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ऑटो चालकों की आमदनी शून्य, 2 महीने से भरनी पड़ रही हैं किस्तें

ऑटो रिक्शा यूनियन ने जीवनयापन करने सरकार से मांगी मदद राशि। पढ़िए पूरी खबर-

ऑटो चालकों की आमदनी शून्य, 2 महीने से भरनी पड़ रही हैं किस्तें
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रायपुर। कोरोना महामारी की वजह से किये गये लॉकडाउन ने ऑटो रिक्शा (Auto rikshaw) कारोबार का दिवाला निकाल दिया है। राज्य भर में 45 दिनों से ऑटो रिक्शा के पहिए की रफ्तार थम गई है, जिससे संचालकों की करीब 2 करोड़ रुपए की आमदनी चौपट हो गई। यही नहीं, ऑटो रिक्शा का संचालन रुकने से करीब 60 हजार ऑटो चालकों के सामाने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं लॉकडाउन में फाइनेंसर अपनी मासिक किस्तों की वसूली भी कर रहे हैं, जिससे लाखों रुपए का संचालकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। लॉकडाउन ने इस कारोबार की ऐसी कमर तोड़ी है, दोबारा ऑटोरिक्शा के संचालन शुरू होने के बाद भी कारोबार को पटरी पर लौटने में छह महीने लग जाएंगे।

दरअसल रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में 20 मार्च से ऑटोरिक्शा का संचालन बंद है। इन्हीं ऑटोरिक्शा से 60 हजार चालकों के परिवारों को दो वक्त की रोटी भी नसीब होती थी, लेकिन कारोबार के रुकने से अधिकांश चालकों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।

ऐसे समझें कारोबार का नुकसान

ऑटो रिक्शा संचालकों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में करीब 40 हजार ऑटो रिक्शा संचालित हैं। इनमें 12 हजार ऑटो रायपुर जिले में संचालित होते हैं। प्रत्येक ऑटो से रोज 600 से 700 रुपए की आमदनी होती है। इस हिसाब से प्रत्येक महीने ऑटो से 20 हजार रुपए से अधिक की आमदनी होती थी। 45 दिनों में करीब 30 हजार रुपए की आमदनी होती थी यानी 40 हजार ऑटो के संचालकों को डेढ़ महीने में लगभग 2 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

लॉकडाउन में किस्त भी वसूली

संचालकों के मुताबिक लॉकडाउन में फाइनेंस ऑटो की किस्त वसूली पर रोक नहीं लगी। राज्यभर में संचालित ऑटोरिक्शा में करीब 60 फीसदी फाइनेंस पर ली गई हैं, जिनकी प्रत्येक महीने 8 हजार रुपए की किस्त जमा होती है यानी बगैर आमदनी दो महीने की 16 हजार रुपए किस्त भी संचालकों ने जमा की है। इस हिसाब से लॉकडाउन में बतौर किस्त लाखों रुपए ऑटो संचालकों ने जमा किया है।

आर्थिक सहायता मांगने सरकार से फरियाद

रायपुर ऑटो-टैक्सी चालक यूनियन के अध्यक्ष कमल पांडेय ने बताया कि 40 हजार ऑटो चालकों व ऋणदाता कंपनियों द्वारा मासिक किस्त के भुगतान पर रोक लगाने सीएम भूपेश बघेल से फरियाद की गई है। उन्होंने कहा, कनार्टक, दिल्ली और यूपी में चालकों के परिवार को दो वक्त का निवाला देने सरकार ने 5 हजार रुपए आर्थिक सहायता की गई है। उसी तरह छत्तीसगढ़ के चालकों को आर्थिक मदद दिए जाने से राहत मिलेगी। इसे लेकर यूनियन की तरफ से पत्र लिखा गया है।

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