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हायर एजुकेशन में सुधार के लिए बड़ा कदम उठाएगी मोदी सरकार, HEERA बिल का ड्राफ्ट तैयार

साल 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार हायर एजुकेशन के मामले में एक नया कदम उठाने जा रही है। सरकार ने संसद में देश में हायर एजुकेशन के लिए एक नई संस्था के गठन के लिए बिल लाने जा रही है।

हायर एजुकेशन में सुधार के लिए बड़ा कदम उठाएगी मोदी सरकार, HEERA बिल का ड्राफ्ट तैयार

साल 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार हायर एजुकेशन के मामले में एक नया कदम उठाने जा रही है। सरकार ने संसद में देश में हायर एजुकेशन के लिए एक नई संस्था के गठन के लिए बिल लाने जा रही है।सरकार ने इस बिल का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।

बिल के ड्राफ्ट में 'हायर एजुकेशन इवैल्यूएशन एंड रेगुलेशन अथॉरिटी, 2018 (एचईईआरए)'या 'हायर एजुकेशन रेग्युलेटरी काउंसिल (एचईआरसी)' के मुताबिक, एक बार नया रेग्युलेटर बन जाने के बाद अभी काम कर रही नियामक संस्थाएं जैसे यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) और नेशनल काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एनसीटीई) को खत्म कर दिया जाएगा।

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हीरा को मान्यता रद्द करने का होगा अधिकार

इस ड्राफ्ट बिल में बताया गया है कि नया रेग्युलेटर केवल ऐकडेमिक स्टैंडर्ड की व्याख्या नहीं करेगा बल्कि यह इंस्टिट्यूट का मार्गदर्शन करेगा। बिल में यह भी प्रावधान होगा कि किसी इंस्टिट्यूट द्वारा नियमों का पालन नहीं करने पर हीरा के पास उस संस्थान की मान्यता रद्द करने का भी अधिकार होगा।

सरकार में इस बिल पर चर्चा पूरी हो गई है और इसे प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जांचा जा रहा है। बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अप्रैल में एक 40 पॉइंट के एक्शन प्लान की घोषणा की थी जिसमें बताया गया था कि हीरा बिल सितंबर 2018 में संसद में पेश किया जाएगा।

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बिल में क्या है खास

नए नियामक हीरा बिल के मुताबिक, नई नियामक संस्था एजुकेशन इंस्टिट्यू्ट्स के लिए क्वॉलिटी स्टैंडर्ड का निर्धारण करेगी जिसमें इंस्टिट्यूट की परफॉर्मेंस का हर साल इवैल्युएशन होगा।

सूत्रों के मुताबिक, ऐकडेमिक स्टैंडर्ड्स के लिए यूजीसी द्वारा बनाई गई कई कमिटियों की अनुशंसाओं को भी हीरा में शामिल किया जाएगा। यूजीसी से उलट हीरा ऐसे इंस्टिट्यूट्स का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी करेगा जो निर्धारित स्टैंडर्ड्स को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

हीरा के स्टैंडर्ड को पूरा करने पर ही किसी इंस्टिट्यूट को केंद्र या राज्य सरकारों से मिलने वाले फंड मिल सकेंगे।

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छात्रों का रखेगी ख्याल

बिल के ड्राफ्ट को देखते हुए इस बात पर अभी भी डिबेट चल रही है कि स्टेट यूनिवर्सिटीज को कैसे हीरा के अंतर्गत लाया जाएगा। नए सिंगल रेग्युलेटरी संस्था में यूजीसी एक्ट से अधिक पावर दी जाएंगी।

यह संस्था किसी खास कोर्स में किसी इंस्टिट्यूट द्वारा नियमों का पालन नहीं करने पर स्टूडेंट्स को एडमिशन दिए जाने पर रोक लगा सकेगी। साथ ही, यह इंस्टिट्यूट में एडमिशन ले चुके छात्रों के हितों की रक्षा करते हुए, उसकी मान्यता रद्द कर सकेगा।

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कौन-कौन होगा हीरा में

बिल के मुताबिक, हीरा में 10 सदस्य होंगे और इसमें किसी प्रसिद्ध शिक्षाविद को चेयरमैन के तौर पर नियुक्त किया जाएगा जिनकी मदद के लिए 2 वाइस चेयरमैन होंगे। इसमें 3 मेंबर ऐसे होंगे जिन्होंने कम से कम 5 साल तक आईआईटी, आईआईएम, आईआईएससी, आईआईएसईआर जैसी संस्थाओं में बतौर डायरेक्टर काम किया हो।

इसके अलावा अन्य 3 सदस्य ऐसे होंगे जिन्होंने स्टेट या सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कम से कम 5 सालों तक वाइस चांसलर के तौर पर काम किया हो।

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