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रायपुर में भी उठा ''लाभ पद मामला'', कांग्रेस ने पूछे सवाल, संसदीय सचिवों ने दिए ये मजेदार जवाब

रायपुर में संसदीय सचिव मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने सरकार पर हमला करते हुए पूछा, जब संसदीय सचिव दिल्ली में अयोग्य हैं, तो छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं?

रायपुर में भी उठा

संसदीय सचिव मामले में कांग्रेस ने एक बार फिर रायपुर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने सरकार पर हमला करते हुए पूछा, जब संसदीय सचिव दिल्ली में अयोग्य हैं, तो छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं? उन्होंने कहा, दिल्ली में संसदीय सचिवों का पद लाभ का है। उन्हें मिलने वाली सुविधाएं जनता पर बोझ है। फिर छत्तीसगढ़ में समान पद भाजपा की नजर में लाभ का पद क्यों नहीं है? सिर्फ इसलिए कि यहां संसदीय सचिव के रूप में उनके दल के विधायक उपकृत हो रहे हैं?

शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा, दिल्ली के समान छत्तीसगढ़ में भी 11 संसदीय सचिवों को न सिर्फ बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनकी विधानसभा की सदस्यता भी समाप्त की जानी चाहिए। संसदीय सचिवों को अयोग्य किए जाने पर भाजपा सरकार अल्पमत में आ जाएगी। भाजपा सरकार ने अपनी पूरी प्रशासनिक और राजनैतिक ताकत इसे नहीं होने देने में लगा रखी है। यही ताकत यदि नियमों का पालन करने में लगाई होती, तो आज 11 संसदीय सचिवों का निर्वाचन अवैध होने की नौबत ही नहीं आती। इस मामले में कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। राज्यपाल को भी आवेदन दिया था। अगर यह आवेदन चुनाव आयोग को भेज दिया गया होता, दिल्ली से पहले छत्तीसगढ़ का फैसला आ जाता।

छत्तीसगढ़ पर फैसला क्यों नहीं

शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा, अगर दिल्ली के संसदीय सचिव अयोग्य हैं, तो छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिव अयोग्य क्यों नहीं? दिल्ली में तो हमने भी आप के विरुद्ध चुनाव लड़ा था। भाजपा ने भी चुनाव लड़ा था, लेकिन दिल्ली में चुनाव आयोग से फैसला संसदीय सचिवों के खिलाफ आ जाता है। छत्तीसगढ़ में सभी संबंधित फोरम में पहल और आवेदन करने के बावजूद संसदीय सचिवों के मामले में फैसला क्यों नहीं आ रहा, यह बहुत बड़ा सवाल है।

वहीं छत्तीसगढ़ में भी 11 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने को लेकर विपक्ष के तेवर हमलावर हैं। इस बीच संसदीय सचिवों का कहना है, उन्हें अब तक कोई महत्वपूर्ण काम ही नहीं दिया गया। प्रारंभिक दिनों में तो फाइलें आती भी थीं, लेकिन अब तो फाइलों का आना भी बंद हो गया। लाभ के नाम पर सिर्फ वाहन ही मिल रहा है। जहां तक बंगले और निज सचिवों का सवाल है, विधायकों को बंगले के लिए राशि दी जाती है। उस राशि में शासकीय बंगलों से अच्छे घर में रहा जा सकता है। विधायकों को निज सचिव भी दिया जाता है।

हरिभूमि से बातचीत में हाईकोर्ट के फैसले और लगातार उठ रहे सवालों को लेकर संसदीय सचिवों की पीड़ा झलकी। हालांकि अधिकतर संसदीय सचिवों का कहना है, हम अपने मन से संसदीय सचिव नहीं बने। शासन द्वारा हमें जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में अगर न्यायालय से हटाने का फैसला होता है या शासन द्वारा हटने कहा जाता है, तो कोई समस्या नहीं होगी। वैसे भी बीते दिनों आए आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिव मंत्री की तर्ज पर काम नहीं कर रहे। उनका काम विधानसभा सत्र के दौरान सिर्फ मंत्रियों को सहयोग करने तक सीमित रह गया है।

ऐसे झलकी पीड़ा, फायदा नहीं नुकसान

अपने मन से हम संसदीय सचिव नहीं बने। शासन द्वारा जिम्मेदारी दी गई है। जिस दिन पद छोड़ने कहा जाएगा, छोड़ देंगे। जहां तक फायदे का सवाल है, इससे आर्थिक रूप से तो नुकसान ही है। विधायकों को मिलने वाला भत्ता हमें नहीं मिलता। हमें शासकीय आवास मिलता है, तो घर के लिए विधायकों को भी 30 हजार की राशि मिलती है। (लखन देवांगन, संसदीय सचिव)

न फाइलें आतीं, न साइन करते

संसदीय सचिवों के संबंध में हाईकोर्ट का निर्णय सर्वमान्य होगा। जहां तक लाभ की बात है, तो हम मंत्री की तर्ज पर काम ही नहीं कर रहे। न हमारे पास फाइलें आती हैं, न साइन करते हैं। मंत्रियों को सहयोग करने कहा गया है, तो उन्हें सहयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त कोई विशेष काम नहीं कर रहे हैं। जो हाईकोर्ट का निर्देश आएगा, उसे मानेंगे। (तोखन साहू, संसदीय सचिव)

कोई काम ही नहीं मिला

संसदीय सचिव के रूप में हमें कोई काम ही नहीं मिला। पहले वर्ग 3 और 4 की फाइलें आने की बात कही गई थी, वह भी नहीं आई। सुविधा के नाम पर वर्तमान में सिर्फ वाहन मिला है। स्वेच्छानुदान पर पहले ही रोक लगा दी गई है। जिस दिन पद से हटने कहा जाएगा और वाहन वापस करने कहा जाएगा, कर देंगे। हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। (गोवर्धन मांझी, संसदीय सचिव)

जो फैसला आएगा मानेंगे

हाईकोर्ट में संसदीय सचिवों के संबंध में सुनवाई जारी है। सबके वकील वहां सुनवाई की प्रक्रिया में लगे हैं। लाभ के रूप में सिर्फ वाहन की सुविधा जारी है। संसदीय सचिव के रूप में शासकीय काम तो पहले ही नहीं मिला। इस संबंध में यही कहा जा सकता है कि शासन के निर्देश या हाईकोर्ट के फैसले का हम पूरी तरह पालन करेंगे। (रूपकुमारी चौधरी, संसदीय सचिव)

स्वेच्छानुदान भी बंद

संसदीय सचिव होने के नाते बंगला गाड़ी मिली है। कमोबेश यही सुविधाएं विधायकों को भी मिलती हैं। पहले जनता के लिए स्वेच्छानुदान का अधिकार था, अब यह भी बंद हो गया। जहां तक कामकाज की बात है, विधानसभा में जो कार्य सौंपे जाते हैं, हम उनका निर्वहन करते हैं। इस संबंध में हाईकोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वह हमें पूरी तरह स्वीकार होगा। (लाभचंद बाफना, संसदीय सचिव)

टीएस बोले- हटाए जाने चाहिए संसदीय सचिव

हरिभूमि से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा, छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिवों को गोपनीयता की शपथ दिलाकर उनके समक्ष दस्तावेज भेजे जाते हैं। उन्हें वेतन और अन्य सुविधाएं शासन से प्रदान की जाती हैं, जबकि संविधान में सिर्फ तीन प्रकार के मंत्रियों का ही उल्लेख है। इसलिए यहां उनकी नियुक्तियों पर सवाल उठ रहे हैं और हटाने की मांग हो रही है। जहां तक दिल्ली की बात है, वहां के संदर्भ में फैसला लिया गया, तो उम्मीद है कि सीईसी यहां के लिए भी उसी तरह का फैसला करेंगे।

भूपेश ने कहा, हमें न्याय की पूरी उम्मीद

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने संसदीय सचिवों के मामले में दूसरे दिन भी ट्वीट कर निशाना साधा। उन्होंने कहा, आप के विधायकों को अयोग्य करार दिया जा सकता है, तो छत्तीसगढ़ के भाजपा विधायकों को क्यों नहीं? यहां तो मामला लाभ के पद का भी है और कोर्ट के आदेश के बावजूद सुविधाओं का लाभ उठाने का भी। हमें न्याय की पूरी उम्मीद है, उच्च न्यायालय में भी और जनता की अदालत में भी। इससे पहले उन्होंने अपने बैक टू बैक दो ट्वीट में राज्यपाल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए थे।

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