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Big News : मीसाबंदियों को नहीं मिलेगा पेंशन, कांग्रेस ने कहा-आजादी की लड़ाई से उनका कोई वास्ता नहीं

प्रदेश में 300 मीसा बंदियों को सम्मान निधि के रूप में 25 हजार रुपए दिया जाता था, जो अब नहीं दिया जाएगा। पढ़िए पूरी खबर-

Big News : मीसाबंदियों को नहीं मिलेगा पेंशन, कांग्रेस ने कहा-आजादी की लड़ाई से उनका कोई वास्ता नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मीसा बंदी पेंशन योजना 2008 पर रोक लगा दी है। जानकारी मिली है कि इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। आपको बता दें कि प्रदेश में 300 मीसा बंदियों को सम्मान निधि के रूप में 25 हजार रुपए दिया जाता था।

सरकार का कहना है कि इन मीसा बंदियों की भूमिका आजादी की लड़ाई में थी या नहीं, इसका परीक्षण किया जाएगा।


कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी का कहना है कि तत्कालीन भाजपा की रमन सरकार द्वारा भाजपा और आरएसएस के नेताओं को खुश करने के लिए और अपना नंबर बढ़ाने के लिए वर्ष 2008 में कानून बनाकर मीसा बंदियों को राशि प्रदान करने का आदेश पारित किया था, जिसे सम्मान निधि कहा जाता था। प्रदेश के उन भाजपा और आरएसएस के नेताओं का चयन करके जिनक देश की आजादी की लड़ाई से कोई वास्ता नहीं था।

बावजूद इसके उन्हें मीसाबंदी घोषित किया गया और 25000 रुपए प्रति व्यक्ति से अधिक की राशि इन पर राजकीय कोष से खर्च किया जाता था। यह एक तरह से जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग था। विकास तिवारी ने राज्य सरकार की ओर से लिए गए फैसले पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार व्यक्त करते हुए यह मांग की है कि सम्मान निधि में जो राशि खर्च की जाती थी उन्हें अब प्रदेश के बेरोजगार युवाओं आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले प्रतिभाओं पर खर्च किया जाना चाहिए, ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो सके।

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