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भाजपा में अब प्रदेशाध्यक्ष बदलने की होगी कवायद

भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद अब तय है कि जल्द ही भाजपा में नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होगी। इसे लेकर जल्द कवायद प्रारंभ होगी।

भाजपा में अब प्रदेशाध्यक्ष बदलने की होगी कवायद
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भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद अब तय है कि जल्द ही भाजपा में नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होगी। इसे लेकर जल्द कवायद प्रारंभ होगी। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और रामप्रताप के साथ कई दावेदार सामने हैं।

यह बात तय है कि जिन्हें भी संगठन की कमान दी जाएगी, वे आलाकमान की पसंद के होंगे। राष्ट्रीय संगठन किसी ऐसे को कमान देगा, जो संगठन में नए सिरे से जान फूंककर संगठन को लोकसभा चुनाव के लिए खड़ा कर सके।

विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने यह कहते हुए इस्तीफा देने से मना कर दिया था कि चुनाव डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में लड़ा गया था और उन्होंने जिम्मेदारी लेते हुए पहले ही इस्तीफा दे दिया है।
ऐसे में मुझे इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है। अब उन्हें नेता प्रतिपक्ष चुना गया, तो यह चर्चा होने लगी है कि उनके स्थान पर संगठन की कमान किसी और को दी जाएगी।

रमन-रामप्रताप प्रबल दावेदार
अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की बात की जाए, तो यहां भी नेता प्रतिपक्ष की तरह पहले नंबर पर डॉ. रमन सिंह का ही नाम नजर आता है। इसके पीछे का कारण यह है कि संगठन की कमान उनके हाथ में दी जाती है, जो संगठन के हिसाब से काम कर सकें और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की क्षमता रखता हो।
चूंकि अभी लोकसभा चुनाव होने हैं और इसमें ज्यादा समय नहीं है, इसलिए राष्ट्रीय संगठन किसी ज्यादा ही परिपक्व को अध्यक्ष की कमान देना चाहेगा। लाेकसभा चुनाव के लिए इस बार दौरे भी ज्यादा करने होंगे। दौरे करने में डा. सिंह माहिर हैं।
इन सब बातों पर ध्यान देते हुए भाजपा से जुड़े सूत्र डॉ. रमन सिंह का ही नाम लेते हैं। उनके बाद दूसरे नंबर पर रामप्रताप का नाम है। आरएसएस से होने की वजह से उनमें संगठन को समझने और कार्यकर्ताओं में जान फूंकने की क्षमता है।

ये भी होंगे दावेदार
अन्य दावेदारों की बात करें, तो जिस तरह नेता प्रतिपक्ष के लिए वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल और ननकी राम कंवर दावेदार थे, लेकिन इनकी बात नहीं सुनी गई, उसके बाद से इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा कि इनमें से भी किसी को संगठन की कमान दी जाती है।
इनके साथ राजेश मूणत का नाम भी है, जो भले चुनाव हार गए हैं, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर सारा जिम्मा श्री मूणत को दिया जाता रहा है। उनके बारे में हालांकि एक बात यह भी कही जाती है कि उनके तेवर बहुत कड़े रहते हैं, जो कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में बाधा पैदा कर सकते हैं।

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