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देश का पहला कैशलैश विश्वविद्यालय बना इग्नू

जिन कोर्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा होती है वहां ई-ट्रांजेक्शन से ही भुगतान होगा।

देश का पहला कैशलैश विश्वविद्यालय बना इग्नू
नई दिल्ली. नोटबंदी के बाद पहली बार किसी विश्वविद्यालय ने कैश लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह से नकार दिया है। दरअसल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) देश का पहला कैशलैश विश्वविद्यालय बन गया है। यहां अब कोई भी लेन-देन नकद नहीं होगा। विश्वविद्यालय ने केन्द्र सरकार के कैशलेस अर्थव्यवस्था मिशन से जुड़कर ये कदम उठाए हैं।
ख़बर के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि आवेदन फार्म से लेकर छात्रों की फीस तक कहीं भी कैश जमा नहीं होगा। यहां तक कि बैंक ड्राफ्ट भी नहीं लिए जाएंगे। सब कुछ ऑनलाइन ही होगा। आवेदन फार्म होगा निशुल्क: डॉ. रवीन्द्र कुमार ने बताया कि जुलाई 2017 से इग्नू के सभी ऐसे पाठ्यक्रम जिनमें सीधे दाखिले लिए जाते हैं, उनके आवेदन फार्म और प्रॉस्पेक्टस नि:शुल्क देने का फैसला लिया है।
जिन कोर्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा होती है वहां ई-ट्रांजेक्शन से ही भुगतान होगा। स्टूडेंट्स डेबिट कार्ड: दाखिला लेने पर छात्रों को इग्नू स्टूडेंट्स डेबिट कार्ड दिया जाएगा। जिसका प्रयोग वे इग्नू की सेवाओं के साथ ही निजी ट्रांजेक्शंस में भी कर सकेंगे। ये कार्ड यूनीक आईडेंटिफिकेशन ऑफ इंडिया अथॉरिटी व यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ओर से दिया जाएगा।
सोमवार को विश्वविद्यालय ने ‘आओ हम डिजिटल हो जाएं’ प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। इसमें राजधानी के 60 ई-क्रान्ति वालंटियर प्रशिक्षित किए गए। क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मनोरमा सिंह ने बताया कि ई-क्रान्ति वालंटियर की मदद से 31 दिसम्बर 2016 तक 1,50,000 परिवारों को कैशलेस व डिजिटल लेन-देन का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसकी शुरुआत बलरामपुर से लेकर बुंदेलखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों से की जाएगी।
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