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अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टर्स के नाम एक और उपलब्धि, प्रदेश में पहली बार क्लूमैटिक क्लोथोरेक्स नामक बीमारी का किया उपचार

सड़क हादसे में शिकार होने के बाद युवक के फेफड़े में पानी भरने लगा था जिससे उसके सीने में जोरों का दर्द होने लगा था। वह कई अस्पतालों में जांच करवातेे घूमने के बाद आंबेडकर अस्पताल के एसीआई पहुंचा।

अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टर्स के नाम एक और उपलब्धि, प्रदेश में पहली बार क्लूमैटिक क्लोथोरेक्स नामक बीमारी का किया उपचार

सड़क हादसे में शिकार होने के बाद युवक के फेफड़े में पानी भरने लगा था जिससे उसके सीने में जोरों का दर्द होने लगा था। वह कई अस्पतालों में जांच करवातेे घूमने के बाद आंबेडकर अस्पताल के एसीआई पहुंचा। यहां के डाक्टरों ने उसकी जांच की और उसकी सफल सर्जरी कर युवक को इस परेशानी से निजात दिला दिया।

डाक्टरों के मुताबिक युवक को क्लूमैटिक क्लोथोरेक्स नामक बीमारी थी जिसके कारण उसके फेफड़े में ही दो से तीन लीटर पानी भर जाता था। युवक का वजन सत्तर से घटकर चालीस किलो तक पहुंच गया था। उसका आपरेशन पूरी तरह सफल हुआ और अस्पताल से उसकी एक-दो दिनों में छुट्टी होने वाली है।

एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के डा. केके साहू ने बताया कि पिथौरा में रहने वाला मरीज चार माह पहले एक सड़क हादसे में गंभीर रुप जख्मी हुआ था। कुछ समय बाद अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठने लगा था। वहां इलाज के लिए कुछ निजी और शासकीय अस्पताल कराने के बाद वह आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट पहुंचा था।
डाक्टरों के मुताबिक युवक का एक्स-रे किया गया तो इस बात का खुलासा हुआ था कि उसके फेफड़े में दो से तीन लीटर पानी भर जाता हैं जिसके वजह से उसे सीने में असहनीय पीड़ा होती थी और वह लगातार कमजोर हो रहा था जो उसके लिए खतरनाक हो सकता था। युवक की जांच के बाद एसीआई के डाक्टरों की टीम ने युवक की जांच के बाद इस बात का फैसला लिया कि उसकी सर्जरी की जाए। पिछले दिनों डा. साहू और उसकी टीम ने मिलकर युवक का आपरेशन किया जो सफल हुआ।

लगातार कम हो रहा था वजन

डा. केके साहू ने बताया कि जब युवक इलाज के लिए आंबेडकर अस्पताल पहुंचा था तो वह काफी कमजोर हो चुका था। उसका शरीर लगतार कमजोर हो रहा था। कुछ समय पहले वह सत्तर किलो का था मगर बीमारी के शुरुआत होने के बाद उसका वजन घटकर चालीस किलो गया था। डाक्टर के मुताबिक अगर वह शीघ्र ही अपना इलाज नहीं करवाता तो उसके स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक हो जाता।

ऐसे हुआ इलाज

मरीज के फेफड़े में तरल पदार्थ मलाई की तरह जम रहा था। इसके साथ वह मरीज के खून में भी मिल रहा था जो उसके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा था। डाक्टरों ने इसे ध्यान में रखते हुए में मरीज की सर्जरी का निर्णय लिया। सफल सर्जरी के सात दिन तक मरीज को आब्जर्वेशन में रखने के बाद छुट्टी देने की तैयारी है।
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