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रायपुर में रसोई गैस की अवैध रीफिलिंग का काला कारोबार, आउटर में भी धंधा, कभी भी बिगड़ सकते हैं हालात

राजधानी में बेरोक टोक रसोई गैस की अवैध रीफिलिंग का कारोबार तेजी से बढ़ा है। हर महीने की अवैध मोटी कमाई के चक्कर में नियम कानून को दरकिनार कर गैस रीफिलिंग की दुकानें सज रही हैं। सैकड़ों छोटे सिलेंडरों में रीफिलिंग के जरिए गैस भरकर महंगे दामों में बेचा जाता है।

रायपुर में रसोई गैस की अवैध रीफिलिंग का काला कारोबार, आउटर में भी धंधा, कभी भी बिगड़ सकते हैं हालात
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राजधानी में बेरोक टोक रसोई गैस की अवैध रीफिलिंग का कारोबार तेजी से बढ़ा है। हर महीने की अवैध मोटी कमाई के चक्कर में नियम कानून को दरकिनार कर गैस रीफिलिंग की दुकानें सज रही हैं। सैकड़ों छोटे सिलेंडरों में रीफिलिंग के जरिए गैस भरकर महंगे दामों में बेचा जाता है।

यही नहीं, मार्केट से लेकर रहवासी कॉलोनी के बीच स्थित मकानों में रीफीलिंग की जा रही है। इससे ब्लॉस्ट होने पर तबाही मच सकती है। इसके बाद भी इस अवैध और जान जोखिम में डालने वाले कारोबार पर शिकंजा नहीं कसा गया।

यही वहज है, सोमवार को चूड़ी लाइन के अनिल गुप्ता के मकान में घरेलू और छोटे सिलेंडरों का जखीरा मिला। यह पहला मामला नहीं है, बल्कि इसके पहले भी गोलबाजार समेत अन्य इलाकों में रीफिलिंग पकड़ी जा चुकी है। बावजूद इसके, लाखों रुपए के इस अवैध कारोबार पर लगाम नहीं कसी जा सकी।

यहां सर्वाधिक रीफिलिंग
हरिभूमि टीम की पड़ताल में पाया गया, स्लम बस्तियों और उसके आसपास के मार्केट में रीफिलिंग का काम तेजी से संचालित हो रहा है। इनमें गुढ़ियारी, उरला, धरसींवा, गोलबाजार, पंडरी समेत राजधानी की दर्जनभर से अधिक गैस चूल्हा रिपेयर व छोटे सिलेंडर बेचने वाली दुकानों पर अधिकतर रीफिलिंग का काम सालों से संचालित है, जबकि छोटे सिलेंडर का रेट भी निर्धारित है। इसके बाद भी मोटी कमाई के चक्कर में रीफिलिंग कर बेची जाती है, लेकिन इस कारोबार को बंद कराने सरकारी तंत्र गंभीर नहीं है।
एक बड़े गैस सिलेंडर से 5 छोटे सिलेंडर
जानकारी के मुताबिक रीफिलिंग के इस अवैध कारोबार में एक रसोई गैस सिलेंडर से 1000 रुपए का मुनाफा होता है। कारोबारी बड़ा रसोई गैस सिलेंडर लेकर अपनी दुकान में रीफिलिंग करते हैं। एक सिलेंडर की गैस से 3 लीटर के 5 छोटे सिलेंडर भरे जाते हैं। इन्हें खुले बाजार में मनमानी रेट पर बेचा जाता है। इससे साफ है, अनिल गुप्ता हर महीने एक से डेढ़ लाख रुपए की अवैध कमाई करता था।
ऐसे समझें मुनाफा
जानकारी के मुताबिक बाजार में 5 किग्रा के छोटे सिलेंडर में 200 से 250 के बीच गैस भरी जाती है। यही गैस एक-दो किग्रा भरवाने पर दुकानदार 110 रुपए प्रति किग्रा के हिसाब से वसूली करता है। एक घरेलू गैस सिलेंडर में करीब 15 किग्रा गैस रहती है। इसमें करीब 2 से 3 छोटे सिलेंडर भरते हैं, वो भी 3 किग्रा वाला।
इसे 350 से 400 रुपए प्रति सिलेंडर बेचते हैं, यानी प्रति सिलेंडर से 150 से 200 रुपए का मुनाफा होता है, जबकि चिल्हर में 80 रुपए प्रति किग्रा के हिसाब से मुनाफा कमाते हैं। ऐसे में अगर 3 सिलेंडर पर 450 से 600 रुपए और 5 किग्रा चिल्हर बेचने पर 400 रुपए का मुनाफा होता है, यानी एक सिलेंडर पर 1000 रुपए का मुनाफा होता है। यही वजह है, गैस रीफिलिंग का अवैध कारोबार बंद नहीं हो रहा।
कार्रवाई की जाएगी
बड़े सिलेंडर से छोटे सिलेंडर में गैस की रीफिलिंग करना गलत है। ऐसे कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- जीएस राठौर, जिला खाद्य अफसर, रायपुर

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