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भारतीय रेलवे ने अपने कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, बच्चों को पढ़ाकर बनाएगी डॉक्टर

रेलवे हॉस्पिटल में डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए रेलवे ने अब रेल कर्मचारियों के बच्चों को पीएमटी और आगे की पढ़ाई कराने का निर्णय लिया है।

भारतीय रेलवे ने अपने कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, बच्चों को पढ़ाकर बनाएगी डॉक्टर

रेलवे हॉस्पिटल में डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए रेलवे ने अब रेल कर्मचारियों के बच्चों को पीएमटी और आगे की पढ़ाई कराने का निर्णय लिया है, ताकि रेल कर्मचारी-अधिकारी और उनके परिजन को सुविधा मिल सके।

रेलवे कर्मचारी और अधिकारियों के लिए सभी जोन अंतर्गत बड़े स्टेशनों और डिवीजन में रेल मंत्रालय ने केन्द्रीय रेल चिकित्सालय की सुविधा दे रखी है, लेकिन इस चिकित्सालय में डाक्टर रेलवे के नहीं होते हैं।

इसका कारण है कि रेलवे चिकित्सालय में डाक्टरों का वेतन कम होने की वजह से कोई भी ज्वाइन नहीं करना चाहता है, जिसके कारण रेलवे को कान्टेक्ट पर डाक्टरों को इमरजेंसी के दौरान बुलाना पड़ता है।

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इस तरह की परेशानी पूरे रेलवे के साथ बिलासपुर के केन्द्रीय रेलवे चिकित्सालय में है। यहां रेलवे के 4 से 5 डाक्टरों के अलावा बाकी डाक्टर जिला अस्पताल और सिम्स के रहते हैं, जो अपने मन मुताबिक कुछ समय के लिए हास्पिटल जाकर वापस आ जाते हैं।

डाक्टरों की मौजूदगी के दौरान बीमार रेल कर्मियों की भीड़ लगी रहती है। डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए अब रेलवे ने नया निर्णय लिया है। इसके लिए रेलवे कर्मचारी के ऐसे बच्चे जो बायोलॉजी में 12वीं की पढ़ाई कर चुके हैं और पीएमटी की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे बच्चों की जानकारी लेने के बाद रेलवे उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च वहन करेगी। बच्चों के डाक्टर बनने से रेल कर्मचारियों को भी फायदा होगा।

यूनियन की थी मांग

रेलवे केन्द्रीय चिकित्सालय में डाक्टरों की 80 फीसदी कमी है। डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए रेलवे ने कई बार विज्ञापन जारी किया, लेकिन वेतन कम होने के कारण किसी भी डाक्टर ने रेलवे चिकित्सालय जाने में कोई रूचि नहीं दिखाई।

इसके साथ ही पूर्व डाक्टरों ने भी रेलवे हास्पिटल को छोड़ दिया। इसे देखते हुए रेलवे के मान्यता प्राप्त यूनियन की ओर से मांग की गई थी कि बच्चों को चिकित्सक बनाए और रेलवे अस्पताल में नौकरी दें।

इस मांग को मानने के बाद ग्रुप सी और ग्रुप डी कर्मचारियों के बच्चों को डाक्टर बनते देखने का सपना पूरा होगा, जिसमें रेलवे कर्मचारियों के 70 फीसदी से अधिक अंक लाने वाले बच्चों को पीएमटी और डाक्टर की तैयारी कराई जाएगी।

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नाम के है केन्द्रीय चिकित्सालय

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोनल अंतर्गत रेलवे केन्द्रीय चिकित्सालय बिलासपुर में है, जहां बिलासपुर, नागपुर, रायपुर तीनों डिवीजन के 45 हजार से अधिक कर्मचारी और उनके परिवार इलाज के लिए पहुंचते हैं।

हास्पिटल में सारी सुविधा तो है, लेकिन डाक्टरों की कमी के कारण कर्मचारियों को निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है। पूर्व में रेलवे कर्मचारियों के लिए अपोलो से अनुबंध किया गया था, जिसके बाद अब किम्स में रेल हास्पिटल के मरीजों को रिफर कर दिया जा रहा है।

कर्मचारी को करना होगा आवेदन

रेल मंत्रालय के अनुसार इसमें कर्मचारियों को अपने बच्चों के भविष्य के बारे में स्वयं सोचना होगा, ताकि उनके बच्चे बीमार रेल कर्मचारियों और परिजन की सेवा कर सकें। बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाएगा।

इसमें 12वीं के उपरांत अगर बच्चे पीएमटी की परीक्षा देते हैं या उनका चयन होता है। इसके लिए आगे की पढ़ाई का वहन रेलवे करेगी। बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्मचारी को पहले से आवेदन करना होगा।

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10 वर्ष का अनुबंध

रेल कर्मचारियों के बच्चों को पीएमटी की पढ़ाई कराने के लिए भी रेलवे ने नियम बनाया हुआ है। डाक्टर बनने के बाद बच्चे को रेलवे के चिकित्सालय में ही कार्य करना होगा।

इसके लिए रेल कर्मचारी के बच्चों को अनुबंध करना होगा कि डाक्टर बनने के बाद वे देश में रेलवे के बताए अनुसार कहीं भी अपनी सेवा देने के लिए तैयार रहेंगे। इसके लिए करीब 10 वर्ष तक रेलवे में डाक्टर की नौकरी करनी होगी, जिसके लिए रेलवे उन्हें वेतन भी देगी।

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