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सक्सेस मंत्र: इन आठ बातों पर करें गौर, अवश्य मिलेगी सफलता

जीवन में हर कोई सफल होना चाहता है, इसके लिए वह प्रयास भी करता है। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग असफल हो जाते हैं। ऐसे में समझ नहीं आता कि चूक कहां रह गई। सफलता के लिए जरूरी बातों की महत्ता बताती एक प्रेरक कहानी।

सक्सेस मंत्र: इन आठ बातों पर करें गौर, अवश्य मिलेगी सफलता

जीवन में हर कोई सफल होना चाहता है, इसके लिए वह प्रयास भी करता है। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग असफल हो जाते हैं। ऐसे में समझ नहीं आता कि चूक कहां रह गई। सफलता के लिए जरूरी बातों की महत्ता बताती एक प्रेरक कहानी।

संतोषपुर में बहुत बड़े विद्वान, चिंतक, प्रेरक और सलाहकार आचार्य प्रकाश पधारे थे। उनके आने के समाचार से नगर के बड़े-बूढ़ों से ज्यादा युवाओं में उत्साह था। आचार्य प्रकाश देशभर में घूम-घूम कर नगर-नगर सलाह/मार्गदर्शन शिविर लगाते थे। उनके सलाह शिविर बच्चों और युवकों में अत्यंत चर्चित थे।

संतोषपुर के युवा भी बड़ी संख्या में उनके सलाह-शिविर में उमड़ पड़े। युवकों के एक बड़े समूह ने समवेत स्वर में उनसे विनती की, ‘आचार्य! जीवन में सफलता नहीं मिली, तो कुछ नहीं मिला। इसलिए कृपा करके हमें सफलता के कुछ सूत्र बताएं।’

आचार्य प्रकाश मुस्कुराए और उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली में धारा प्रवाह बोलना शुरू किया, ‘दोस्तों! सुनने का अधिक प्रयत्न करें। कभी-कभी सुअवसर बहुत धीमे से आपका द्वार खटखटाते हैं। सफलता के लिए आठ आवश्यक बातें जान लें। इन पर गौर करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी।

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करें खुद पर भरोसा

पहला कदम है खुद पर भरोसा। किसी काम की सफलता के लिए जी-तोड़ मेहनत से पहले आपको खुद पर भरोसा होना चाहिए कि आप काम को अंजाम तक पहुंचा सकेंगे। कोई भी संघर्ष करना पड़े, आप चढ़ते रहें यह सोचकर कि शिखर सिर्फ एक कदम आगे है।

बढ़ाते रहें योग्यता

दूसरा कदम है योग्यता। एक सफल और असफल व्यक्ति में योग्यता का अंतर ही सबसे प्रमुख अंतर होता है। योग्यता की पूंजी हमेशा बढ़ती है, इसलिए ज्ञान इकट्ठा कीजिए और उसे दूसरों में बांटिए। आपका यह गुण आपसे कोई नहीं छीन सकता।

योजना से बढ़ें आगे

तीसरा कदम है योजना। यदि आपको खुद पर भरोसा है और आप योग्य भी हैं, लेकिन काम का तरीका व्यवस्थित नहीं है तो न तो जिंदगी व्यवस्थित होगी और न ही दिनचर्या। यदि आप खुद के लिए आवश्यक योजना तैयार करेंगे, तो सफल जरूर बन सकते हैं।

बदलाव को रहें तैयार

चौथा कदम है बदलाव। जमा पानी सड़ने लगता है और बहता पानी निर्मल बना रहता है, सफल लोगों की जिंदगी का भी यही दर्शन होता है कि वे बदलाव को सहजता से लेते हैं। आप अच्छे बने रहें लेकिन एक जगह पर ही स्थिर न बने रहें। बदलाव समय की ही नहीं, व्यक्तित्व की भी मांग है। यदि आप नहीं बदलेंगे तो समय और आस-पास के लोग बदल जाएंगे और आप फिर पीछे रह जाएंगे।

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चुनौती स्वीकारें

पांचवां कदम है चुनौती स्वीकारना। जो लोग चुनौती लेने से घबराते हैं, सफलता भी उनसे उतना ही कतराती है। कभी न गिरना कोई उपलब्धि नहीं। गिरने के बाद उठना उपलब्धि है। कहा गया है कि आप चाहे जितनी बार गिरें अगर उससे एक बार ज्यादा उठने की चुनौती स्वीकार कर लेते हैं, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

सामूहिक भावना

छठवां कदम है सामूहिकता की भावना यानी टीम वर्क। यदि आप टीम वर्क और साझेदारी से कोई काम करते हैं, तो न सिर्फ आप सफल होते हैं बल्कि आपको प्रतियोगिता के कारण अपने गुणों को निखारने का अच्छा अवसर भी मिलता है।

व्यवहार कुशलता

सातवां कदम है व्यवहार कुशलता। आपका व्यवहार ही सफलता की गारंटी देता है, लेकिन व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे किसी को तकलीफ न पहुंचे। अपनी आदत बना लें कि हर इंसान के साथ अच्छा बर्ताव करें।

भय से रहें मुक्त

आठवां कदम है निर्भयता। अधिकांश लोग किसी काम को शुरू किए बिना ही भयग्रस्त हो जाते हैं। यह भय वास्तव में असफलता का कम और सोच का ज्यादा होता है। अधिकांश लोग भय की कल्पना से ही इतने प्रभावित हो जाते हैं कि किसी काम को हाथ में लेने से पहले ही हार मान लेते हैं।

आपको यह भी समझना होगा कि सफल लोग किसी खास किस्म के नहीं होते और न ही इन्हें ईश्वर द्वारा कोई शक्ति मिलती है। वे तो बस प्रयास करने में विश्वास रखते हैं, डरने में नहीं। याद रहे, कठिन समय नहीं टिकता, लेकिन कठिन व्यक्ति जरूर टिकता है।

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