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GST लागू होने से एजुकेशन में होगा ये बदलाव, होंगे ये फायदे

शिक्षा के क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों को कई सेवाओं में छूट दी गई है।

GST लागू होने से एजुकेशन में होगा ये बदलाव, होंगे ये फायदे

आज मध्य रात्री से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) बिल लागू हो जाएगा। जिससे पूरे देश में से एक ही टैक्स लगेगा। लेकिन जीएसटी को लेकर लोगों के दिमाग में कई सवाल उठ रहे हैं। जीएसटी से छात्रों को कोई परेशानी नहीं होगी। मगर, यह पूरी तरह से सही नहीं है।

बता दें कि शैक्षणिक संस्थानों द्वारा दी जाने वाली कई सेवाओं को छूट दी जाएगी। छात्रों के रोजमर्रा में उपयोग होने वाले कुछ सामान जैसे स्कूल बैग, रंगीन किताबें और नोटबुक सस्ते हो जाएंगे।

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मनीकंट्रोल के की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां और कारोबारी तैयारियों में जुट गए हैं। नए टैक्स सिस्टम के लिए अकाउंटेंट, टैक्स कंसल्टेंट्स को रखा जा रहा है। अधिकांश शैक्षणिक संस्थान थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर से सेवाएं लेते हैं।

जिनमें सुरक्षा, परिवहन, खानपान और हाउसकीपिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। अब इन पर 18 फीसद की दर से जीएसटी लगेगा, जबकि वर्तमान में तीन फीसद कर लगता है। इसका असर बढ़ी हुई फीस के रूप में दिखेगा।

इसे एक उदाहरण से ऐसे समझा जा सकता है कि यदि कोई छात्र शीर्ष कॉलेज में कोर्स के लिए एक साल में एक लाख रुपए का भुगतान करता है, तो वर्तमान में वह 3,000 रुपए बतौर कर देता है। मगर, 1 जुलाई के बाद से उन्हें टैक्स के रूप में 15,000 रुपए का अधिक भुगतान करना होगा।

वैसे, जीएसटी को भारतीय इकोनॉमी के हर क्षेत्र के लिए अच्छा बताया जा रहा है। आईक्या ह्युमन कैपिटल सॉल्यूशंस का कहना है कि इनडायरेक्ट टैक्स के इस नए दौर में प्रवेश के लिए 1 लाख टैक्स कंसल्टेंट्स की जरूरत होगी और जॉब्स में तेजी आएगी।

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अधिकांश शैक्षणिक संस्थान थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर से सेवाएं लेते हैं, जिनमें सुरक्षा, परिवहन, खानपान और हाउसकीपिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। अब इन पर 18 फीसद की दर से जीएसटी लगेगा, जबकि वर्तमान में तीन फीसद कर लगता है।

इस तरह की सभी सेवाओं पर अब 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा। साल 2012 से लेकर अप्रैल 2017 तक ऐसी सेवाओं से कर को हटा लिया गया था और बाद में इन पर तीन फीसद कर लगाया गया था। जीएसटी परिषद ने पारंपरिक कोर्स को कर के दायरे से बाहर रखा है।

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