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संस्कृति विभाग में बजट का टोटा, कलाकारों की बढ़ी मुश्किलें, मंत्री-विधायकों की एप्रोच से ही मिलती है बुकिंग

बालीवुड कलाकारों व इवेंट कंपनियों की प्रस्तुति पर लाखों खर्च करने वाले संस्कृति विभाग को अब लोक कार्यक्रमों की स्वीकृति के लिए भी सोचना पड़ रहा है। संस्कृति विभाग लोक आयोजन मेला मंडाई के लिए स्वीकृति नहीं दे रहा।

संस्कृति विभाग में बजट का टोटा, कलाकारों की बढ़ी मुश्किलें, मंत्री-विधायकों की एप्रोच से ही मिलती है बुकिंग

बालीवुड कलाकारों व इवेंट कंपनियों की प्रस्तुति पर लाखों खर्च करने वाले संस्कृति विभाग को अब लोक कार्यक्रमों की स्वीकृति के लिए भी सोचना पड़ रहा है। संस्कृति विभाग लोक आयोजन मेला मंडाई के लिए स्वीकृति नहीं दे रहा। विभाग कार्यक्रमों की स्वीकृति देने बजट का रोना रो रहा है।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिसंबर से अब तक विभाग के पास कार्यक्रमों के कुल 200 आवेदन आए हैं। इसमें से गिनती के कार्यक्रमों को ही स्वीकृति मिली है, बाकी के कलाकारों को बुकिंग के लिए तरसना पड़ रहा है। विभाग की सूची में मैनुअल पंजीकृत 5 हजार लोक कलाकार शामिल हैं। वहीं चिन्हारी मेें अधिकृत तौर पर 150 के आसपास लोक कलाकार पंजीकृत हैं।

विभागीय अधिकारियों की मानें, तो कलाकारों के मानदेय व अनुदान के लिए सालाना 950 करोड़ रुपए की राशि शासन द्वारा विभाग को दिए जा रहे हैं। बावजूद इसके कलाकारों को न तो ठीक ढंग से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बुकिंग मिल पाती है और न ही समय पर मानदेय मिलता है।

कार्यक्रमों की स्वीकृति नहीं देने के संबंध में विभाग का कहना है कि उनके पास जो आवेदन आए हैं उनमें मंत्री, विधायकों की अनुशंसा है। अनुशंसा में महंगे लोक कलाकारों की मांग ज्यादा है। सीमित फंड होने की वजह से सबको अनुमति देना संभव नहीं है।

यह कहना है कलाकारों का -

एक भी कार्यक्रम नहीं मिला
लोकमंच के कलाकार डॉ. पीसीलाल यादव का कहना है कि उन्हें इस सीजन में संस्कृति विभाग की ओर से एक भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बुकिंग नहीं मिली है। कलाकार हाेने के नाते सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की बुकिंग की आस तो रहती है, मगर विभाग की ओर से अभी तक कोई स्वीकृति नहीं आई है।
अब तक सिर्फ 1 प्रोग्राम की बुकिंग
लोक कलाकार अलका चंद्राकर का कहना है कि पिछले एक महीने में संस्कृति विभाग की आेर से उन्हें सिर्फ एक प्रोग्राम की बुकिंग मिली है। इसके बाद अभी तक कोई बुकिंग नहीं मिली।
देर से मिलता है मानदेय
लोक कलाकार खुमान साव का कहना है कि कार्यक्रमों की प्रस्तुति के बाद मानदेय देर से मिलता है। विभाग के अधिकारी अपने इच्छा अनुसार मानदेय देते हैं। सालों इंतजार के बाद मानदेय मिल पाता है।
2018 से नहीं मिला मानदेय
लोक कलाकार लालजी श्रीनिवास का कहना है कि संस्कृति विभाग द्वारा 2018 में दिए गए कार्यक्रम की प्रस्तुति के 90 हजार रुपए का मानदेय उन्हें अभी तक नहीं मिला है। साथ ही इस सीजन में एक भी कार्यक्रम की बुकिंग नहीं मिली है।
कहां से कितने आवेदन
विभाग से प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक लोक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के लिए मुख्यमंत्री निवास से 16, संस्कृति मंत्री से 7 अनुशंसा पत्र मिले हैं। वहीं सांसद, मंत्रियों, विधायक, जिला पंचायत, ग्राम पंचायत व समाजिक संगठनों को मिलाकर 177 आवेदन आए हैं।
बजट देखना पड़ता है
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जो आवेदन आते हैं, उनकी स्वीकृति के लिए कलाकारों की उपलब्धता के साथ बजट भी देखना पड़ता है।
- चंद्रकांत उइके, संचालक, संस्कृति विभाग
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