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सरकार की जांच में खुलासा :ये है प्लास्टिक चावल का सच

छतीसगढ़ सरकार ने प्लास्टिक चावल के करीब 20 सैंपल लेकर उनकी जांच करवाई जिससे साफ हो गया है कि प्लास्टिक का चावल कहीं नहीं मिला है।

सरकार की जांच में खुलासा :ये है प्लास्टिक चावल का सच
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iiiiiiiiसोशल मीडिया में पिछले करीब एक माह से लगातार यह बात प्रचारित हो रही है कि प्लास्टिक से बना चावल बाजार में खपाया जा रहा है।

यह चावल खाकर लोग बीमार हो रहे हैं। सोशल मीडिया के अलग प्लेटफार्म पर इस तरह की सूचनाएं व वीडियो लगातार सामने आने से अफवाह का माहौल बन गया था।
राज्य शासन ने संदिग्ध किस्म के चावल के करीब 20 सैंपल लेकर उनकी जांच करवाई तो यह साफ हो गया है कि प्लास्टिक का चावल कहीं नहीं मिला है।
प्रदेश की खाद्य सचिव ऋचा शर्मा ने गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेस में कहा कि यह कोरी अफवाह है। उन्होंने दावा किया की पीडीएस सिस्टम के चावल में किसी प्रकार की मिलावट नहीं हो सकती।
केस-1 गरियाबंद जिले से खबर आई कि वहां सरकारी राशन दुकानों से गरीबों को जो चावल दिया जा रहा है उसमें प्लास्टिक का बना चावल भी हैं। बताया गया कि यह चावल खाने से कई लोग बीमार पड़ गए। यही नहीं कुछ लोगों ने पके हुए चावल का गोला बनाया उसे जमीन पर पटकने से वह प्लास्टिक की गेंद की तरह उछलने लगा।
केस-2 कोरबा में एक जज को शक हुआ कि चावल में प्लास्टिक के तत्व मिले हुए हैं। बताया गया है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इस मामले की जांच भी करवाई। मामला खारिज हो गया।
केस-3 पूर्व गृहमंत्री तथा भानुप्रतापुर के कांग्रेस विधायक मनोज मंडावी ने फेसबुक पर लिखा है कि उन्होंने प्लास्टिक का बना चावल पकड़ा है।
राज्य शासन के अधिकारियों ने गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेस में यह साफ किया है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 27 में से 20 जिलों में चावल के सैंपल की जांच कराई। कहीं भी प्लास्टिक का चावल नहीं मिला।
इसके बाद भी सरकार ने तया किया है कि हर 6 महीने में चावल की जांच प्रयोगशाला में नियमित रूप से कराई जाएगी।
खाद्य सचिव के अनुसार तेलंगाना, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक में प्लास्टिक चावल कि ख़बर छपी थी जो अफवाह थी।
छत्तीसगढ़ में 96 स्थानों से नमूने लिए गए थे जिसमें से 80 के नतीजे आ गए हैं लेकिन नतीजों में कोई भी चावल प्लास्टिक का नहीं पाया गया।
इससे पहला गरियाबंद, कोरबा दुर्ग, कांकेर, महासमुंद, जशपुर, जांजगीर चांपा में प्लास्टिक चावल की शिकायत आई थी।
खाद्य सचिव ने दावा किया है कि सरकारी पीडीएस सिस्टम में बंटने वाले चावल में प्लास्टिक की मिलावट हो ही नहीं सकती।
कस्टम मिलिंग के बाद एफसीआई या नान में जो चावल जमा किया जाता है, उसकी नियमानुसार जांच की जाती है।
किसी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर चावल के लॉट निरस्त किए जाते हैं। अगर पिछले एक साल की बात की जाए तो करी 85 हजार लॉट चावल की जांच की गई।
इनमें से 1700 लॉट को इसलिए निरस्त किया गया कि वह मानक पर खरा नहीं उतरा।
एफसीआई के अधिकारी भी मानते हैं कि छत्तीसगढ़ के चावल की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है।

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