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MBA कपल ने की कबाड़ से फुटवेयर शोरूम की शुरुआत

ये कपल कबाड़ के बने जूते ऑनलाइन ''पादुक्स डॉट कॉम'' पर बेचता है।

MBA कपल ने की कबाड़ से फुटवेयर शोरूम की शुरुआत

किसी गैराज या ऑटो पार्ट्स की दुकानों पर किसी कोने में पड़े टायरों को देखकर भले ही आपको वे सब सिर्फ 'कबाड़' लगे, लेकिन कोशिश की जाए तो यह आपके लिए फैशन स्टेटमेंट भी साबित हो सकते हैं।

कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है मुंबई के एक एमबीए कपल ने। जे रेज और जोत्सना ने पादुक डॉट कॉम के नाम से ऑनलाइन फुटवेयर शोरूम की शुरुआत की, जो खराब हो चुके टायर से जूते बनाते हैं।

जे रेज एमबीए करने के कुछ साल बाद तक फॉरन एजुकेशन की इच्छा रखने वालों के लिए कंसल्टेंसी चलाते थे। शादी के बाद पत्नी जोत्सना के साथ मुंबई के चेंबुर इलाके से ऑनलाइन फुटवेयर शोरूम की शुरुआत की।

इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का नाम रखा गया पादुक्स। कमाल की बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म पर सिर्फ बेकार हो चुके टायर से बने फुटवेयर ही मिलते हैं। कई अलग रंग और डिजाइन में बने इन जूते-चप्पलों की काफी डिमांड बढ़ गई है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ कुछ स्टोर्स पर भी ये फुटवेअर आपको मिल सकते हैं। पादुक्स में डिजाइन हेड कैरल कॉर्नेलियो ने बताया 'हमारे जूतों के डिजाइन मेल और फीमेल दोनों के लिए हैं।

यहां तक कि हमारे जूते भारतीय पारंपरिक वेश के साथ और ज्यादा अच्छे दिखते हैं।हम बेहद जल्द नया प्रॉडक्ट लॉन्च करने वाले हैं जो पूरी तरह ट्यूब और टायरों से बना है। इन सैंडल का बेस टायर से और स्ट्रेप ट्यूब से बनी है।'

ऐसे आया आइडिया

जे ने बताया, 'हमने 2013 में पादुक की शुरुआत की थी। मैं इंटरनेट पर ब्राउज़िंग कर रहा था, तभी मैंने एक शख्स के बारे में पढ़ा जो इंडोनेशिया से बेकार हो चुके टायर इम्पोर्ट करता है।

इन टायरों को वह जूतों के सोल बनाने में इस्तेमाल करता था और फिर उन्हें यूएस में बेचता था। हमें आइडिया बेहद पसंद आया और हमने भारत में ऐसा ही कुछ करने का फैसला लिया।' जहां जूतों के सोल के लिए टायर कबाड़ी की दुकान से मिल जाते थे,

वहीं जूते के अंदर और बाहर के डिजाइन के लिए कपड़ा और दूसरी चीजें हम लोकल मार्केट से खरीद लेते थे। और इन जूतों की कीमत हमने 399 रुपये से 1100 रुपए तक रखी।

प्रोडक्ट इकोफ्रेंडली

पादुक्स की कोफाउंडर जोत्सना से जब इस स्टार्टअप की फंडिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, 'हमारे फुटवेअर न सिर्फ इको-फ्रेंडली होते हैं बल्कि वेस्ट मैनेजमेंट का भी अच्छा उदारण हैं। इस वेंचर को शुरू करने में हमने पूरी तरह अपना पैसा लगाया है। हमने बहुत सक्रिय तौर पर फंडिंग के लिए किसी से बात नहीं की, हालांकि आइडिया के लेवल पर हमने कई जगह बात की।'

सोशल मीडिया से किया प्रमोट

जे ने बताया कि उनका उद्देश्य रिटेल स्टोर से ज्यादा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर था। उन्होंने बताया, 'हमने अपने प्रॉडक्ट को प्रमोट करने के लिए सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा सहारा लिया। यहां तक कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बहुत एक्टिव कैंपेन चलाया। हालांकि दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे में कुछ रिटेल स्टोर्स पर हमारे प्रॉडक्ट मिल जाएंगे। हमारे प्रॉडक्ट बेंगलुरु में काफी फेमस हैं। हमें मिले कुल ऑनलाइन ऑर्डर का 25 प्रतिशत हिस्सा बेंगलुरु से ही मिलता है।'

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