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जल नहीं जहर पी रहे इस गांव के लोग, सुध लेने वाला कोई नहीं

धमतरी जिले के नाथूकोन्हा गांव में जिंदगी देने वाला जल ही आज जहर बन गया है। गांव के लोग सालों से हैंडपंप से निकलने वाला आयरन का गंदा लाल पानी पीने को मजबूर हैं जो इन ग्रामीणों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है।

जल नहीं जहर पी रहे इस गांव के लोग, सुध लेने वाला कोई नहीं

धमतरी जिले के नाथूकोन्हा गांव में जिंदगी देने वाला जल ही आज जहर बन गया है। गांव के लोग सालों से हैंडपंप से निकलने वाला आयरन का गंदा लाल पानी पीने को मजबूर हैं जो इन ग्रामीणों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है।

जिले के मुरुम​सिल्ली बांध के किनारे बसे वनांचर नाथूकोनहा गांव के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। पीने का साफ पानी नहीं मिलने के कारण मजबूरी में हैंडपंपों से निकलने वाले आयरनयुक्त लाल पानी पी रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि इसकी शिकायत ग्रामीणों ने कहीं नहीं कि या संबंधित अधिकारी इस बात से अंजान हैं। हद तो यह है अधिकारी यहां आते हैं, परेशानी सुनते हैं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता। हालांकि ग्रामीणों की जरुरतों को देखते हुए प्रशासन द्वारा गांव में पम्प लगाया गया है लेकिन मौजूदा समय में वह भी काम नहीं कर रहा है।

गौरतलब है नाथूकोन्हा मुरूमसिल्ली बांध के किनारे और सघन वनों के बीच बसा है। यहां की आबादी 300 से ज्यादा हैं गांव में बारिश खत्म होने के साथ पेयजल संकट गहरा गया है। गांव वाले सुबह लाल पानी बर्तनों में भरते हैं जो शाम होते-होते काला हो जाता है।

गांव में साफ पानी सिर्फ उन लोगों के यहां आता है जिनके घर मोटर पंप लगा हुआ है। साफ पानी के लिए ग्रामीणों को अपने पड़ोसियों से जिनके यहां मोटरपंप लगा है मांगना पड़ता है। कई बार तो वह भी साफ पानी देने से मना कर देते हैं।

गांव वालों का कहना है कि साफ पानी के लिए उन्हें काफी लंबी दूरी का सफर तय करना पड़ता है। इन परिवारों की मानें तो हर साल गर्मी आते ही सारे हैंडपंप सूख जाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें दूर तक सफर तय करना पड़ता है।

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