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सोशल वर्क में कॅरियर, ऐसे बनाएं समाज सेवा के साथ सुनहरा भविष्य

दिनों-दिन कई तरह की सामाजिक समस्याएं बढ़ रही हैं और उन्हें दूर करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस वजह से सोशल वर्क का दायरा बढ़ा है और यहां ट्रेंड लोगों की डिमांड भी बढ़ने लगी है।

सोशल वर्क में कॅरियर, ऐसे बनाएं समाज सेवा के साथ सुनहरा भविष्य

दिनों-दिन कई तरह की सामाजिक समस्याएं बढ़ रही हैं और उन्हें दूर करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस वजह से सोशल वर्क का दायरा बढ़ा है और यहां ट्रेंड लोगों की डिमांड भी बढ़ने लगी है। जिन यंगस्टर्स की रुचि सोशल वर्क में है, उनके लिए काफी अच्छे अवसर हैं। जानिए, सोशल वर्क की फील्ड में एंट्री प्रोसेस और कॅरियर बनाने से जुड़ी जरूरी जानकारियां।

एंट्री प्रोसेस

सोशल वर्क की फील्ड में काम करने के लिए किसी खास डिग्री की जरूरत नहीं होती है, लेकिन सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए होम साइंस, साइकोलॉजी, सोशियोलॉजी या सोशल साइंस में ग्रेजुएशन के बाद सोशल वेलफेयर, सोशल साइंस में मास्टर्स करना अच्छा रहेगा।

भारत में कई इंस्टीट्यूट्स, यूनिवर्सिटीज में इससे संबंधित कोर्स संचालित किए जाते हैं। जहां एंट्रेंस टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर दाखिला मिलता है। इसके अलावा, एनजीओ मैनेजमेंट का कोर्स भी कर सकते हैं। देश में कई इंस्टीट्यूट्स और यूनिवर्सिटी में एनजीओ मैनेजमेंट से जुड़े कोर्स शुरू हो चुके हैं।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (मुंबई), दिल्ली यूनिवर्सिटी, राजस्थान यूनिवर्सिटी, जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय, सोशल वर्क में डिप्लोमा और डिग्री के कई कोर्स संचालित कर रहे हैं।

आप सर्टिफिकेट इन सोशल वर्क, बैचलर ऑफ सोशल साइंस, मास्टर ऑफ सोशल वर्क, एमफिल (सोशल वर्क), मास्टर ऑफ लेबर वेलफेयर और पीएचडी (सोशल वर्क) जैसे कोर्स कर सकते हैं।

खासतौर पर सोशल वर्क में रिसर्च, सामजिक विज्ञान, परिस्थितिकी और कल्याण वातावरण, समसामयिक सामाजिक समस्याएं, सामुदायिक स्वास्थ्य और समाज कार्य, जनसंख्या और लैंगिक पहलू, मानव व्यवहार के बारे में पढ़ाया जाता है।

वर्क प्रोफाइल

दूसरे क्षेत्र की तरह सोशल वर्क की फील्ड में भी अब स्पेशलाइज्ड लोगों की डिमांड बढ़ने लगी है। चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक सोशल वर्क, अपराधियों को सुधारने पर आधारित समाज कार्य ये हैं।

शहरी और ग्रामीण समुदाय विकास से जुड़े मानव कल्याण के कार्य परिवार और बाल विकास, पुनर्वास, मानव अधिकार और सामाजिक कर्त्तव्य, प्राकृतिक आपदा में बचाव संबंधित कार्य, नशे की लत से मुक्तिदिलाने पर आधारित कार्य अशिक्षा दूर करने से जुड़े काम,

घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के सशक्तिकरण पर आधारित कार्य, मानसिक और शारीरिक तौर पर विकलांग लोगों के पुनर्वास से संबंधित समाज कार्य में स्पेशलाइज्ड लोगों की जरूरत होती है।

इसके अलावा, स्टूडेंट्स सोशल सर्विस वर्कर, सोशल ग्रुप वर्कर, स्कूल काउंसलर, रिसर्च एनालिस्ट, साइकोलॉजिकल सोशल वर्कर, मेडिकल सोशल वर्कर, इंडस्ट्रियल सोशल वर्कर, फैमिली काउंसलर, चाइल्ड वेलफेयर वर्कर और इंटरनेशनल सोशल वर्कर के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।

जॉब ऑप्शंस

आज जिस तरह से डिसेबिलिटी, ड्रग्स, डिप्रेशन और बुजुर्गों की समस्याएं बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए समाजसेवा में युवाओं की काफी दरकार है। सोशल सेक्टर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को लोगों की आर्थिक, सामाजिक और मानसिक समस्याओं को जानना, समझना और फिर उसका हल निकालना होता है।

इसे काउंसलिंग, कॉन्फ्रेंस, सेमिनार, अवेयरनेस प्रोग्राम्स के जरिए पूरा किया जाता है। इसके अलावा सोशल वर्कर जरूरतमंदों तक संसाधन भी पहुंचाते हैं। सरकारी और गैर सरकारी, दोनों ही क्षेत्रों में संभावनाएं हैं।

इस क्षेत्र में एनजीओ मैनेजर, कम्युनिटी सर्विस प्रोवाइडर, एनजीओ प्रोजेक्ट कॉओर्डिनेटर, एनजीओ ह्यूमन रिसोर्स और फाइनेंस मैनेजर के तौर पर भी काम कर सकते हैं। मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर, एसओएस विलेज, फिक्की, अमर ज्योति चेरिटेबल ट्रस्ट, प्रयास, एएफएआरएम में नौकरी की तलाश कर सकते हैं।

इसके अलावा, रूरल हेल्थ केयर सेक्टर, एड्स अवेयरनेस प्रोजेक्ट, चाइल्ड एब्यूज प्रिवेंशन कमिटी, ड्रग रिहेबिलिटेशन सेंटर, स्ट्रीट चिल्ड्रन एजुकेशन, सेक्स वर्कर फोरम में भी कार्य करने का अवसर होता है। इसके अलावा सोशल वर्क की फील्ड में विदेशी संस्थाओं से जुड़कर कार्य करने का भरपूर अवसर होता है।

जरूरी स्किल्स

सोशल वर्क फील्ड में काम करने के लिए कम्युनिटी या लोगों के साथ मिलकर काम करने का अनुभव जरूरी है। कम्युनिकेशन स्किल भी काफी अच्छी होनी चाहिए। साथ ही, स्थानीय भाषा के साथ-साथ इंटरनेशनल लैंग्वेज की भी जानकारी जरूरी है, क्योंकि कई बार इस फील्ड से जुड़े पेशेवर को इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर कार्य करना पड़ता है।

प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी का होना भी जरूरी है। साथ ही, सामाजिक न्याय, समाज के उपेक्षित वर्ग को मेन स्ट्रीम में शामिल करने, वंचित लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के प्रयास करने को लेकर प्रतिबद्ध होना जरूरी है। इसके अलावा, सोशल वर्क की फील्ड में काम करने के लिए आपके पास लोगों के साइकोलॉजिकल, इमोशनल पक्षों की समझ भी होनी चाहिए। आपमें धैर्य और संवेदनशीलता होना बेहद जरूरी है। सकारात्मक बदलाव और सही फैसले लेने की क्षमता भी होनी चाहिए।

सैलरी पैकेज

सोशल वर्क की फील्ड में काम करने वालों को अच्छी सैलरी भी मिलने लगी है। यहां सैलरी का निर्धारण इस आधार पर होता है कि कार्य का क्षेत्र कैसा है? किस प्रकार का है और उसका स्तर क्या है? फिर भी अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन में अच्छी सैलरी मिल जाती है।

साथ ही, इन संगठन के साथ जुड़ने से देश-दुनिया घूमने का मौका भी मिलता है। काबिलियत के हिसाब से 20-25 हजार से लेकर एक लाख से ऊपर तक का वेतन एनजीओ क्षेत्र में मिल सकता है।

वेतन के अलावा, विभिन्न मुद्दों पर किसी एनजीओ से प्रोजेक्ट वर्क के तौर पर रिसर्च, बुक राइटिंग, फील्ड वर्क संबंधी कुछ कार्य लेकर भी पैसे कमाने के यहां काफी अवसर हैं।

एक्सपर्ट व्यू

डॉ.शशि रानी देव

असिस्टेंट प्रोफेसर

डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क

दिल्ली यूनिवर्सिटी

बढ़ने लगे हैं अवसर

सोशल वर्क की फील्ड में युवाओं के लिए काफी संभावनाएं हैं। वर्तमान में जब बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अपना सामाजिक दायित्व महसूस करने लगी हैं, तो ग्रासरूट एनजीओ के लिए उनका आर्थिक सहयोग भी बढ़ रहा है।

विकास के नए तौर-तरीकों के चलते हमारे मूल्यों में जिस तरह से गिरावट आ रही है, ऐसे में सोशल सेक्टर की भूमिका काफी बढ़ गई है। जाहिर है नौजवानों के लिए इस क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ेंगी। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां विदेशों में भी काम के काफी अवसर हैं।

यूनिसेफ, यूनाइटेड नेशन, यूनेस्को, ओसीडी, विश्वबैंक, नाटो, विश्व स्वास्थ्य संगठन, एमनेस्टी इंटरनेशनल, रेडक्रॉस, ग्रीनपीस, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट, एनवॉयर्नमेंट प्रोटेक्शन, यूनाइटेड नेशन एजुकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन जैसी नामी संस्थाओं के अलावा दूसरी अन्य वैश्विक स्तर पर काम कर रही संस्थाओं के साथ जुड़ कर भी कार्य किया जा सकता है।

प्रमुख संस्थान

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई

दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली

एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ़ एनजीओ मैनेजमेंट, नोएडा

लखनऊ यूनिवर्सिटी, लखनऊ

जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, रांची

इंस्टीट्यूट ऑफ़ रूरल मैनेजमेंट, आणंद

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