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छत्तीसगढ़ के 35 हजार ऑटो चालक भूखमरी की कगार पर, कंधे पर लोन का भी बोझ

प्रदेश में पांच सौ से ज्यादा सिटी बसों के संचालन पर भी लगा ब्रेक। पढ़िए पूरी खबर-

छत्तीसगढ़ के 35 हजार ऑटो चालक भूखमरी की कगार पर, कंधे पर लोन का भी बोझ
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प्रतीकात्मक चित्र

रायपुर। प्रदेश के 35 हजार ऑटो रिक्शा (Auto Rikshaw) घरों में लॉक हो गए हैं। 40 दिनों से एक पैसे की कमाई न होने से ऑटो चालक परेशान हैं कि उनकी रोजी-रोटी कैसे चलेगी। आगे 15 दिनों तक और कमाई का कोई रास्ता नहीं है। 17 मई के बाद लॉकडाउन (Lockown) खुलेगा या नहीं, यह भी तय नहीं है। ज्यादातर ऑटो बैंकों से लोन लेकर खरीदे गए हैं। इनकी किस्तों को लेकर भी सब परेशान हैं। इसी के साथ 500 से ज्यादा सिटी बसें भी बंद हैं। इनकी कमाई पर भी ब्रेक लग गया है।

कोरोना के कहर ने सबकी कमर तोड़ दी है। हर वर्ग इससे प्रभावित है। छोटे से लेकर बड़ा काम करने वाले इसकी चपेट में आए हैं। परिवहन व्यवस्था भी पूरी तरह से चौपट है। यात्री वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। इसी कड़ी में ऑटो रिक्शा (Auto Rikshaw) भी नहीं चल रहे हैं। ऑटो चालक तो रोज कमाने-खाने वाले हैं। इनकी कमाई पर पूरी तरह से ब्रेक लगने के कारण ये परेशान हो गए हैं।

राजधानी में 10 हजार

सबसे ज्यादा परेशानी में राजधानी रायपुर के ऑटो चालक हैं, क्योंकि यहीं सबसे ज्यादा 10 हजार ऑटो चलते हैं। इसके अलावा भिलाई में करीब पांच हजार, कोरबा में तीन हजार, बिलासपुर और रायगढ़ में दो-दो हजार, जगदलपुर में डेढ़ हजार और अन्य जिलों में दो से पांच सौ तक ऑटो चलते हैं। अब तो ई-रिक्शा भी आ गए हैं। इनकी संख्या भी हजारों में है।

दो हजार तक का धंधा रोज

ऑटो चलाने वालों का रोज का धंधा एक से दो हजार का होता है। इसमें से डीजल और किस्तों का खर्च निकालकर इनको चार से आठ सौ तक की कमाई हो जाती है। इसी कमाई से इनका घर चलता है, लेकिन पिछले 40 दिनों से एक पैसे की कमाई न होने के कारण इनके सामने घर-परिवार पालने का संकट खड़ा हो गया है। इसी के साथ लोन में लिए गए ऑटो की किस्तों को लेकर भी चिंता है कि उनका क्या होगा।

पांच सौ सिटी बसें भी प्रभावित

ऑटो के साथ सिटी बसों का संचालन भी बंद है। रायपुर में सबसे ज्यादा दो सौ सिटी बसें चलती हैं। इसके अलावा दुर्ग-भिलाई में 115, बिलासपुर और कोरबा में 60-60, रायगढ़ और अंबिकापुर में 40-40 और जगदलपुर में 15 बसें चलती हैं। रायपुर के कन्हैया सिटी बस आपरेटर के मैनेजिंग डायरेक्टर सलाम रिजवी का कहना है, रायपुर में मंत्रालय में चलने वाली बसों के वाहन चालक और कंडेक्टरों को मार्च का वेतन दे दिया गया है, अब अप्रैल माह के वेतन को लेकर परेशानी है। अन्य स्थानों पर भी यही समस्या है।

छत्तीसगढ़ ऑटो महासंघ के संयोजक कमल पांडेय ने बताया कि- 'उत्तरप्रदेश और दिल्ली में ऑटो चालकों के खाते में वहां की सरकारों ने पांच-पांच हजार रुपए तत्काल डाले हैं। यहां भी प्रदेश सरकार को ऐसी मदद करनी चाहिए। अगर सरकार मदद नहीं करेगी तो आटो चालकों का घर नहीं चल पाएगा। हमने सरकार से मदद की मांग की है, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला है।'

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