वजह से कई गाँवों में संजीवनी एक्सप्रेस तक नहीं पहुंच पाती। मौसमी बीमारी में ग्रामीणों को और अधिक परेशानी होती है।

डेम-बांध बहुत, पर खेतों तक नहीं पहुंचता पानी

सोनहत में सिंचाई सुविधाओं के जाल स्टाप डेम से लेकर अन्य बांध आदि पूर्व से लेकर अभी तक बने हो, परंतु उनका लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। खेती से जुड़े किसानी नेता परसुराम बोडार, कृष्णा राजवाड़े, मोहरसाय आदि ने बताया किसानों के लिए बनी योजनाएं केवल कागजों में है। हालत ये है कि वनांचल बसाहटों में पीने के लिए नलों से लाल पानी निकलता है। पीने के पानी के लिए भी आदिवासी परेशान रहते हैं। गर्मी में ये विकराल समस्या बन जाती है।

खुद की बिजली के लिए तरस रहा विधानसभा

बिजली के मामले में जरुर राज्य अन्य प्रदेशों को विद्युत मुहैय्या करा रही है, लेकिन वर्तमान में इलाके के भरतपुर-सोनहत में मध्यप्रदेश की बिजली से गांव रौशन हो रहे हैं। खुद की बिजली उपलब्ध कराने के लिए फारेस्ट क्लियरेंस का कार्य भी पूरा हो गया है। अब समय पर बिजली पहुंचाना चुनौती है।

लोगों की बात

काम नहीं करा पाती हैं

इलाके में विधायक आती तो हैं लेकिन शिकायतों का निराकरण नहीं करा पाती हैं। आवेदन पर आवेदन देने के बाद भी राजस्व मामले लंबित रहते हैं। ऐसे में अब ग्राम पंचायत के लोगों में काफी असंतुष्टि भी दिखी है। वनांचल इलाका जनकपुर में ज्यादा कार्य भी नहीं हुए, जिसे उपलब्धियों के तौर पर लिया जाए। (लाल साय सिंह,सरपंच हरचोखा जपं भरतपुर)

प्रयास करतीं हैं

हमारे इलाके की विधायक निर्माण कार्यों के लिए प्रयास करती हैं, तभी पुल-पुलिया की स्वीकृति हो रही है। विधायक मिलनसार भी हैं, किसी भी कार्यक्रम में बुलाने पर सहज ही पहुंच जाती हैं। हमारे इलाके के लोग विधायक के कार्य से काफी हद तक संतुष्ठ हैं। उनके नेतृत्व में करोड़ों के विकास कार्य हुए और हो रहे हैं। (लल्ला यादव, ग्राम मेहदौली जनकपुर)

क्षेत्र में करोड़ों के विकास कार्यों पर काम जारी

विधानसभा क्षेत्र की विधायक एवं संसदीय सचिव चंपादेवी पावले ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र में कालेज की सुविधा से लेकर ग्राम वनांचल में आश्रम, छात्रावास, सड़क, पुल-पुलिया निर्माण से आम मजदूरों को काम के साथ ग्राम विकास की योजना से बुनियादी हक दिलाया गया। घोषणा के अनुरुप बरबसपुर में लगभग 6 करोड़ का महराजपुर में बांध, केल्हारी में महाविद्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ,केल्हारी बिजुरी मार्ग, सेतु निगम से कटवार में दो पुल, बड़गांवकला में पुल, जनकपुर से जयसिंह नगर पक्का सड़क निर्माण के अलावा जनकपुर में छग से बिजली सेवा प्रदान कराने कार्य जारी करा दिया गया है। विकास कार्यों के पूरा होने पर लोगों को सभी सुविधाएं मिलने लगेंगी।

मैंने जो घोषणाएं की लगभग पूरी हो गई

जो भी घोषणाएं मैंने की, वह करीब-करीब पूरी हो गई हैं। बिजली की समस्या जरुर है, लेकिन सीएम साहब के निर्देश के बाद उसका कार्य भी तीव्रता से चल रहा है। क्षेत्र में अभी विकास के कार्य अनवरत जारी हैं। चंपा देवी पावले (विधायक व संसदीय सचिव)

बिजली भाजपा की सबसे बड़ी नाकामी

भाजपा शासन काल में सबसे बड़ी नकामी यह है कि, यहां वर्तमान में मध्यप्रदेश की बिजली से इलाका रौशन हो रहा है। अब तक कोई उद्योग नहीं लगे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। गुलाब सिंह कमरो (कांग्रेस के उम्मीदवार)

भाजपा ने निर्माण कार्यों के नाम पर लूट मचाई है

भरतपुर-सोनहत क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी रहे गुलाब कमरो ने कहा कि विकास का दम भरने वाले भाजपा के लोग निर्माण कार्यों के नाम पर लूट मचाए हुए हैं, अधिकारी निरंकुश हो गए हैं। शिकायतों के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। आने वाले कुछ महीनों बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे और तब क्षेत्र की जनता प्रदेश की भाजपा सरकार को मुंहतोड़ जवाब देगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले की तीनों विधानसभाओं को गोद लेने की बात कही थी। चुनाव के बाद जो परिणाम आए उसमें तीनों विधानसभा भाजपा प्रत्याशियों के खाते में गई, लेकिन जिला आज भी विकास से अछूता है। आदिवासी सीट होने के बाद भी आदिवासियों को उनका हक नहीं मिल रहा है, वे उपेक्षित हैं।

रूर्बन योजना बड़ी उपलब्धि

विधानसभा सोनहत भरतपुर को विकास की अधोसंरचना जोड़ने विधायक चंपादेवी पावले का खासा प्रयास रहा। इसी के कारण सोनहत विकासखंड के 20 ग्राम पंचायत के 45 ग्रामों को रूर्बन योजना के तहत विकास योजना से जोड़ दिए जाने से ग्राम पंचायतों में शहरी विकास को गति देने कार्य जारी है। कार्यकाल के दौरान कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज हो गई, जिसे क्षेत्र की जनता ने समझा है।

आम जनता को नहीं मिल रहा लाभ

इलाके में निर्माण और विकास कार्य तो चल रहे हैं, किंतु इन कार्यों का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। रुअर्बन के काम राशि खर्च करने मनमाने तौर से चला रहे हैं। गुणवत्ता से समझौता करते हुए औचित्यहीन निर्माण होने से विकास कार्य को पलिता लग गया है। हालत है कि कई पंचायतों में निर्माण कार्य ऐसे हो गए कि सरकार खुद सवालों के घेरे में उलझ गया है।
गुलाब चौधरी (ब्लाक अध्यक्ष सोनहत)

एक नज़र में

आदिवासी आरक्षित सीट भरतपुर सोनहत में भाजपा का कब्जा है। 2008 में विधायक रहे फूलचंद सिंह की सेहत ठीक नहीं होने की वजह से चंपादेवी पावले को मौका मिला। उन्होंने कांग्रेस के गुलाब कमरो को हराया। हालांकि जीत का अंतर 4 हजार से अधिक वोट थे जो 2008 के चुनाव से करीब आधा था।

प्रमुख दावेदार

विधानसभा भरतपुर-सोनहत से वर्तमान में भाजपा से वर्तमान विधायक चंपा देवी पावले, पूर्व विधायक फूलचंद्र सिंह कांग्रेस से पूर्व प्रत्याशी गुलाब कमरो, जिला पंचायत सदस्य शरण सिंह प्रमुख दावेदार हैं जोगी कांग्रेस ने पहले ही पूर्व विधायक गुलाब सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसके अलावा गोंगपा से भी प्रत्याशी चुनावी मैदान में रहेंगे।

जनकपुर और केल्हारी के वोट सबसे अहम

विधानसभा भरतपुर सोनहत क्षेत्र से लेकर लगभग 104 ग्राम पंचायत के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले अकेले जनकपुर ,केल्हारी, भगवानपुर इलाके के वोट अहम माने जाते हैं। यहां से जिस भी प्रत्याशी को लीड मिलती है, उसकी जीत लगभग तय मानी जाती है। सोनहत से लेकर दूर ग्राम केल्हारी, भरतपुर, बहरासी, कुंवारपुर, खोंगापानी आदि घनी आबादी वाले क्षेत्र से लेकर अन्य दूर-दराज क्षेत्रों का भी खासा प्रभाव है।
2008 समीकरण: परिसीमन के बाद कांग्रेस का कमजोर होना
प्रत्याशी पार्टी मत
जीत का अंतर
फूलचंद सिंह भाजपा 35443
गुलाब सिंह कांग्रेस 28145 7298
2013 समीकरण: दूरस्थ इलाकों में काम का भाजपा को लाभ मिला
प्रत्याशी पार्टी मत जीत का अंतर
चंपादेवी पावले भाजपा 42968
गुलाब कमरो कांग्रेस 38360 4608
2013 वसि चुनाव में 3.8 प्रतिशत वोट से भाजपा की मिली जीत
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