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बैंक हड़ताल का छत्तीसगढ़ में व्यापक असर, 25 हजार करोड़ का कारोबार बुरी तरह प्रभावित

विभिन्न ट्रेड यूनियन के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ बीमा व डाककर्मियों की हड़ताल का शहर में व्यापक असर रहा। मंगलवार को कई बैंकों पर ताले लटके रहे।

बैंक हड़ताल का छत्तीसगढ़ में व्यापक असर, 25 हजार करोड़ का कारोबार बुरी तरह प्रभावित
विभिन्न ट्रेड यूनियन के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ बीमा व डाककर्मियों की हड़ताल का शहर में व्यापक असर रहा। मंगलवार को कई बैंकों पर ताले लटके रहे।
यहां के अधिकतर अधिकारियों कर्मचारियों ने हड़ताल पर रहकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। हड़ताल के कारण जहां रोजमर्रा का लेनदेन बाधित रहा, वहीं बैंकों के एटीएम खाली हो जाने से लोग नकदी के लिए भटकते रहे। इससे शहर का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
एक अनुमान के अनुसार इस हड़ताल के कारण शहर में करीब 25 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। हड़ताल 9 जनवरी को भी जारी रहेगी। ऐसे में लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
बैंक आफ बड़ौदा में विजया बैंक व देना बैंक के विलय सहित केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही नई पेंशन स्कीम, श्रमिक कानून में बदलाव, आउट सोर्सिंग, महंगाई व बेरोजगारी के खिलाफ देश के विभिन्न ट्रेड यूनियन द्वारा लगातार आंदोलन किया जा रहा है। इसके तहत बैंक कर्मचारी 21 व 26 दिसंबर को हड़ताल कर चुके हैं। पिछले 20 दिनों में यूनियनों के आह्वान पर तीसरी बार यह हड़ताल हो रही है।
इनका रहा समर्थन
8 व 9 जनवरी की इस दो दिवसीय हड़ताल को फाइनेंसियल सेक्टर की कई यूनियनें आल इंडिया बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन, आल इंडिया इंश्योरेंस एंप्लाइज एसोसिएशन, जनरल इंश्योरेंस एंप्लाइज एसोसिएशन, बैंक एंप्लाइज फेडरेशन, आल इंडिया एलआईसी एंप्लाइज फेडरेशन,आल इंडिया ग्रामीण बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन, आल इंडिया ग्रामीण बैंक एंप्लाइज कांग्रेस, नेशनल फेडरेशन आफ आरबीआई एंप्लाइज, नेशनल फेडरेशन आफ आरबीआई आफिसर एसोसिएशन, आल इंडिया ग्रामीण बैंक आफिसर एसोसिएशन, आल इंडिया नाबार्ड, एंप्लाइज एसोसिएशन सहित विभिन्न संगठनों ने समर्थन दिया है।
इसके कारण मंगलवार को सरकारी बैंकों को छोड़कर 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों, सहकारी बैंकों के साथ ही सैकड़ों बीमा व डाक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इसका बैंकिंग सेवा पर व्यापक असर पड़ा। हड़ताल के दौरान भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारियों ने पंडरी स्थित मुख्य कार्यालय परिसर में धरना दिया।
वहीं बैंक कर्मचारियों ने देना बैंक परिसर में एकत्रित होकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। सभा को छत्तीसगढ़ बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन के महासचिव शिरीश नलगुंडवार, बैंक एंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव डीके सरकार, एसके वाणी, चंद्रप्रकाश वाणी, देवेकर शर्मा, ट्रेड यूनियन एसोसिएशन के संयोजक एचपी साहू, हर्ष विष्ट, बीके निमाणी, शक्ति सिंह ने संबोधित किया।
श्रमिक विरोधी नीतियों की आलोचना
सभी ने केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि बैंक देश की अर्थ व्यवस्था को सुदृढ़ करने अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार बैंकों के विलय, पेंशन व श्रम कानूनों में बदलाव कर कर्मचारियों के दमन का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि बैंकों में नियमित नियुक्ति के बजाय आउट सोर्सिंग से काम चलाया जा रहा है। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है। महंगाई को नियंत्रित करने सरकार पूरी तरह विफल रही है, जिसके कारण देश का आम किसान, मजदूर त्रस्त है।
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि देश में जितनी भी लड़ाई जीती गई है, उसमें बाहुबल के बजाय आर्थिक आधार महत्वपूर्ण रहा है। वे देश की अर्थव्यस्था की नीव हैं। निश्चित रूप में इस लड़ाई में उनकी जीत होगी। उन्होंने मांग पूरी होने तक अपना संघर्ष जारी रखने की बात कही।
लटके रहे ताले
हड़ताल के कारण मंगलवार को अधिकतर बैंकों के ताले नहीं खुले। वहीं कुछ बैंक खुले भी तो वहां अधिकारी कर्मचारी के नहीं आने से कामकाज पूरी तरह ठप रहा। जीवन बीमा व जनरल इंश्योरंस कर्मियों की हड़ताल के कारण वहां भी कोई काम नहीं हुआ।
इसके कारण यहां लेनदेन, चेक क्लीयरेंस का काम नहीं हुआ। बैंकों के एटीएम में नकदी भी नहीं डाली गई। इसके कारण अधिकतर एटीएम खाली हो गए थे और लोगों को नकदी के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा था। बुधवार को भी हड़ताल होने के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।
स्टेट बैंक एटीएम में रहा दबाव
बैंक हड़ताल में स्टेट बैंक के अधिकारी, कर्मचारी शामिल नहीं हैं। इसके कारण यहां कामकाज सामान्य दिनों की तरह चला। बैंक के एटीएम में नकदी भी डाले गए। इसके चलते स्थिति यह रही कि दूसरे बैंकों के एटीएम से रुपए नहीं निकलने पर पूरा दबाव स्टेट बैंक के एटीएम पर आ गया था। यहां कई जगह रुपए निकालने लोगों की लंबी कतार भी देखी गई।
जारी रहेगा संघर्ष
केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा। उनकी मंशा आम नागरिकों को परेशान करने की बिल्कुल नहीं है, लेकिन उनका विरोध देश व जनहित में है। सरकार को उनकी मांगों को लेकर शीघ्र सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
- शिरीश नलगुंडवार, महासचिव, बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन
प्रभावित हुआ कारोबार
बैंक हड़ताल के कारण एटीएम से रुपए निकालने लोगों को दिक्कत हुई। चेक क्लीयरेंस नहीं होने से बाजार में पैसा नहीं आया। इससे सामान्य लेनदेन के साथ ही कारोबार पर भी असर पड़ा।
- जितेन्द्र बरलोटा, अध्यक्ष, छग चैंबर आफ कामर्स
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