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मेट्रोलॉजी फील्ड में बनाईए अपना कॅरियर, मोटी सैलरी के साथ हैं जॉब्स के कई अवसर

मेट्रोलॉजी के तहत मौसम की भविष्यवाणी सहित वातावरण की विभिन्न गतिविधियां और उनके कार्य-कलापों का अध्ययन किया जाता है।

मेट्रोलॉजी फील्ड में बनाईए अपना कॅरियर, मोटी सैलरी के साथ हैं जॉब्स के कई अवसर

हर जीव पर बदलते मौसम का असर पड़ता है। मौसम की दशा के अनुसार हमारी बहुत सी गतिविधियां प्रभावित होती हैं। बाढ़, सूखा, सुनामी, मानसून, गर्मी और सर्दी जैसी तमाम जानकारियों का अनुमान मौसम वैज्ञानिक यानी मेटिओरोलॉजिस्ट ही अपने अध्ययन-विश्लेषण के आधार पर लगाते हैं। इसीलिए इनकी मांग अनेक विभागों और संगठनों में होती है। इस फील्ड में कैसे बनाएं करियर, विस्तार से जानिए।

आज की भाग-दौड़ वाली जिंदगी में मौसम की जानकारी होना वास्तव में बहुत फायदे की बात है। यही वजह है कि यह जानकारी देने के लिए न केवल मीडिया ने अलग से प्रबंध किए हैं, बल्कि कई इंटरनेट वेबसाइट्स भी मौसम से संबंधित जानकारियां प्रदान करती हैं। जाहिर तौर पर इन सबका स्रोत मेटिओरोलॉजी यानी मौसम विज्ञान है।

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एरिया ऑफ वर्क

मेटिओरोलॉजी के तहत मौसम की भविष्यवाणी सहित वातावरण की विभिन्न गतिविधियां और उनके कार्य-कलापों का अध्ययन किया जाता है। इन दिनों नवीनतम कंप्यूटर और सुपर कंप्यूटर की मदद से मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाया जाता है।

इंडियन मेटिओरोलॉजी डिपार्टमेंट देशभर में फैले अपने 600 केंद्रों के बड़े नेटवर्क की सहायता से मौसम संबंधी आंकड़े इकट्ठा कर एवं उनका विश्लेषण करके, हमें मौसम के बदलते मिजाज से अवगत कराता है। इसके अंतर्गत प्रकृति में हो रहे परिवर्तनों का अध्ययन और आकलन किया जाता है।

गौरतलब है कि मौसम विभाग पूर्वानुमान के जरिए परिवहन, दूरसंचार, रक्षा और विमानन क्षेत्र हेतु मौसम की संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराता है। दरअसल, इन सूचनाओं का महत्व तब और बढ़ जाता है, जब सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हमारा सामना होता है। मौसम विभाग से ही हमें सर्दी, बरसात, गर्मी, उमस, तूफान, चक्रवात तथा हवा के रुख से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं।

विमानों की उड़ान योजना और कार्यांवयन के लिए मौसम की पूरी जानकारी बहुत जरूरी है, इसलिए सभी हवाई अड्डों पर मौसम कक्ष होते हैं, जो समुद्र की स्थिति से आस-पास के लोगों, मछुआरों तथा जहाजों आदि को अवगत कराते हैं। सूचना क्रांति की वजह से सिमटती दुनिया में मेटिओरोलॉजी का अध्ययन आपको एक बेहतरीन करियर की डगर पर आगे बढ़ा सकता है।

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कोर्सेस-एंट्री प्रोसेस

मेटिओरोलॉजी की कई शाखाएं हैं, जिनमें से किसी में भी अध्ययन कर अच्छा करियर बनाया जा सकता है- क्लाइमेटोलॉजी, साइनोप्टिक मैटिओरोलॉजी, डायनेमिक मेटिओरोलॉजी, फिजिकल मेटिओरोलॉजी, एग्रीकल्चरल मेटिओरोलॉजी और अप्लाइड मेटिओरोलॉजी। जो युवा मेटिओरोलॉजी में पीजी डिप्लोमा कोर्स करना चाहते हैं, उनके पास भौतिकी और गणित विषयों के साथ स्नातक डिग्री होना जरूरी है।

उम्मीदवार की आयु कम से कम 17 वर्ष और अधिकतम 25 वर्ष निर्धारित है। मेटिओरोलॉजी कोर्सेस में उम्मीदवारों का चयन सामान्यत: प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है। यह परीक्षा अखिल भारतीय स्तर की होती है, जिसमें मेरिट के आधार पर विद्यार्थियों को विभिन्न राज्यों के कॉलेजों- विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिया जाता है।

प्रवेश परीक्षा का स्वरूप वस्तुनिष्ठ होता है। इसमें गणित,भौतिकी, रसायन, सामान्य अध्ययन, इतिहास, समसामयिक घटनाक्रम, भारतीय राजव्यवस्था आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस प्रवेश परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी है। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीजी लेवल पर मेटिओरोलॉजी कोर्स उपलब्ध हैं।

इसके अलावा आईआईटी भी मेटिओरोलॉजी में पीएचडी तथा अन्य उच्च स्तरीय कोर्स संचालित करती है। कई विश्वविद्यालय पीसीएम स्नातकों के लिए मेटिओरोलॉजी में एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करते हैं।

राष्ट्रीय कृषि आयोग की सिफारिश के अनुसार सभी राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर अनुसंधान संस्थानों में कृषि जलवायु विज्ञान में शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों को मजबूती प्रदान करने और तकनीकी कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए अलग से कृषि जलवायु विज्ञान विभाग स्थापित किए गए हैं।

यहां से रोजगारोन्मुखी कृषि मौसम विज्ञान पाठ्यक्रम किए जा सकते हैं। संघ लोक सेवा आयोग, इंडियन मेटिओरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) में ग्रेड-2 (मौसम विज्ञानी) की भर्ती हेतु प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है।

इस हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता भौतिकी, गणित, कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर डिग्री आवश्यक है। एस्ट्रोलॉजी विषय के साथ भौतिकी या गणित में मास्टर डिग्री धारक और एस्ट्रोफिजिक्स विषय के साथ विज्ञान में मास्टर डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। चुने गए छात्रों को आईएमडी, पुणे और नई दिल्ली में एक साल के एडवांस कोर्स से गुजरना होता है।

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स्पेशल कोर्स-कंटेंट

वर्तमान में एग्रीकल्चरल मेटिओरोलॉजी (कृषि मौसम विज्ञान)के क्षेत्र में रोजगार के असीमित अवसर हैं। कृषि मौसम विज्ञान अनुप्रयुक्त मौसम विज्ञान की एक शाखा है, जिसके अंतर्गत फसल पालन और पशु पालन पर मौसम के विभिन्न प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

इसका संबंध उपरोक्त क्षेत्रों के वातावरण की भौतिक प्रक्रियाओं के साथ है, जिसका दोहन स्थायी कृषि उत्पादन से संबंधित समस्याओं का समाधान करने में किया जाता है। कृषि मौसम वैज्ञानिकों को मृदा, जल, मौसम फसलों और कृषि से संबंधित मौसम वैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रशिक्षण दिया जाता है।

कृषि मौसम विज्ञान क्षेत्र में निम्न बातों का अध्ययन किया जाता है- प्रभावकारी फसल उत्पादन के लिए निर्दिष्ट क्षेत्र के संसाधनों का जलवायु विषयक अध्ययन, मौसम आधारित प्रभावकारी कृषि कार्य विकसित करना, विभिन्न मौसम पूर्वानुमानों और जलवायु पूर्वानुमानों का उपयोग करते हुए स्थायी फसल पैदावार सुनिश्चित करने के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श संगठनों का विकास करना, सभी प्रमुख फललों और पूर्वानुमानों में फसल-मौसम संबंध का अध्ययन करना, मौसम संबंधी मानदंडों और फसल कीटों तथा बीमारी, संक्रमणों के बीच संबंध कायम करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और मौसम से इतर फसलें उगाने के लिए विभिन्न तरीकों से सूक्ष्म जलवायु में परिवर्तन करना, कृषि के स्थायी विकास में सहायक प्रभावकारी एवं तीव्र प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए कृषि जलवायु तुल्यरूपों को परिभाषित करने के वास्ते कृषि जलवायु क्षेत्रों का निर्धारण करना, फसल मौसम आरेख और फसल मौसम कैलेंडर तैयार करना, जिससे किसानों को सुविधा पहुंचाई जा सके, विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में पैदावार क्षमता हासिल करने का मूल्यांकन करने के लिए फसल वृद्धि उत्प्रेरक मॉडल विकसित करना, प्रभावकारी सूखा प्रबंधन के लिए सूखे का फसलवार एवं क्षेत्रवार अध्ययन करना।

जॉब के अवसर

भारतीय मौसम विभाग में इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग, विद्युत, और रेलवे जैसे कुछ सार्वजानिक उपक्रमों में भी मौसम विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाती है। साथ ही सशस्त्र सेना, नौसेना और वायु सेना में भी मौसम संबंधित जानकारी के लिए मौसम वैज्ञानिकों की जरूरत होती है।

इसके अलावा ऐसे कई व्यापार हैं, जो अपने ज्यादातर निर्णय मौसम के आधार पर लेते हैं, वे भी मौसम वैज्ञानिकों की नियमित भर्ती करते हैं। कृषि मौसम वैज्ञानिक निजी और सरकारी एजेंसियों में अनुसंधान और विकास गतिविधियों में काम कर सकते हैं।

इन एजेंसियों के अंतर्गत केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, राष्ट्रीय दूरसंवेदन एजेंसी, विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग, खाद्य और कृषि संगठन आदि शामिल हैं।

निजी क्षेत्र के अंतर्गत कृषि मौसम वैज्ञानिक जल संभार प्रबंधन, कमान क्षेत्र और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में लगे स्वैच्छिक संगठनों सहित अनेक संगठनों में सलाहकार के रूप में काम कर सकते हैं।

सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसरों के अंतर्गत शिक्षण, अनुसंधान और विकास एवं विस्तार गतिविधियों में वैज्ञानिक, सहायक प्रोफेसर, अनुसंधान अधिकारी, विषय संबंधी विशेषज्ञों और कृषि मौसम वैज्ञानिकों के रूप में रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।

ये पद विभिन्न विश्वविद्यालयों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर, विज्ञान और प्रोद्यौगिकी विभाग आदि जो उच्चस्तरीय अनुसंधान, विकासात्मक विस्तार, परामर्श सेवाओं, आयोजन और नीति निर्माण गतिविधियों से संबद्ध हैं, में उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मेटिओरोलॉजिस्ट (मौसम वैज्ञानिकों)की मांग में भारी वृद्धि होगी।

प्रमुख संस्थान

सीसीएस हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

वेबसाइट-www.hau.ac.in

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर

वेबसाइट-www.igau.edu.in

दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

वेबसाइट-www.du.ac.in

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर

वेबसाइट-www.jnkvv.org

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर

वेबसाइट-www.gbpuat.ac.in

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलुरू

वेबसाइट-www.iisc.ac.in

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