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एस्ट्रोनॉमी मिलेगी भविष्य को उड़ान, साइंस पसंद है तो ऐसे लगाये अपने सपनो को पंख

अगर आपने फिजिक्स या मैथ्स से बीएससी या एमएससी किया है और स्पेस साइंस में रुचि है तो आप एस्ट्रोनॉमी से रिलेटेड कोर्स कर सकते हैं।

एस्ट्रोनॉमी मिलेगी भविष्य को उड़ान, साइंस पसंद है तो ऐसे लगाये अपने सपनो को पंख

अगर आपने फिजिक्स या मैथ्स से बीएससी या एमएससी किया है और स्पेस साइंस में रुचि है तो आप एस्ट्रोनॉमी से रिलेटेड कोर्स कर सकते हैं। इसके बाद आपके लिए देश-विदेश के स्पेस सेंटर्स में जॉब्स की संभावनाएं खुल जाएंगी। इस बारे में बहुत उपयोगी जानकारियां।

बहुत से लोगों की रुचि अंतरिक्ष के अनंत रहस्यों को जानने में होती है। अगर आपको भी सितारों को देखना बचपन से ही बहुत अच्छा लगता है और दिलो-दिमाग में उन्हें लेकर अनंत जिज्ञासाएं उठती हों तो आप सितारों की दुनिया की खोजबीन में अपना करियर भी बना सकते हैं। हम बात एस्ट्रो फिजिक्स या एस्ट्रोनॉमी की तमाम शाखाओं की कर रहे हैं।

एस्ट्रो फिजिक्स का मूल एस्ट्रोनॉमी है यानी खगोल विज्ञान जो ब्रह्मांड के तमाम रहस्यों को उजागर करता है। ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने संबंधी अध्ययन मूल रूप से स्पेस साइंस है। चाहे इसरो हो या नासा हर जगह एस्ट्रो फिजिसिस्ट की जरूरत होती है। क्योंकि अंतरिक्ष की यात्रा में जो एस्ट्रोनॉट भेजे जाते हैं, उनकी इस यात्रा की तमाम बाधाओं और सवालों का हल ये एस्ट्रो फिजिसिस्ट ही सुझाते हैं।

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मेन कोर्सेस

इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आपके पास कई ऑप्शन हैं। अगर आपके पास धैर्य है और इस क्षेत्र में बहुत ऊंचाई तक जाने की महत्वाकांक्षा है तो 5 साल का रिसर्च ओरिएंटेड प्रोग्राम एमएस इन एस्ट्रो फिजिक्स कर सकते हैं। लेकिन अगर आप यह नहीं करना चाहते तो 3 साल के बैचलर प्रोग्राम्स की भी व्यवस्था है। इसके अलावा अगर आप फिजिक्स या मैथेमेटिक्स से स्नातक हैं तो थ्योरिटिकल एस्ट्रोनॉमी कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं।

अगर आप इंस्ट्रूमेंटेशन/एक्सपेरिमेंटल एस्ट्रोनॉमी में प्रवेश चाहते हैं तो आपके पास इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रिकल कम्युनिकेशन में बीई की डिग्री होनी चाहिए। फिजिक्स, थ्योरिटिकल एंड ऑब्जर्वेशनल एस्ट्रोनॉमी, एटमोस्फेरिक एंड स्पेस साइंस में मास्टर, पीएचडी कर सकते हैं। देश के कई विश्वविद्यालयों और विज्ञान संस्थानों में स्पेस साइंस में एमएससी कोर्स भी उपलब्ध है।

नेचर ऑफ वर्क

एस्ट्रोनॉमी में अनगिनत काम होते हैं और हर किसी के काम एक दूसरे से काफी अलग होते हैं। जैसे-जो लोग तारों का अध्ययन करते हैं, जरूरी नहीं कि वह ग्रहों के बारे में भी उतना ही जानते हों, जितना तारों के बारे में। कुछ सिर्फ धूमकेतुओं के बारे में अध्ययन करते हैं तो कुछ पृथ्वी के वायुमंडल पर अपनी नजर रखते हैं।

अलग-अलग अध्ययन के चलते एस्ट्रोनॉमी की बहुत सारी ब्रांचेज हैं मसलन- एस्ट्रो केमिस्ट्री जो अंतरिक्ष मंस पाए जाने वाले रासायनिक तत्वों का अध्ययन करते हैं। एस्ट्रो मेट्रोलॉजी इस शाखा में खगोलीय वस्तुओं की स्थिति और उनकी गति के बारे में अध्ययन किया जाता है।

जबकि एस्ट्रो फिजिक्स में खगोलीय चीजों की फिजिकल प्रॉपर्टी के बारे में पढ़ाई होती है। एस्ट्रोलॉजी और एस्ट्रो बायोलॉजी में क्रमशः ग्रहों की संरचना और उनकी कंपोजीशन और पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर जीवन की क्या संभावनाएं हैं, इन बातों का अध्ययन किया जाता है।

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पॉसिबिलिटीज हैं बहुत

माना जा रहा है कि साइंस ने पृथ्वी पर बहुत ज्यादा विकास कर लिया है, अब अगले कुछ दशकों में उसका सबसे ज्यादा जोर अंतरिक्ष के विकास में ही होगा। यह इस बात की संभावना से लैस है कि आने वाले दशकों में एस्ट्रोनॉमी के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ें प्रोफेशनल्स के लिए बहुतायत में जॉब होगी।

हिंदुस्तान में ही 2 दर्जन से ज्यादा ऐसे बड़े सरकारी संस्थान हैं, जो हजारों की तादाद में विभिन्न एस्ट्रो साइंस के प्रोफेशनल्स को रोजगार देते हैं। इनमें प्रमुख हैं- इसरो, नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रो फिजिक्स पुणे। तमाम फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्रीज, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, स्पेस फिजिक्स लेबोट्रीज, स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, इंडियन रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन बैंगलुरु।

रिम्यूनरेशन

इस क्षेत्र में औपचारिक नौकरी लगने के पहले ही जब आप जूनियर रिसर्च फेलो होते हैं, उसी समय आपको शुरुआत में 8000 फिर 9000 और अंत में करीब 12000 रुपए प्रतिमाह मिलने लगते हैं। डिग्री हासिल करने के बाद नौकरी की शुरुआत 40 से 50 हजार रुपए मासिक से होती है और इसके बाद अनुभव के आधार पर सैलरी बढ़ती जाती है।

प्रमुख संस्थान

आईआईएससी, बैंगलुरु

वेबसाइट: www.iisc.ac.in

टीआईएफआर, मुंबई

वेबसाइट: www.tifr.res.in

महात्मा गांधी विवि, कोट्टायम

वेबसाइट: www.mgu.ac.in

फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री, अहमदाबाद

वेबसाइट: www.prl.res.in

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