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खुशखबरी: छात्र ऑनलाइन अटेस्ट करा सकेंगे डॉक्यूमेंट

राज्यों की ओर से जारी प्रमाणपत्रों को भी ई-सनद से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

खुशखबरी: छात्र ऑनलाइन अटेस्ट करा सकेंगे डॉक्यूमेंट

पढ़ाई या काम के सिलसिले में विदेश जाने वाले छात्र अपने सर्टिफिकेट्स को ऑनलाइन अटेस्ट करा सकते हैं। सरकार के तीन मंत्रालयों (विदेश, मानव संसाधन और सूचना प्रौद्योगिकी) ने इस दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया है।

इसके तहत सीबीएसई की ऑनलाइन अकैडमिक डिपॉजिटरी (परिणाम मंजूषा) को बुधवार को विदेश मंत्रालय के ऑनलाइन अटेस्टेशन सिस्टम ई-सनद से जोड़ दिया गया है। इससे सीबीएसई से जुड़े दस्तावेजों को विदेश मंत्रालय ऑनलाइन वेरिफिकेशन कर उसे अटेस्टेशन के साथ स्टूडेंट के पास भेज सकता है।

जावड़ेकर ने बेटे के साथ हुआ वाकया सुनाते हुए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी शिक्षा संस्थानों का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा। फिलहाल यूनिवर्सिटी का डेटा उपलब्ध नहीं है।

सुविधा देने वाला पहला राज्य तेलंगाना
फिलहाल राज्यों की ओर से जारी प्रमाणपत्रों को भी ई-सनद से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सबसे पहले तेलंगाना साथ आया है। ई-सनद को सीबीएसई की डिपॉजिटरी से जोड़ने के मौके पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि मंत्रालय में कई सेवाओं को ऑनलाइन करने के बावजूद दस्तावेजों को अटेस्ट करने का कोई समाधान नहीं सूझ रहा था।
सचिवों के ग्रुप में समस्या रखी गई, पर समाधान नहीं निकला। ऑफलाइन सिस्टम में करप्शन का रैकेट था। सिर्फ दिल्ली, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद और कोलकाता में इसकी सुविधा उपलब्ध थी। दूसरे शहरों के लोग इन सेंटरों तक आने की जगह भारी खर्च पर एजेंटों का सहारा लेते थे।
ये पांच सेंटर और खोले गए
असुविधा को देखते हुए पांच और सेंटर बढ़ाए गए- बेंगलुरु, गोवा, चंडीगढ़, मुंबई और त्रिवेंद्रम। पर समस्या सुलझी नहीं। एक दिन कैबिनेट की बैठक के बाद सुषमा स्वराज ने सीढ़ियों पर उतरते वक्त ही जावड़ेकर से मदद का अनुरोध किया। फौरन 9 मई को मीटिंग बुलाई गई और एक मीटिंग में ही सारी बातों का फैसला हो गया।
जावड़ेकर ने कहा कि मंत्रालयों में क्वेरी लगाने की आदत इस तरह की है कि मामले बरसों लटके रहते हैं। यह देखते हुए तीन मंत्रालयों का एक मंच पर आना आसान नहीं था। आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ई-सनद में प्लंबर और फिटर जैसे कम आय वर्गों को जोड़ने की मांग की।
इस पर विदेश मंत्री ने देश भर में कॉमन सर्विस सेंटर सुविधा के जरिये यह सुविधा देने का प्रस्ताव रखा, ताकि दो लोग ऑनलाइन न हों वो भी इन सेंटरों से सुविधा हासिल करें।
ऐसे अटेस्ट हो सकेगा विदेश जाने वालों का दस्तावेज
सीबीएसई से जुड़े छात्रों की मार्कशीट, पास सर्टिफिकेट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट अकैडमिक डिपॉजिटरी (परिणाम मंजूषा) पर ऑनलाइन उपलब्ध रहते हैं। स्टूडेंट दुनिया में कहीं भी रहें, अपने दस्तावेज ऑनलाइन हासिल कर सकते हैं।
सीबीएसई के चेयरमैन आरके चतुर्वेदी ने बताया कि दस्तावेज खोने पर यह इंतजाम बेहद मददगार है। अब तक दस्तावेज खोने पर नया बनवाने की प्रक्रिया टेढ़ी रही है। एफआईआर दर्ज कराने, इश्तेहार देने और स्कूल से सिफारिश कराने के बाद डिविजनल ऑफिस जाने की प्रक्रिया मुश्किल है।
अब स्टूडेंट मौजूदा साल के दस्तावेज मुफ्त में, जबकि पिछले बरसों के लिए 100 रुपये की फीस देकर ऑनलाइन हासिल कर सकते हैं।
11 लाख को मिला लाख, 25 लाख के कागजात सुरक्षित
अब तक 11 लाख बच्चे इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। इसके इतर करीब 25 लाख बच्चों के 2014, 2015 और 2016 के दस्तावेज उनके डिजिटल लॉकर में रख दिए गए हैं, जो वे कभी भी हासिल कर सकते हैं। शिक्षा और रोजगार देने वाले संस्थान भी ऑनलाइन प्लैटफॉर्म पर दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कर सकते हैं।
फिलहाल 232 संस्थान इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। इस डिपॉजिटरी को ई-सनद से जोड़ दिया गया है, जो विदेश मंत्रालय का ऑनलाइन प्लैटफॉर्म है, जिसके जरिये विदेश जाने वाले लोग अपने दस्तावेजों को मंत्रालय से वेरिफाई करा सकते हैं।
ये दस्तावेज अकैडमिक, पर्सनल और कमर्शल हो सकते हैं। ऑफलाइन प्रक्रिया में वेरिफिकेशन के लिए दस्तावेज जारी करने वाली अथॉरिटी के पास अप्लाई करना पड़ता है। वहां वेरिफिकेशन के बाद मामला राज्य के गृह विभाग के जरिये होते हुए विदेश मंत्रालय की आउटसोर्सिंग वाली एजेंसी के पास आता है।
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