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सीजी न्यूज़ : दो साल में मिले 500 करोड़, खर्च हुए 100 करोड़, फिर भी स्मार्ट सिटी नहीं बनी रायपुर

देशभर के 100 चुनिंदा शहरों में दो साल पहले स्मार्ट सिटी की श्रेणी में शामिल हुए रायपुर शहर की स्थिति में बदलाव नहीं हो सका। पंद्रह प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने 2 साल में सरकार से 500 करोड़ की राशि मुहैया कराई गई, लेकिन स्मार्ट सिटी लिमिटेड सिर्फ 100 करोड़ खर्च कर सका, जबकि 400 करोड़ अभी भी स्मार्ट सिटी के खाते में बाकी है।

सीजी न्यूज़ : दो साल में मिले 500 करोड़, खर्च हुए 100 करोड़, फिर भी स्मार्ट सिटी नहीं बनी रायपुर

देशभर के 100 चुनिंदा शहरों में दो साल पहले स्मार्ट सिटी की श्रेणी में शामिल हुए रायपुर शहर की स्थिति में बदलाव नहीं हो सका। पंद्रह प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने 2 साल में सरकार से 500 करोड़ की राशि मुहैया कराई गई, लेकिन स्मार्ट सिटी लिमिटेड सिर्फ 100 करोड़ खर्च कर सका, जबकि 400 करोड़ अभी भी स्मार्ट सिटी के खाते में बाकी है।

नतीजतन एक दो छिटपुट प्रोजेक्ट छोड़कर कोई बड़ा प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतरा। योजनाओं ने फाइलों में कैद होकर स्मार्ट सिटी के दफ्तर की आलमारी में दम तोड़ दिया। सरकार बदलने के बाद अफसर इस आपाधापी में जुटे हैं, चार महीने में 400 करोड़ खर्च कहां किए जाएं। इसके लिए बड़े प्रोजेक्ट को नए कलेवर में विभागीय मंत्री के सामने स्मार्ट प्रेजेंटेशन में प्रस्तुत करने तारीख ली जा रही है।

दरअसल, स्मार्ट सिटी के 70 फीसदी प्रोजेक्ट इस साल पूरे होने के बजाए अब भी अधूरे हैं। इन प्रोजेक्ट के लिए खाका तैयार कर अफसरों ने काम शुरू करने की औपचारिकता शुरू की, लेकिन योजनाओं को गति नहीं मिलने से अब दोबारा नए सिरे से इसके लिए प्लान बनाया गया।

इसके कारण प्रोजेक्ट की लागत दोगुनी हो गई। मसलन पहले शहर की 19 सड़कों को स्मार्ट रोड बनाने के लिए चिन्हांकित किया गया, जिसमें 200 करोड़ खर्च होने थे, लेकिन एक साल के दौरान 19 में 1 भी सड़क स्मार्ट रोड नहीं बन सकी। अब अफसरों ने 19 की जगह एबीडी एरिया की सभी 40 सड़कों को इसमें शामिल कर सीधे 400 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर टेंडर कर दिया है।

मोतीबाग से फायर ब्रिगेड चौक होते हुए महिला थाना से कालीबाड़ी जाने वाली सड़क स्मार्ट रोड बनाई जानी है। इसके लिए पूर्व में सड़क चौड़ीकरण कर गड्ढे पाटने का काम नगर निगम के अफसरों ने कराया, लेकिन स्मार्ट रोड के लिए पूरे क्षेत्र में अंडरग्राउंड केबलिंग, फुटपाथ के नीचे बड़े और मोटे पाइप बिछाने का काम नहीं किया।

इनमें बिजली और केबल कंपनियों के तार डालने की सुविधा दी जानी थी, ताकि सड़क की बार-बार खुदाई से नुकसान ना हो। स्मार्ट रोड में सायकल लेन, फुटपाथ, यूटिलिटी डक्ट और स्मार्ट पोल लगाने के साथ वाईफाई की सुविधा दी जाना शामिल है। यही नहीं, रोड के किनारे लैंडस्केपिंग कर लोगों को आकर्षित करने का काम स्मार्ट रोड में होना है।

अब तक ये सुविधा चिन्हांकित स्मार्ट रोड में मुहैया नहीं कराई जा सकी। परिक्रमा पथ की सड़क : सुलभ शौचालय के सामने से सप्रे स्कूल के पीछे वाली सड़क दानी स्कूल होते हुए विवेकानंद सरोवर के परिक्रमा पथ से होकर संजय नगर होते हुए पुलिस लाइन वाले मार्ग तक स्मार्ट रोड बनेगी।

  • मालवीय रोड से कोतवाली चौक तक वाकिंग स्ट्रीट का प्लान, साथ ही इस पूरे एरिया को व्हीकल फ्री जोन बनाया जाएगा।
  • कोतवाली से कंकालीपारा मार्ग को जनसुविधा और यातायात दबाव कम करने के लिहाज से वन वे करने की योजना।
  • बुजुर्गों के लिए ई-रिक्शा चलाने की योजना।

24 घंटे सातों दिन जल आपूर्ति की योजना :

शहर के 16 वार्डों की 50 हजार आबादी को स्मार्ट सिटी में प्रारंभिक चरण में 24 घंटे सातों दिन पर्याप्त जल आपूर्ति के लिए 100 करोड़ की योजना है। 777 एकड़ क्षेत्र में फैले जिन 16 वार्डों को इसमें शामिल कर योजना बनाई गई है, उसमें स्वामी विवेकानंद वार्ड, शहीद चूड़ामणि वार्ड, रामसागरपारा वार्ड, इंदिरा गांधी वार्ड, हवलदार अब्दुल हमीद वार्ड, जवाहरलाल नेहरू वार्ड, तात्यापारा, सदर बाजार, शहीद ब्रिगेडियर उस्मान वार्ड, विपिन बिहारी सूर वार्ड, विवेकानंद वार्ड, ब्राम्हणपारा वार्ड, कंकालीपारा, ठाकुर प्यारेलाल, महंत लक्ष्मीनारायण दास, महामाया मंदिर वार्ड शामिल है। इन वार्डाें में सीवरेज सिस्टम, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को दुरुस्त करना शामिल है।

शास्त्री बाजार प्रोजेक्ट :

26 करोड़ के हाइजेनिक सब्जी बाजार के रूप में शास्त्री बाजार कमर्शियल कांप्लेक्स का प्लान तीन साल से अटका पड़ा है। स्मार्ट सिटी में इसके लिए दो बार ड्राइंग डिजाइन में फेरबदल हुआ। तीसरी बार पांच साल मेंटनेंस की शर्त को टेंडर से हटाकर रीटेंडर कर पीपीपी मोड में एजेंसी तय करने की तैयारी है।

इसके साथ रूफ टाप साेलर पैनल 15 करोड़ 85 लाख का प्रोजेक्ट, गंज मंडी, भैंसथान प्रोजेक्ट, नवीन बाजार पार्किंग सह कमर्शियल कांप्लेक्स, 22 जगहों पर पीपीपी मोड स्मार्ट पार्किंग, 21 करोड़ का जवाहर बाजार कांप्लेक्स, 157 करोड़ के आईटीएमएस सिस्टम का बड़ा प्रोजेक्ट अभी धरातल पर नहीं आ पाया।

समीक्षा कर रहे

स्मार्ट सिटी के दो साल में 15 प्रोेजेक्ट को लेकर समीक्षा की जा रही है। 500 करोड़ शासन से मिले, इसमें से 100 करोड़ खर्च हुए। ज्यादातर बड़े प्रोजेक्ट टेंडर की प्रक्रिया में हैं या इन पर काम चल रहा है, इस वजह से 400 करोड़ बाकी है। आने वाले दिनों में आईटीएमएस, स्मार्ट रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट में एकमुश्त बड़ी रकम खर्च होगी। (रजत बंसल, एमडी, रायपुर स्मार्ट सिटी)

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