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छत्तीसगढ़ / मंत्री बनने के रेस में शामिल 17 विधायक, बन सकते हैं सिर्फ 13 मंत्री

सोमवार को छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उनके शपथ लेने के बाद कांग्रेस का 15 साल का वनवास खत्म हो गया है। अब कैबिनेट गठन को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। मंत्री बनने की रेस में 17 विधायक शामिल है। लेकिन सिर्फ 13 मंत्री बन सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं कि कौन-कौन है रेस में।

छत्तीसगढ़ / मंत्री बनने के रेस में शामिल 17 विधायक, बन सकते हैं सिर्फ 13 मंत्री
सोमवार को छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उनके शपथ लेने के बाद कांग्रेस का 15 साल का वनवास खत्म हो गया है। अब कैबिनेट गठन को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। मंत्री बनने की रेस में 17 विधायक शामिल है। लेकिन सिर्फ 13 मंत्री बन सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं कि कौन-कौन है रेस में।
चरणदास महंत
चरणदास महंत मुख्यमंत्री पद के चार दावेदारों में से एक थे। महंत चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष रहे। केंद्रीय मंत्री रह चुके महंत को प्रशासन का काफी अनुभव भी है। वहीं चरणदास महंत पूर्व में मध्यप्रदेश में गृहमंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
ताम्रध्वज साहू
ताम्रध्वज साहू मुख्यमंत्री पद के चार प्रबल दावेदारों में से एक थे। साहू ओबीसी वर्ग के बड़े नेता हैं। ओबीसी का एक बड़ा वोट बैंक उनके पास है। मंत्रिमंडल में जगह देकर उनके समर्थकों को संदेश दिया जा सकता है। खास बात यह है कि उन्होंने सांसद के पद से इस्तीफा देकर विधायक का चुनाव लड़ा है।
टीएस सिंहदेव
टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री पद के चार दावेदारों में से एक थे। सिंहदेव सरगुजा के राज परिवार से ताल्लुक रखते हैं। सिंहदेव ने सरगुजा संभाग में जीत के लिए रणनीति बनाई और यहां से 14 विधानसभा सीटों में बड़ी जीत हासिल भी की। सिंहदेव की अगुवाई में कांग्रेस ने चुनाव घोषणा पत्र तैयार किया जो राज्य में प्रचंड जीत का आधार बना।

सत्यनारायण शर्मा
सत्यनारायण शर्मा दिग्विजय सिंह और अजीत जोगी की सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उनका लंबा सियासी अनुभव है और सबको साथ में चलने वाले उनके इस व्यक्तित्व के चलते उनका नाम विधानसभा स्पीकर के रूप में विचार किया जा रहा है।

रविंद्र चौबे
रविंद्र चौबे को पीडब्लूडी और जनसंपर्क विभागों के कामकाज का अनुभव है। संसदीय कार्यों और उनके लंबे सियासी अनुभव के मद्देनजर विधानसभा स्पीकर के रूप में उनके नाम की भी चर्चा की जा रही है।
कवासी लखमा
घारे नक्सल प्रभावित इलाके से ताल्लुक रखने वाले कवासी लखमा लगातार चौथी बार विधायक बने हैं। अभी वे सदन में उपनेता प्रतिपक्ष के पद पर हैं और उनकी काफी छवि काफी आक्रामक नेता की रही है।
अमरजीत भगत
सरगुजा संभाग में कांग्रेस को 14 में से 14 सीट दिलाने में अमरजीत भगत का काफी बड़ा हाथ है। अमरजीत प्रभावशाली आदिवासी नेता हैं।
धनेंद्र साहू
धनेंद्र साहू पूर्व में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और अजीत जोगी की सरकार में मंत्री रहे हैं। राज्य में अच्छी खासी आबादी वाले साहू समाज के नेता हैं जो प्रदेश की राजनीति का रूख मोड़ देती है।
शिव डहरिया
शिव डहरिया सतनामी समाज के बड़े नेता हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
अमितेष शुक्ल
अमितेष शुक्ल जोगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और इस बार 58 हजार से ज्यादा वोट से चुनाव जीता है। उनके पार्टी आलाकमान से भी अच्छे संबंध हैं।
उमेश पटेल
उमेश पटेल एक युवा चेहरा हैं। वे दिवंगत नेता नंदकुमार पटेल के बेटे भी हैं। पटेल ने हाईप्रोफाइल भाजपा के उम्मीदवार और पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी को चुनाव हराया है।

खेलसाय सिंह
खेलसाय सिंह अनुभवी विधायक हैं और सरगुजा संभाग से ताल्लुक रखते हैं। मंत्री पद की दौड़ में उनकी भी मजबूत दावेदारी मानी जाती है।

मोहम्मद अकबर
मोहम्मद अकबर अनुभवी विधायक हैं और पार्टी का अल्पसंख्यक चेहरा हैं। अकबर ने मुख्यमंत्री के शहर कवर्धा से सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है।
अरुण वोरा
अरुण वोरा कांग्रेस हाईकमान के सबसे करीबी राष्ट्रीय महामंत्री प्रशासन मोतीलाल वोरा के बेटे हैं। इसके अलावा अरुण अनुभवी विधायक हैं और दुर्ग शहर से चुनाव जीता है।

प्रेमसाय टेकाम
प्रेमसाय टेकाम 6 बार विधायक चुनाव जीत चुके हैं। वे जोगी सरकार में कृषि मंत्री रह चुके हैं। टेकाम की आदिवासी समाज में अच्छी पकड़ हैं और सरगुजा में काफी प्रभावशाली हैं।
लखेश्वर बघेल
लखेश्वर बघेल दूसरी बार विधायक चुने गए हैं और आदिवासी समाज में उनका खासा प्रभाव है। उनकी मिलनसार और साफ व्यक्ति की छवि है।
अनिला भेड़िया
आदिवासी समाज से ताल्लुक रखने वाली अनिला भेड़िया लगातार दूसरी बार विधायक बनी हैं। मंत्री पद के लिए महिला कोटे से उनकी दावेदारी मानी जा रही है।
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