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छत पर बनाएं बिजली खरीदेगी सरकार

सरकार के इस फैसले के बाद लोग अपने घरों की छत पर लगे सौर ऊर्जा के 10 किलोवाट क्षमता के रूफ टॉप ग्रिड (पावर सप्लाई सिस्टम) से जोड़े जाएंगे।

छत पर बनाएं बिजली खरीदेगी सरकार

छत्तीसगढ़ सरकार के एक फैसले से प्रदेश में सभी लोगों को यह सुविधा मिल गई है कि अब घर की पक्की छत पर सोलर माध्यम से बिजली बनाकर घर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। यही नहीं, बची हुई बिजली ग्रिड में जाएगी, जिसकी एक तयशुदा कीमत आपको मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के लिए अगले दस साल के लिए तैयार की गई नई सौर ऊर्जा नीति का अनुमोदन किया गया। सरकार के इस फैसले के बाद लोग अपने घरों की छत पर लगे सौर ऊर्जा के 10 किलोवाट क्षमता के रूफ टॉप ग्रिड (पावर सप्लाई सिस्टम) से जोड़े जाएंगे।

यह व्यवस्था दरअसल ग्रीन पावर का उपयोग व उत्पादन बढ़ाने वाली है। राज्य में इससे पहले 2002 में इस संबंध में जो नीति बनी थी, करीब 15 साल के अंतराल में यह न केवल पुरानी हो गई थी, बल्कि इसमें व्यापक बदलाव आवश्यक हो गया था।

सरकार ने तय किया है कि नई सौर ऊर्जा नीति (2017-27) के तहत 10 किलोवॉट तक के रूफ टॉप, सोलर पॉवर प्लांट को ग्रिड कनेक्टिविटी की सुविधा दी जाएगी।

हर सौर ऊर्जा विद्युत परियोजना द्वारा संयंत्र की स्वय की खपत और राज्य के भीतर की गई केप्टिव खपत पर विद्युत शुल्क से भुगतान की छूट मिलेगी। यह छूट मार्च 2027 तक स्थापित होने वाली परियोजनाओं को मिलेगी।

ये हुआ है बदलाव

पुरानी नीति के तहत सौर माध्यम से तैयार बिजली को ग्रिड से जोड़ने के लिए कम से कम 50 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता का संयंत्र आवश्यक था।

इसकी वजह से छोटे स्तर पर बिजली पैदा कर उसे ग्रिड से जोड़ने की व्यवस्था नहीं थी। यही कारण था कि छोटे स्तर पर ग्रीन ऊर्जा के उत्पादक बिजली बेचने के लिए पात्र नहीं हो पाते थे।

अब राज्य सरकार ने अगले 10 साल के लिए जो नीति बनाई है, उसमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि दस किलोवाट क्षमता वाले रूफ टॉप भी ग्रिड से जुड़ सकेंगे।

ऐसे काम करेगा यह सिस्टम

अगर कोई व्यक्ति अपने घर की छत पर 10 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा का संयत्र (रूफटॉप) लगाता है, तो उसके द्वारा उत्पादित बिजली ग्रिड से जाकर जुड़ेगी।

उत्पादित बिजली का एक वह अपने घर पर इस्तेमाल कर सकता है, इसके अतिरिक्त बची हुई बिजली ग्रिड में जाएगी।

इसका हिसाब ऑटोमेटिक मीटर से होगा कि कितनी बिजली ग्रिड में गई। जितनी बिजली ग्रिड में जाएगी, उसके हिसाब से तय रेट पर रकम मिलेगी। सूत्रों के अनुसार रूफटॉप की बिजली की खरीद दर सामान्य तौर पर पारंपरिक बिजली के मुकाबले आधी होती है।

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