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अनोखा दशहरा: यहां मारते नहीं बल्कि पूजते हैं रावण को, करते है अमृत तिलक

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 30 2017 2:49AM IST
अनोखा दशहरा: यहां मारते नहीं बल्कि पूजते हैं रावण को, करते है अमृत तिलक

जिले की ग्राम ग्रामपंचायत हिर्री में 3 दिन की रामलीला की तैयारी जोरों से चल रही है। आयोजन का आगाज आज से चालू हुआ है। 

इस छोटे से गांव की खास बात ये है कि गांव हिर्री में रावण को जलाया नहीं जाता। बल्कि भगवान राम अंतिम युद्ध के समय रावण की मूर्ति की नाभि पर तीर चलाते है। 

मंच पर हो रही रामलीला का रावण मूर्ति की नाभि में तीर लगते ही मंच की पीछे चला जाता है। रावण का पुतला बना कर दहन नहीं किया जाता।

रावण की मूर्ति सजाते हैं रामचंद्र –

यह भी अनोखा संयोग की कहा जायेगा कि हिर्री में रावण की मूर्ति की सजावट हर साल गांव का कलाकार चित्रकार रामचंद्र नामक का व्यक्ति करता है। 

इस साल भी वह अपने कार्य में मनोयोग से जुट गया है। रावण को राम द्वारा बनाना और रावण दहन की परम्परा नहीं होना इस गांव के त्यौहार को खास बनाता है।

ऐसे मनाते है दशहरा हिर्री में–एक ओर दशहरा पर्व पर जहां पूरे देश में रावण का दहन किया जाता है वहीं गा्रम हिर्री में पीढी दर पीढी अनोखी प्रथा चल रही है जिसमें गांव में रावण का दहन नहीं किया जाता। 

वल्कि दशहरा स्थल पर रावण लगभग 40 साल से ज्यादा पुरानी मूर्ति का सजाया व संवारा जाता है और उसकी नाभि में मिटटी का एक बर्तन रख कर लाल रंग भर कर रखा जाता है।

रावण की नाभि के अमृत से करते है तिलक – एक हिर्री ग्रामवासी युवक जीतू साहू ने बताया कि रावण की मूर्ति पर भगवान राम दशहरा के समय तीर से प्रहार करते है। 

इस प्रहार से रावण की नाभि में पहले से रखे गये मिटटी की बर्तन में रखा रंग बिखर जाता है। 

किवदंती के अनुसार रावण की नाभि में अमृत होने की बात पर इसी रंग को गांव वाले इसे अमृत मानते हैं। 

भगवान राम के तीर के प्रहार से मिट्टी बर्तन फूटने से निकले रंग को गा्रमीण सहेज लेते है और इस अमृत से मस्तिक पर तिलक लगाते है। जिसे अमृत तिलक कहा जाता है। इस रंग से तिलक करने की होड मच जाती है।

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