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स्वतंत्रता दिवस 2018: जानिए कहां तक पढ़े-लिखे हैं लाला लाजपत राय, कैसे मिली पंजाब केसरी की उपाधि

15 अगस्त 2018 को देश 72वां साल मनाएगा। देश के प्रधान मंत्री लाल किले की प्राचीर से हर साल तिरंगा फहराते हैं। देश को आजाद हुए पूरे इस 15 अगस्त को 71 साल हो जाएंगे।

स्वतंत्रता दिवस 2018: जानिए कहां तक पढ़े-लिखे हैं लाला लाजपत राय, कैसे मिली पंजाब केसरी की उपाधि

15 अगस्त 2018 को देश 72वां साल मनाएगा। देश के प्रधान मंत्री लाल किले की प्राचीर से हर साल तिरंगा फहराते हैं। देश को आजाद हुए पूरे इस 15 अगस्त को 71 साल हो जाएंगे।

भारत की गाथा कई दशकों पूरानी है। ना जाने कितनी कुर्बानियां लेकर हम आजाद हुए। जिन क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दे दिया उनमें से एक क्रांतिकारी, रचनाकार और पंजाब केसरी लाला लाजपत राय भी हैं। जिन्हें देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दे दिया।

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गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे। भारत की आजादी के आन्दोलन के प्रखर नेता लाला लाजपत राय का नाम ही देशवासियों में स्फूर्ति तथा प्रेरणा का संचार कराता है।

लाला लाजपत राय जन्म 28 जनवरी 1865 को अपने ननिहाल के गांव ढुंढिके, पंजाब में हुआ था। लाला पिता लाला राधाकृष्ण लुधियाना जिले के जगरांव कस्बे के निवासी थे।

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लाला लाजपत राय की शिक्षा

लाला लाजपत राय की पढ़ाई पांचवें साल में प्रारंभ हुई थी। लाला की प्रारंभिक शिक्षा रिवाड़ी में हुई थी। लाला प्रारंभिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए पंजाब की राजधानी लाहौर चले गए।

1880 में उन्होंने कलकत्ता तथा पंजाब विश्वविद्यालय से एंट्रेंस की परीक्षा एक साल में पास की थी। उन्होंने 1982 में गर्वमेंट कॉलेज एफए की परीक्षा तथा मुख्यारी की दोनो परीक्षाएं एक साथ पास की थी।

इसी दौरान लाला आर्य समाज के सम्पर्क में आए और उसके सदस्य बन गए। वे बहुविधि क्रियाकलाप में साहित्य-लेखन एक महत्वपूर्ण आयाम है। लाला ऊर्दू तथा अंग्रेजी के निपुर्ण रचनाकार थे।

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