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चार लाशें जलाने का खर्च 55 हजार

प्रत्येक लाश का दाह संस्कार करने में अधिकतम तीन क्विंटल लकड़ी खर्च होती है।

चार लाशें जलाने का खर्च 55 हजार
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करोड़ों रुपए खर्च कर मारवाड़ी श्मशान घाट के पास बनाया गया विद्युत शवदाह गृह पांच साल से बंद है। विद्युत शवदाह गृह में चार लावरिस लाशों को जलाने में 55 हजार रुपए की बिजली खर्च होने के कारण इसे बंद कर दिया गया। दोबारा गैस सिलेंडर से दाह संस्कार शुरू किया गया है, लेकिन सालभर में यह सिस्टम फेल हो गया।

मशीनों की खराबी की मरम्मत नहीं की जा सकी। जिस संस्था को इसकी जिम्मारी सौंप गई थी, उसने भी खर्च का बजट देख रिपेयरिंग कराने में हाथ खड़े कर दिए। महीनों वेतन का इंतजार करने के बाद ऑपरेटर से लेकर चौकीदार तक चले गए।

अब हालात यह हैं कि शवदाह गृह की खिड़की और पंखे गायब हो गए हैं। दीवारें जर्जर हो गई हैं। परिसर में चारो तरफ झाड़ियां लगी हुई हैं।

दरअसल छह साल पहले वीरभद्रनगर स्थित मारवाड़ी श्मशान घाट के पास विद्युत शवदाह गृह को आरडीए ने बनवाया था। उम्मीद थी कि लकड़ी के बजाए बिजली से शवों का दाह संस्कार सस्ते में होगा।

इसके लिए बिजली और गैस से संचालित होने वाली मशीनें लगाई गईं, लेकिन यह सिस्टम सालभर भी नहीं टिक सका और करोड़ों रुपए बर्बाद हो गए।

बगैर शव जलाए 45 हजार का बिजली बिल

जानकारी के मुताबिक विद्युत शवदाह गृह का पहले महीने में 45 हजार रुपए बिजली का बिल आया। दूसरे महीने में सिर्फ चार लावारिश शवों का दाह संस्कार किया गया, लेकिन उसका बिजली बिल 55 हजार रुपए आया, जबकि 4 लाशों को जलाने में अधिकतम 10 हजार रुपए ही खर्च होगा।

नगर निगम और आरडीए ने भी बिल का भुगतान करने से हाथ खड़े कर लिए। इसके बाद इसे बंद कर दिया गया।

गैस सिलेंडर भी था महंगा

गैस सिलेंडर से लाशों को जलाने की मशीनें लगाई गईं। इसमें एक बार में 24 गैस सिलेंडर लगाकर दाह संस्कार शुरू किया जाता था। एक शव को जलाने में 27 किग्रा गैस लगती थी।

यहां साल भर में लगभग 340 शवों का दाह संस्कार किया गया, लेकिन मशीन में खराबी आ गई और उसे बंद कर दिया गया। संस्था ने हीटर और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की रिपेयरिंग करने से मना कर दिया।

पांच का स्टॉफ था तैनात

विद्युत शवदाह गृह संचालित करने के लिए एक मशीन ऑपरेटर, दो कर्मचारी, एक चौकीदार समेत पांच के स्टॉफ की तैनाती हुई थी, लेकिन वेतन न मिलने की वजह से चार कर्मचारी एक महीने बाद ही चले गए, जबकि चौकीदार सात महीने तक काम करता रहा। उसे भी वेतन नहीं मिलने पर ताला बंद कर चला गया।

शव जलाने में इतना अंतर

जानकारों का मानना है कि प्रत्येक लाश का दाह संस्कार करने में अधिकतम तीन क्विंटल लकड़ी खर्च होती है।

एक क्विंटल लकड़ी 8 सौ रुपए में मिलती है, जबकि पांच सौ रुपए की कंडी लगती है। ऐसे में कुल 3 हजार रुपए के लगभग लकड़ी पर खर्च होता है। वहीं एक शव को जलाने में 27 किग्रा गैस खर्च होती है। ऐसे में डेढ़ से दो हजार रुपए खर्च होगा।

जल्द लगेंगी नई मशीनें

रायपुर डेवेलपमेंट अथारिटी, सीईओ, एमडी कावरे विद्युत शवदाह गृह के लिए शासन से 50 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई है। वहां मशीनें और अन्य सामान नया लगाया जाएगा। इसकी प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।

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