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अब IIT में एडमिशन लेना होगा आसन, बिना कोचिंग के भी पास कर सकेंगे JEE एग्जाम

एचआरडी मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि विभाग ने इसके लिए कवायद शुरु कर दी है। प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र के स्वरुप में कुछ बदलाव किया जाएगा।

अब IIT में एडमिशन लेना होगा आसन, बिना कोचिंग के भी पास कर सकेंगे JEE एग्जाम

बीते दिनों आए आईआईटी-जेईई प्रवेश परीक्षा के नतीजों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

अब विभाग इससे संबंधित प्रश्नपत्र को ऐसा बनाए जाने के पक्ष में है, जिससे कोचिंग न करने वाले छात्रों के लिए भी आईआईटी में दाखिले की राह आसान हो सकेगी।

एचआरडी मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि इसके लिए विभाग ने कवायद शुरु कर दी है। हमारा विचार है कि प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र के स्वरुप में कुछ बदलाव किया जाए।

मसलन उसे पहले के मुकाबले कुछ सरल बनाया जाए। जिससे ज्यादा से ज्यादा संख्या में देश के सुदूर इलाकों में रहने वाले ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को भी आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला लेने का मौका मिल सके।

21 अगस्त की बैठक

मंत्रालय की योजना अब से करीब दो महीने बाद 21 अगस्त को होने वाली आईआईटी काउंसिल की बैठक के एजेंड़े में भी इस विषय को शामिल करने के अलावा सभी 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के प्रमुखों से इसपर विस्तार से चर्चा करने की है।

बैठक में उन बिंदुओं की तलाश भी की जाएगी, जिनकी मदद से प्रश्नपत्र को आसान बनाया जा सके। इस वर्ष यह पहला मौका होगा जब आईआईटी काउंसिल की बैठक होगी।

इसके एजेंड़े में आईआईटी संस्थानों में प्रतिशत के हिसाब से लड़कियों की संख्या में इजाफे से जुड़े एक अन्य बिंदु को भी शामिल किया जा सकता है।

अगले वर्ष 2019 में आईआईटी-जेईई की प्रवेश परीक्षा की तैयारी आईआईटी पाल नामक ऐप के जरिए छात्रों को कराए जाने की भी शुरुआत की जाएगी। इससे कोचिंग न करने वाले छात्रों को काफी फायदा मिलेगा।

2 फीसदी रहा परिणाम

आईआईटी काउंसिल की बैठक में प्रश्नपत्र पर चर्चा के विषय को शामिल करने के पीछे बीते दिनों आया जेईई-एडवांस का मुश्किल प्रश्नपत्र अहम वजह रहा है।

आंकड़ों के हिसाब से इस वर्ष कुल करीब 13 लाख छात्रों ने प्रवेश परीक्षा दी थी। इसमें से मात्र 18 हजार 138 छात्र ही एडवांस की परीक्षा पास कर आईआईटी संस्थानों में दाखिले के लिए योग्य साबित हुए। इसकी तुलना कुल परीक्षा परिणाम के साथ करने पर यह करीब 2 फीसदी रिजल्ट हुआ।

दोबारा जारी हुई मेरिट लिस्ट

इस वर्ष एचआरडी को जाइंट एडमिशन बोर्ड (जैब) को एक अन्य विस्तारित सूची निकालने का निर्देश देना पड़ा। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो इन प्रतिष्ठित संस्थानों में कई सीटें खाली रह जाने की आशंका थी।

गौरतलब है कि 23 आईआईटी संस्थानों में कुल करीब 12 हजार से अधिक सीटें हैं। बीते वर्ष 90 सीटें खाली रह गई थी।

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