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141 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में छत्तीसगढ़ में GST इंटेलिजेंस की पहली बड़ी कार्रवाई, दो कारोबारियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल

141 करोड़ के फर्जी बिल घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ में जीएसटी इंटेलिजेंस ने पहली बड़ी कार्रवाई की है. दो कारोबारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.

141 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में छत्तीसगढ़ में GST इंटेलिजेंस की पहली बड़ी कार्रवाई, दो कारोबारियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल
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मनोज नायक, रायपुर. 141 करोड़ के फर्जी बिल घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ में जीएसटी इंटेलिजेंस ने पहली बड़ी कार्रवाई की है. दो कारोबारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. कारोबारियों ने 21 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी की थी. कूटरचित दस्तावेज के जरिये 12 फर्मों से 141 करोड़ रुपए के माल की खरीदी दिखाई थी.

बता दें कि लोहा कारोबारी आयुष गर्ग ( 26) एव संतोष अग्रवाल (56) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. रायपुर स्थित लोहा कारोबारी के मेसर्स श्याम सेल्स कार्पोरेशन नामक फर्म के खिलाफ जांच चल रही थी. इसी के तहत कार्रवाई हुई है. जांच में इस फर्म के द्वारा फर्जी बिल के आधार पर व्यापक जीएसटी (ITC) के द्वारा भारी घोटाल उजागर हुआ है.
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जांच से संबंधित और भी अई दस्तावेजों की खंगाला जा रहा है. निकट भविष्य में विभाग द्वारा इस प्रकार की कर चोरी में लिप्त कइ अन्य संस्थाओं के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी. बताया जा रहा है कि इस संबंध में आने वाले दिनों में रायपुर के कई लोहे के कारोबारियों के खिलाफ छापेमारा की कार्यवाही की जाएगी.
दरअसल ITC का मतलब माल के खरीद से समया चुकाया गया कर, जिसे आउटपुट पर टैक्स देने के समय अपने इनपुट टैक्स से एडजस्ट क सकते हैं जो अपने मला खरीदते समय चुकाया है.
उक्त फार्म में खरीदी ओडिशा की ऐसी 12 फर्स से अपने एकाउंट्स में दर्शाया है जो कि अस्तित्व में नहीं है. कुल 149 करोड़ के स्टील आइटम जैसे टीएमटी, चैनल्स आदि की खरीदी दर्शाई है, जिसमें 21 करोड़ रुपए का जीएसटी शामिल है. ऐसी फर्जी खरीद के आधार पर पार्टी ने गैर कानूनी रूप से करीब 21 करोड़ रुपए का ITC हासिल कर और भी कई अन्य व्यापारियों को पारित किया.
खरीदी से संबंधित बिल खंगालने पर कर चोरी उजागर हुआ. इसमें पता चला कि जिन गाड़ियों के माध्यम से संबंधित माल के परिवहन को दर्शाया गया है. असल में उसमें से कई दुपहिया वाहन प्रत्यक्ष रुप से इतना भारी माल जैसे 20-25 टन लोहे के परिवहन में असक्षम हैं.
ओडिशा से रायपुर राज्यमार्ग स्थित टोल से उपलब्ध जानकारी के अनुसार पाया गया कि जिन वाहनों से माल परिवहन जिस समय संबंधित बिल में दर्शाया है, असल में ये सभी वाहन उस मार्ग में स्थित उस टोल से गुजरे ही नहीं थे.
जब अधिकारियों ने पार्टी के बैंक अकाउंट स्टेटमेंट्स भी खंगाले गए, जिसमें उजागर हुआ कि इस खरीद का भुगतान संबंधित पार्टियों को नहीं किया गया लेकिन कई बार पार्टियों को भुगतान किए गए जिनसे उनका असल में किसी भी प्रकार का व्यापार नहीं हुआ.
इस तरह इस फर्म में कुछ महीनों में फर्जी व्यापारिक गतिविधियों के जरिए और जीएसटी ITC की सुविधा का दुरुपयोग कर केंद्रीय राजस्व खजाने को लगभग 21 करोड़ की कर हानि पहुंचाई.
इस चोरी के खिलाफ आरोपियों के विरुद्ध जीएसटी अपवंचन का मामला दर्ज किया गया. उचित कार्यवाही को अंजाम देते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया. जहां दोनों आरोपियों को दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
जांच में उजागर हुआ कि ओडिशा की 12 कंपनियों के द्वारा जारी किए गए सभी बिल फर्जी हैं. आरोपियों ने भी इस क्रम में फर्जी व्यापारिक सौदे या लेनदेन अंरार्जीय होने कारण जांच वर्तमान में भी जारी है और इस जीएसटी अपवंचन की राशि और अधिक होने की संभावना है.

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