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9वीं एवं 11वीं की कक्षाओं के लिए खुले स्कूल, कोरोना के भय से छात्रों की उपस्थिति कम

हरियाणा में बोर्ड की परीक्षाओं के बाद सोमवार को 9वीं और 11वीं के विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं के लिए भी स्कूलों के द्वार खुल गए। बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों की तरह इन दो कक्षाओं के अधिकांश विद्यार्थियों ने भी स्कूलों से दूरी बनाई रखी। बेहद कम संख्या में विद्यार्थी स्कूल पहुंचे।

9वीं एवं 11वीं की कक्षाओं के लिए खुले स्कूल, कोरोना के भय से छात्रों की उपस्थिति कम
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हरियाणा स्कूल (प्रतीकात्मक फोटो)

हरियाणा में बोर्ड की परीक्षाओं के बाद सोमवार को 9वीं और 11वीं के विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं के लिए भी स्कूलों के द्वार खुल गए। बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों की तरह इन दो कक्षाओं के अधिकांश विद्यार्थियों ने भी स्कूलों से दूरी बनाई रखी। बेहद कम संख्या में विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। कई स्कूलों में तो कक्षाएं ही नहीं लग पाई।

दरअसल कोरोना के कारण स्कूल बंद कर दिए गए थे। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की गई। हालांकि कोरोना का प्रभाव तो कम नहीं हुआ लेकिन लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को खोलने की कवायद शुरू हो गई। नवंबर की शुुुरुआत मे स्कूल 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोले गए। लेकिन जब विद्यार्थियों के पाजिटिव होने के मामले सामने आए तो फिर से स्कूल बंद कर दिए।

अब पिछले सप्ताह 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोले गए। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए सोमवार से 9वीं और 11वीं की नियमित कक्षाएं शुरू कर दी गईं। चेहरे पर मास्क लगाए हुए विद्यार्थियों को थर्मल स्क्रीनिंग और हाथ सेनिटाइज करने के बाद ही प्रवेश दिया गया। विद्यार्थियों के हेल्थ सर्टिफिकेट व परिजन अनुमति पत्र देखे गए।

सरकारी स्कूल की छात्रा नेहा ने कहा कि वह काफी दिनों से स्कूल खुलने का इंतजार कर रही थी। हालांकि ऑनलाइन पढ़ाई जारी थी लेकिन स्कूल में लगने वाली नियमित कक्षाओं में ही सही पढ़ाई होती है। अच्छे से समझ आता है। वह अब नियमित स्कूल आएगी।

बोर्ड के विद्यार्थियों की तरह इन कक्षाओं के विद्यार्थी भी पहले दिन स्कूलों से दूर ही रहे। सरकारी और निजी स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम रही। कहीं दस विद्यार्थी आए तो कहीं 15 तक संख्या सिमट गई। इनमें से भी कुछ विद्यार्थी हेल्थ सर्टिफिकेट नहीं लाए थे। यही वजह रही कि स्कूलों में ये कक्षाएं सुचारू नहीं हो पाई।

उधर शहर के निवासी राजकुमार ने कहा कि पिछले महीने जब स्कूल खुले थे तो कई विद्यार्थी कोरोना पाजिटिव मिले। अभी कोरोना का प्रकोप कम नहीं हुआ है। ऐसे में बच्चों का जीवन जोखिम में नहीं डाला जा सकता।

ऑनलाइन पढ़ाई बेहतर विकल्प है। वहीं राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्या तारावंती ने कहा कि कोरोना के चलते अभिभावकों के मन में डर है। लेकिन धीरे-धीरे छात्र संख्या बढ़ जाएगी। इसके अलावा ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प भी जारी रहेगा। जो विद्यार्थी स्कूल नहीं आना चाहते वे ऑनलाइन पढ़ सकते हैं।

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