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देश में हैं अभी कुल 27 सैनिक स्कूल, 2021-22 से लड़कियों के लिए भी शुरु होगी दाखिला प्रक्रिया

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए स्पष्ट कर दिया कि शैक्षणिक सत्र 2021-22 से चरणबद्ध ढंग से सैनिक स्कूलों (Sainik Schools) में लड़कियों को भी दाखिला दिया जाएगा।

सैनिक स्कूलों में  शैक्षणिक सत्र 2021-22 से लड़कियों के लिए भी दाखिला प्रक्रिया शुरु होगीसैनिक स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2021-22 से लड़कियों के लिए भी दाखिला प्रक्रिया शुरु होगी

करीब दो साल के इंतजार के बाद आखिरकार अब वो घड़ी आ ही गई जब सैनिक स्कूलों ने हमेशा-हमेशा के लिए अपने दरवाजे लड़कियों के लिए खोलने का ऐलान कर दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को इससे जुड़े एक अहम प्रस्ताव को अपनी मंजूरी देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि शैक्षणिक सत्र 2021-22 से चरणबद्ध ढंग से सैनिक स्कूलों में लड़कियों को भी दाखिला दिया जाएगा।

मंत्रालय का यह निर्णय पूर्वोत्तरी राज्य मिजोरम के चिंगचिप में स्थित सैनिक स्कूल में वर्ष 2018 में शुरु किए प्रायोगिक प्रोजेक्ट की सफलता पर आधारित है। आंकड़ों के हिसाब से इस वक्त देश में कुल करीब 27 सैनिक स्कूल हैं, जिसमें हरियाणा के कुंजपुरा और रेवाड़ी का सैनिक स्कूल, मध्य-प्रदेश के रीवा का सैनिक स्कूल और छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर का सैनिक स्कूल भी शामिल है।

इंफ्रास्ट्रक्चर का हो निर्माण

रक्षामंत्री ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति देने के साथ ही संबंधित प्रशासनिक विभागों को इस बाबत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार कराने और महिला स्टाफ की नियुक्ति करने का निर्देश दे दिया है, जिससे लड़कियों की सैनिक स्कूलों में दाखिला लेकर पढ़ने के मार्ग में कोई बाधा न आ सके। सरकार की तरफ से यह निर्णय समान अवसर के सिद्धांत को बढ़ावा देने, लैंगिग समानता, सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में बताए गए आदर्श वाक्य की ख्याति को बढ़ाना है।

सेनाओं में बढ़ेगी भागीदारी

मिजोरम के चिंगचिप के सैनिक स्कूल के प्रधानाचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल राठौड़ ने हरिभूमि से बातचीत में कहा कि हमारे स्कूल में कक्षा छह से वर्ष 2018-19 के शैक्षणिक सत्र में इसे लेकर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरु किया गया था। जिसमें 6 लड़कियों ने दाखिला लिया था। इस बार यह सभी उत्तीर्ण होकर अगले सत्र 2019-20 के साथ सातवीं कक्षा में प्रवेश कर चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि पायलट प्रोजेक्ट मिजोरम से शुरु हुआ। क्योंकि देश में इस तरह की शुरुआत से ही लड़कियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। उनका थलसेना, वायुसेना और नौसेना में शामिल होने को लेकर रूझान बढ़ेगा। यह कार्य हमारे लिए चुनौतीपूर्ण नहीं था। लड़कियों के लिए स्कूल में अलग से छात्रावास और शौचालय बनाए गए। महिला वार्डन से लेकर सिक्योरिटी गार्ड और सफाईवाले की नियुक्ति की गई।

उन्होंने आगे कहा कि यह लड़कियां उत्तर-प्रदेश, बिहार, केरल और मिजोरम से प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर सैनिक स्कूल में पढ़ने के लिए चुनी गई थीं। स्कूल में लड़कों और लड़कियों में किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया गया। उन्हें भी लड़कों की तरह 5 बजे उठाया गया, साढ़े पांच बजे पीटी, 8 बजे से डेढ़ बजे तक कक्षाओं में पढ़ाई और उसके बाद गेम्स के सिस्टम जैसी समान ड्रिल का ही पालन कराया गया था।

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