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परीक्षा में पूछाः मोदी सरकार को चुनाव में कौन से मुद्दे उठाने चाहिए?

पत्रकारिता विश्वविद्यालय की प्रायोगिक परीक्षा में मोदी सरकार से संबंधित प्रश्न पूछे जाने से छात्र बिफर गए हैं। छात्रों का आरोप है कि किसी पार्टी विशेष से छात्रों को जोड़ने के लिए इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

परीक्षा में पूछाः मोदी सरकार को चुनाव में कौन से मुद्दे उठाने चाहिए?
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कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय की प्रायोगिक परीक्षा में मोदी सरकार से संबंधित प्रश्न पूछे जाने से छात्र बिफर गए हैं। छात्रों का आरोप है कि किसी पार्टी विशेष से छात्रों को जोड़ने के लिए इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

पत्रकारिता विवि के विज्ञापन एवं जनसंचार विभाग के अंतर्गत प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में यह प्रश्न पूछा गया। प्रायोगिक परीक्षा में छात्रों से मोदी सरकार के चुनाव प्रचार के लिए मुद्दे और पांच सूत्र पूछे गए।

छात्रों का कहना है कि इस तरह के सवालों का पत्रकारिता के अध्ययन में स्थान नहीं होना चाहिए। इस तरह के सवालों के जरिए पत्रकारिता के विद्यार्थियों को किसी विशेष विचारधारा से जोड़ने का प्रयास हो रहा है। एनएसयूआई ग्रामीण अध्यक्ष हनी सिंह बग्गा ने प्रश्नपत्र को रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित की जाने की मांग की है।
विश्वविद्यालय के अन्य छात्र भी इस प्रश्न पर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा है कि विश्वविद्यालय को सियासत का ठिकाना नहीं बनना चाहिए। ऐसे लाेगों को अब सुधर जाना चाहिए।
पर्यवेक्षक आए थे
वहीं पूरे मामले से विश्वविद्यालय ने पल्ला झाड़ लिया है। केटीयू प्रबंधन का कहना है कि प्रायोगिक परीक्षाओं के प्रश्न उनके द्वारा तय नहीं किए जाते। उन्होंने छात्रों से यह प्रश्न नहीं पूछा, इसके लिए बाहर से पर्यवेक्षक आते हैं। आने वाले पर्यवेक्षक ही यह तय करते हैं कि प्रायोगिक परीक्षाओं में कौन से प्रश्न छात्रों को दिए जाएंगे। छात्रों की लिखित आपत्ति अब तक प्राप्त नहीं हुई। प्रश्न की जांच की जाएगी। यदि इस सवाल में कोई गलती पाई जाती है, तो जांच की जाएगी।
यह था प्रश्न
1. मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस वर्ष आम चुनाव होने हैं, भाजपा को चुनाव प्रचार के लिए किन मुद्दों को और किस प्रकार उठाना चाहिए? पांच सूत्र बताएं।
2. गंगा की सफाई पूरे देश में चल रही है। यह हमारी आस्था का मसला भी है। गंगा की सफाई के बारे में अखबार में विज्ञापन देना है। उसे तैयार कीजिए।
ब्लैकलिस्टेड करेंगे
यदि प्रश्न में आपत्ति पाई जाती है, तो प्रायोगिक परीक्षा को ब्लैक लिस्टेड करेंगे। दोबारा परीक्षा लेने उस पर्यवेक्षक को नहीं बुलाया जाएगा।
- प्रो. मानसिंह परमार, कुलपति, पत्रकारिता विवि
विश्वविद्यालय का काम सियासत करना नहीं है, ना विश्वविद्यालय किसी को जिताने के गुर सिखाने का ठिकाना होना चाहिए। ऐसी घटनाएं शिक्षण संस्थानों की गरिमा कम करती हैं। किसी पार्टी के प्रचारक बनने वालों को हम आगाह करते हैं कि वे सुधर जाएं।
आरपी सिंह, प्रवक्ता छत्तीसगढ़ कांग्रेस

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